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आधी-अधूरी किताबें, कैसे पढ़ाई करें विद्यार्थी
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माई सिटी रिपोर्टर
करनाल। शिक्षा सत्र शुरू हुए तीन माह बीत चुके, लेकिन अब तक सरकारी स्कूलों में पढ़ने वाले विद्यार्थियों को पूरी किताबें नहीं मिल सकी हैं। जिले में पहली से आठवीं तक के विद्यार्थियों को फ्री किताबें दी जानी थीं। इसमें से अब तक सिर्फ चंद किताबें ही मुहैया करवाई जा सकी हैं। ऐसी स्थिति में यदि अध्यापक स्कूल में होम वर्क देता है तो विद्यार्थियों के लिए घर में उसको करना संभव नहीं हो पा रहा है।
जिले में 779 स्कूल हैं। इसमें करीब 1.25 लाख विद्यार्थी पढ़ते हैं। इसमें से पहली से आठवीं तक के 80 हजार विद्यार्थी हैं। हरियाणा सरकार ने हरेक विद्यार्थी के हाथ में किताब देने के लिए यह पहल की थी। जिसके लिए सारी व्यवस्थाएं दुरुस्त कर ली गईं थीं। जिला मौलिक शिक्षा विभाग से मिली जानकारी के अनुसार किताबों की व्यवस्था की जा रही है। रोजाना कुछ विषयों की किताबें स्कूलों में पहुंच रही हैं। हालांकि अब तक पूरी तरह से किताबें नहीं पहुंच सकीं हैं। इसके लिए लगातार संपर्क किया जा रहा है, जिससे विद्यार्थियों की पढ़ाई में समस्या न आए।
सरकार द्वारा पिछले साल कोरोना काल में राजकीय स्कूलों के विद्यार्थियों को किताबों के रुपये उनके बैंक खातों में डाले थे, लेकिन उस समय भी किताबें बाजार में समय पर नहीं मिल सकीं। इस स्थिति को देखते हुए सरकार ने विद्यार्थियों को निशुल्क किताबें उपलब्ध करवाने के आदेश दिए, लेकिन अब तक स्कूलों में किताबें नहीं आई हैं।
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पास आउट विद्यार्थियों की किताबें कराई उपलब्ध
सेशन शुरू होते ही किताबों की समस्या का हल निकालने का प्रयास किया गया था। इसके अंतर्गत नए सत्र के विद्यार्थियों को कक्षा उत्तीर्ण कर चुके विद्यार्थियों से उनकी पुरानी किताबें दिलवाईं गईं। जिससे पढ़ाई की शुरुआत हो गई। कुछ विद्यार्थियों के पास तो फटी-पुरानी किताबें हैं, जिसकी वजह से ठीक से पढ़ाई नहीं कर पा रहे। साथ ही बाजार में दुकानों पर भी पर्याप्त संख्या में किताबें नहीं मिल रही हैं।
राजकीय स्कूलों में मिलने वाली किताबें अब आनी शुरू हो चुकी हैं। एक सप्ताह में सारी किताबें पहुंच जाएंगी। कुछ विषयों की किताबें स्कूलों में पहुंच चुकी हैं और विद्यार्थियों को बांटी भी जा चुकी हैं। हालांकि हमने सेशन में विद्यार्थियों की परेशानी को देखते हुए उनको पास आउट स्टूडेंट्स से किताबें दिलवा दी थीं। जिससे पढ़ाई में ज्यादा बाधा नहीं आई।
रोहताश वर्मा, जिला मौलिक शिक्षा अधिकारी
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करनाल। शिक्षा सत्र शुरू हुए तीन माह बीत चुके, लेकिन अब तक सरकारी स्कूलों में पढ़ने वाले विद्यार्थियों को पूरी किताबें नहीं मिल सकी हैं। जिले में पहली से आठवीं तक के विद्यार्थियों को फ्री किताबें दी जानी थीं। इसमें से अब तक सिर्फ चंद किताबें ही मुहैया करवाई जा सकी हैं। ऐसी स्थिति में यदि अध्यापक स्कूल में होम वर्क देता है तो विद्यार्थियों के लिए घर में उसको करना संभव नहीं हो पा रहा है।
जिले में 779 स्कूल हैं। इसमें करीब 1.25 लाख विद्यार्थी पढ़ते हैं। इसमें से पहली से आठवीं तक के 80 हजार विद्यार्थी हैं। हरियाणा सरकार ने हरेक विद्यार्थी के हाथ में किताब देने के लिए यह पहल की थी। जिसके लिए सारी व्यवस्थाएं दुरुस्त कर ली गईं थीं। जिला मौलिक शिक्षा विभाग से मिली जानकारी के अनुसार किताबों की व्यवस्था की जा रही है। रोजाना कुछ विषयों की किताबें स्कूलों में पहुंच रही हैं। हालांकि अब तक पूरी तरह से किताबें नहीं पहुंच सकीं हैं। इसके लिए लगातार संपर्क किया जा रहा है, जिससे विद्यार्थियों की पढ़ाई में समस्या न आए।
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सरकार द्वारा पिछले साल कोरोना काल में राजकीय स्कूलों के विद्यार्थियों को किताबों के रुपये उनके बैंक खातों में डाले थे, लेकिन उस समय भी किताबें बाजार में समय पर नहीं मिल सकीं। इस स्थिति को देखते हुए सरकार ने विद्यार्थियों को निशुल्क किताबें उपलब्ध करवाने के आदेश दिए, लेकिन अब तक स्कूलों में किताबें नहीं आई हैं।
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पास आउट विद्यार्थियों की किताबें कराई उपलब्ध
सेशन शुरू होते ही किताबों की समस्या का हल निकालने का प्रयास किया गया था। इसके अंतर्गत नए सत्र के विद्यार्थियों को कक्षा उत्तीर्ण कर चुके विद्यार्थियों से उनकी पुरानी किताबें दिलवाईं गईं। जिससे पढ़ाई की शुरुआत हो गई। कुछ विद्यार्थियों के पास तो फटी-पुरानी किताबें हैं, जिसकी वजह से ठीक से पढ़ाई नहीं कर पा रहे। साथ ही बाजार में दुकानों पर भी पर्याप्त संख्या में किताबें नहीं मिल रही हैं।
राजकीय स्कूलों में मिलने वाली किताबें अब आनी शुरू हो चुकी हैं। एक सप्ताह में सारी किताबें पहुंच जाएंगी। कुछ विषयों की किताबें स्कूलों में पहुंच चुकी हैं और विद्यार्थियों को बांटी भी जा चुकी हैं। हालांकि हमने सेशन में विद्यार्थियों की परेशानी को देखते हुए उनको पास आउट स्टूडेंट्स से किताबें दिलवा दी थीं। जिससे पढ़ाई में ज्यादा बाधा नहीं आई।
रोहताश वर्मा, जिला मौलिक शिक्षा अधिकारी