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जीवन को छह आयु वर्गों में बांट सरल बनाएगी सरकार : मुख्यमंत्री
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माई सिटी रिपोर्टर
करनाल। मुख्यमंत्री मनोहर लाल ने जनसंवाद के दौरान कहा कि हरियाणा सरकार व्यवस्था परिवर्तन कर रही है। परिवार पहचान पत्र के माध्यम से एकत्र डाटा के आधार पर हर वर्ग के कल्याण की जिम्मेदारी अलग-अलग विभागों को सौंपी है। लोगों की देखभाल के लिए पूरे जीवन को छह आयु वर्गों में विभाजित कर हर आयु वर्ग के लोगों का जीवन सरल बनाने की अनूठी पहल शुरू की है। उन्होंने कहा कि हरियाणा की कई योजनाओं को केंद्र सरकार की सराहना मिली है।
लाल डोरा को स्वामित्व योजना के रूप में देशभर में लागू किए जाने के बाद अब परिवार पहचान पत्र को भी कई राज्य अपनाने जा रहे हैं। बजट को आमजन ने सराहा है, विपक्षियों ने कहा था कि वह बजट को शून्य नंबर देना चाहते हैं लेकिन दे नहीं पा रहे हैं।
करनाल क्लब में आयोजित जनसंवाद कार्यक्रम को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री ने प्रदेश की जनता को अपना परिवार बताते हुए कहा कि लोगों की समस्याओं को सुनने का भी यह अनूठा प्रयोग है। उन्होंने लोगों को आश्वस्त किया कि उनकी समस्याओं का हर हालत में समाधान किया जाएगा। जो अधिकारी लापरवाही बरतेंगे, उन पर सख्त कार्रवाई होगी। पिछले आठ सालों में सरकार व्यवस्था परिवर्तन में जुटी है। इसके लिए कई नई नीतियां बनाई हैं तो कई पुराने कानूनों में संशोधन किए हैं। परिवार पहचान पत्र के माध्यम से परिवारों का डाटा एकत्र करके हर वर्ग के कल्याण के लिए नए प्रयोग किए जा रहे हैं।
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जीवन को छह आयु वर्ग में बांटकर लोगों की देखभाल की जिम्मेदारी कई विशिष्ट विभागों को सौंपने का निर्णय लिया है। जिसमें छह वर्ष तक के बच्चों को महिला एवं बाल विकास विभाग को सौंपा गया है। भले ही बच्चा वर्तमान में आंगनबाड़ी केंद्र में जा रहा हो या नहीं। छह से अधिक और 18 वर्ष तक के आयु वर्ग की जिम्मेदारी स्कूल शिक्षा विभाग को दी गई है, ताकि कोई भी बच्चा स्कूल से बाहर न रहे।
18 से 25 वर्ष तक के आयु समूह को उच्च शिक्षा विभाग को सौंपा गया, ताकि हर युवा शिक्षित हो कौशल प्राप्त कर सके। 25 से 40 वर्ष तक के आयु वर्ग को युवा अधिकारिता एवं उद्यमिता विभाग को सौंपा गया है, जिससे युवाओं के लिए कौशल, उद्यमिता एवं रोजगार सुनिश्चित हो सके। 40 से 60 वर्ष तक लोगों की देखभाल राजस्व एवं आपदा प्रबंधन विभाग को और 60 से 80 वर्ष से अधिक आयु वर्ग के लोगों की देखभाल सेवा विभाग को सौंपी गई है। 80 वर्ष से अधिक आयु के वृद्धजनों की देखभाल के लिए नया प्रयोग किया गया है। पीपीपी आंकड़ों के अनुसार 80 वर्ष या उससे अधिक आयु के करीब 3600 लोग अकेले रह रहे हैं। उनकी देखभाल के लिए वरिष्ठ नागरिक सेवा आश्रम योजना के तहत एक आश्रम बनाने की व्यवस्था की है। इस आश्रम में वरिष्ठ नागरिकों के लिए सभी सुविधाएं एक ही छत के नीचे उपलब्ध होंगी।
मुख्यमंत्री ने कहा कि उन्होंने बतौर वित्त मंत्री जो बजट पेश किया है, इसमें हर विभाग, हर क्षेत्र और हर वर्ग का ख्याल रखा है। नई योजनाओं की घोषणाएं की हैं, जिन पर एक अप्रैल से कार्य शुरू हो जाएगा। सुबह से बड़ी संख्या में लोग शिकायतें लेकर पहुंचे। संख्या अधिक होने के कारण अफसरों की ड्यूटी लगाकर चार जोन में बांटकर शिकायतें सुनी गई। शाम तक करीब 400 शिकायतें सुनी गई।
इससे पहले मुख्यमंत्री ने नरसी विलेज जाकर नगर के वार्ड-दो के कार्यकर्ताओं के साथ बैठक की। जिसमें भी बजट की अच्छाइयों को लोगों तक पहुंचाने की बात कही और निफा के सम्मान समारोह में शामिल होकर रक्तदान कराने वाली देश की विभिन्न संस्थाओं के प्रतिनिधियों को सम्मानित किया। मौके पर विधायक हरविंद्र कल्याण, मंडलायुक्त डॉ. साकेत कुमार, मुख्यमंत्री के उप प्रधान सचिव के मकरंद पाण्डुरंग, शहरी स्थानीय निकाय विभाग के निदेशक डीके बेहरा, मेयर रेनू बाला गुप्ता आदि शामिल रहे।
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करनाल। मुख्यमंत्री मनोहर लाल ने जनसंवाद के दौरान कहा कि हरियाणा सरकार व्यवस्था परिवर्तन कर रही है। परिवार पहचान पत्र के माध्यम से एकत्र डाटा के आधार पर हर वर्ग के कल्याण की जिम्मेदारी अलग-अलग विभागों को सौंपी है। लोगों की देखभाल के लिए पूरे जीवन को छह आयु वर्गों में विभाजित कर हर आयु वर्ग के लोगों का जीवन सरल बनाने की अनूठी पहल शुरू की है। उन्होंने कहा कि हरियाणा की कई योजनाओं को केंद्र सरकार की सराहना मिली है।
लाल डोरा को स्वामित्व योजना के रूप में देशभर में लागू किए जाने के बाद अब परिवार पहचान पत्र को भी कई राज्य अपनाने जा रहे हैं। बजट को आमजन ने सराहा है, विपक्षियों ने कहा था कि वह बजट को शून्य नंबर देना चाहते हैं लेकिन दे नहीं पा रहे हैं।
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करनाल क्लब में आयोजित जनसंवाद कार्यक्रम को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री ने प्रदेश की जनता को अपना परिवार बताते हुए कहा कि लोगों की समस्याओं को सुनने का भी यह अनूठा प्रयोग है। उन्होंने लोगों को आश्वस्त किया कि उनकी समस्याओं का हर हालत में समाधान किया जाएगा। जो अधिकारी लापरवाही बरतेंगे, उन पर सख्त कार्रवाई होगी। पिछले आठ सालों में सरकार व्यवस्था परिवर्तन में जुटी है। इसके लिए कई नई नीतियां बनाई हैं तो कई पुराने कानूनों में संशोधन किए हैं। परिवार पहचान पत्र के माध्यम से परिवारों का डाटा एकत्र करके हर वर्ग के कल्याण के लिए नए प्रयोग किए जा रहे हैं।
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जीवन को छह आयु वर्ग में बांटकर लोगों की देखभाल की जