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Karnal News: महिलाओं में बढ़ रही जागरूकता...अब हिंसा छिपाना नहीं चाहती
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संवाद न्यूज एजेंसी
करनाल। जिले में घरेलू हिंसा के मामले लगातार बढ़ रहे हैं जिनमें महिला थाना में रोजाना पांच से मामले घरेलू हिंसा से पीड़ित महिलाएं पहुंचती है। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि महिलाएं पहले के मुकाबले अपराध और हिंसाओं के प्रति जागरूक रहने लगी हैं। वह अपने लिए अब आवाज उठा रही हैं जिसमें हिंसा को सहने के बजाय कानूनी लड़ाई को प्राथमिकता देने लगी हैं। जिले के वन स्टॉप केंद्र में हर माह पांच से छह महिलाएं घरेलू हिंसा से तंग होकर शरण ले रही हैं।
वन स्टॉप केंद्र में पिछले सात से 8 महीनों में लगभग 150 से अधिक महिलाएं शरण ले चुकी हैं जिनमें अधिकतर अपने घरों से भाग आई हैं। ये महिलाएं शारीरिक, मानसिक, आर्थिक और भावनात्मक हिंसा का सामना कर रही होती है जो अपनी सुरक्षा की तलाश में केंद्र का सहारा लेती हैं। पुलिस अधिकारी एसएचओ कन्नू प्रिया ने बताया कि कुछ समय पहले देखा जाता था कि महिलाओं में कुछ भी कहने का डर हुआ करता था लेकिन वर्तमान में स्थिति बदल चुकी हैं। आज महिलाएं घर छोड़ने को तैयार है लेकिन गलत के खिलाफ आवाज उठा रही है। महिलाओं के साथ घरेलू हिंसा, याैन शोषण और मानसिक शोषण आज भी बड़े स्तर पर होता है लेकिन महिलाएं इतनी निडर होती जा रही हैं कि वह अपने लिए बोल रही हैं। महिला थाने व केंद्र में पहले महिलाओं की काउंसलिंग की जाती है जिसमें कई बार बहुत गंभीर स्थिति सामने निकल आती है जिनमें महिलाओं को हर प्रकार की कानूनी व सुरक्षा की मदद प्रदान की जाती है।
महिला संरक्षण अधिकारी सविता राणा ने बताया कि घरेलू हिंसा के मामले पहले भी होते थे लेकिन महिलाएं सामने नहीं आती थीं। वह अपने साथ हो रहे हर प्रकार की हिंसा को चुपचाप सहन करती रहती थी कभी अपने परिवार के लिए तो कभी अपने बच्चों के लिए। वर्तमान में हालात बदल चुके हैं, महिलाएं बेखौफ होकर महिला थाने में आकर शिकायतें कर रहीं है। ऐसा नहीं है कि केवल महिला का पक्ष सुनकर ही कार्रवाई कर दी जाती है, पहले दोनों पक्षों की जांच की जाती है। इसके अलावा हर माह तीन से चार महिलाएं गंभीर हिंसा से पीड़ित होकर गंभीर स्थिति में पाई जाती है जिन्हें वन स्टाॅप केंद्र या उन्हें कानूनी मदद दी जाती है ताकि वह अपने लिए आवाज उठा सके।
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-बेटी ने की थी पिता के खिलाफ शिकायत
38 वर्षीय महिला के साथ पिछले कई साल से हिंसा शारीरिक नहीं बल्कि लगातार मानसिक उत्पीड़न भी किया जा रहा था। महिला का पति शक करता था। महिला ने कई बार अपने परिवार से संपर्क करने की कोशिश की लेकिन पति किसी न किसी कारण से बात नहीं करने देता। ससुराल में कई बार बात रखी लेकिन समझौता करने को कहकर रिश्ता संभालने को कहा जाता था। उसकी बेटी ने शिकायत की और पिता के खिलाफ कानूनी लड़ाई लड़ने के लिए कहा। काउंसलर ने बताया कि महिला मानसिक व शारीरिक रूप से स्वस्थ है, जिसमें महिला स्वयं नौकरी कर अपनी बेटी का खर्च उठा रही हैं।
-बेटी के उत्पीड़न पर घर से भाग थाने पहुंचीं
34 वर्षीय महिला पिछले तीन साल से घरेलू हिंसा सहन कर रही थी। महिला ने बताया कि उसका पति शराब पीकर रोज बुरी तरह से मारपीट करता था, कई बार घर से बाहर निकाल देता था। रिश्तेदार मामले को परिवार की बार कहकर दबाते रहे, पर हद तब हुई जब पति ने एक दिन गुस्से में तीन साल की बेटी को भी जमीन पर पटक कर मारा। महिला बताती है कि वह अपनी बेटी के साथ ऐसा नहीं देख सकती थी जिसके बाद वह घर से बिना बताए भाग कर आई और थाने में शिकायत की। काउंसलर ने बताया कि महिला और उसकी बच्ची को सुरक्षित जगह दी गई। महिला ने तलाक का मामला अदालत में दायर किया है।
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अप्रैल से 24 नवंबर तक घरेलू हिंसा के मामले
माह महिलाओं की संख्या
अप्रैल 9
मई 21
जून 19
जुलाई 6
अगस्त 12
सितंबर 7
अक्तूबर 4
नवंबर 3
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वन स्टॉप केंद्र में आए अब तक मामले
घरेलू हिंसा 80
बाल याैन शोषण 2
गुमशुदा 35
साइबार अपराध 5
भाग कर आईं 360
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करनाल। जिले में घरेलू हिंसा के मामले लगातार बढ़ रहे हैं जिनमें महिला थाना में रोजाना पांच से मामले घरेलू हिंसा से पीड़ित महिलाएं पहुंचती है। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि महिलाएं पहले के मुकाबले अपराध और हिंसाओं के प्रति जागरूक रहने लगी हैं। वह अपने लिए अब आवाज उठा रही हैं जिसमें हिंसा को सहने के बजाय कानूनी लड़ाई को प्राथमिकता देने लगी हैं। जिले के वन स्टॉप केंद्र में हर माह पांच से छह महिलाएं घरेलू हिंसा से तंग होकर शरण ले रही हैं।
वन स्टॉप केंद्र में पिछले सात से 8 महीनों में लगभग 150 से अधिक महिलाएं शरण ले चुकी हैं जिनमें अधिकतर अपने घरों से भाग आई हैं। ये महिलाएं शारीरिक, मानसिक, आर्थिक और भावनात्मक हिंसा का सामना कर रही होती है जो अपनी सुरक्षा की तलाश में केंद्र का सहारा लेती हैं। पुलिस अधिकारी एसएचओ कन्नू प्रिया ने बताया कि कुछ समय पहले देखा जाता था कि महिलाओं में कुछ भी कहने का डर हुआ करता था लेकिन वर्तमान में स्थिति बदल चुकी हैं। आज महिलाएं घर छोड़ने को तैयार है लेकिन गलत के खिलाफ आवाज उठा रही है। महिलाओं के साथ घरेलू हिंसा, याैन शोषण और मानसिक शोषण आज भी बड़े स्तर पर होता है लेकिन महिलाएं इतनी निडर होती जा रही हैं कि वह अपने लिए बोल रही हैं। महिला थाने व केंद्र में पहले महिलाओं की काउंसलिंग की जाती है जिसमें कई बार बहुत गंभीर स्थिति सामने निकल आती है जिनमें महिलाओं को हर प्रकार की कानूनी व सुरक्षा की मदद प्रदान की जाती है।
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महिला संरक्षण अधिकारी सविता राणा ने बताया कि घरेलू हिंसा के मामले पहले भी होते थे लेकिन महिलाएं सामने नहीं आती थीं। वह अपने साथ हो रहे हर प्रकार की हिंसा को चुपचाप सहन करती रहती थी कभी अपने परिवार के लिए तो कभी अपने बच्चों के लिए। वर्तमान में हालात बदल चुके हैं, महिलाएं बेखौफ होकर महिला थाने में आकर शिकायतें कर रहीं है। ऐसा नहीं है कि केवल महिला का पक्ष सुनकर ही कार्रवाई कर दी जाती है, पहले दोनों पक्षों की जांच की जाती है। इसके अलावा हर माह तीन से चार महिलाएं गंभीर हिंसा से पीड़ित होकर गंभीर स्थिति में पाई जाती है जिन्हें वन स्टाॅप केंद्र या उन्हें कानूनी मदद दी जाती है ताकि वह अपने लिए आवाज उठा सके।
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-बेटी ने की थी पिता के खिलाफ शिकायत
38 वर्षीय महिला के साथ पिछले कई साल से हिंसा शारीरिक नहीं बल्कि लगातार मानसिक उत्पीड़न भी किया जा रहा था। महिला का पति शक करता था। महिला ने कई बार अपने परिवार से संपर्क करने की कोशिश की लेकिन पति किसी न किसी कारण से बात नहीं करने देता। ससुराल में कई बार बात रखी लेकिन समझौता करने को कहकर रिश्ता संभालने को कहा जाता था। उसकी बेटी ने शिकायत की और पिता के खिलाफ कानूनी लड़ाई लड़ने के लिए कहा। काउंसलर ने बताया कि महिला मानसिक व शारीरिक रूप से स्वस्थ है, जिसमें महिला स्वयं नौकरी कर अपनी बेटी का खर्च उठा रही हैं।
-बेटी के उत्पीड़न पर घर से भाग थाने पहुंचीं
34 वर्षीय महिला पिछले तीन साल से घरेलू हिंसा सहन कर रही थी। महिला ने बताया कि उसका पति शराब पीकर रोज बुरी तरह से मारपीट करता था, कई बार घर से बाहर निकाल देता था। रिश्तेदार मामले को परिवार की बार कहकर दबाते रहे, पर हद तब हुई जब पति ने एक दिन गुस्से में तीन साल की बेटी को भी जमीन पर पटक कर मारा। महिला बताती है कि वह अपनी बेटी के साथ ऐसा नहीं देख सकती थी जिसके बाद वह घर से बिना बताए भाग कर आई और थाने में शिकायत की। काउंसलर ने बताया कि महिला और उसकी बच्ची को सुरक्षित जगह दी गई। महिला ने तलाक का मामला अदालत में दायर किया है।
अप्रैल से 24 नवंबर तक घरेलू हिंसा के मामले
माह महिलाओं की संख्या
अप्रैल 9
मई 21
जून 19
जुलाई 6
अगस्त 12
सितंबर 7
अक्तूबर 4
नवंबर 3
वन स्टॉप केंद्र में आए अब तक मामले
घरेलू हिंसा 80
बाल याैन शोषण 2
गुमशुदा 35
साइबार अपराध 5
भाग कर आईं 360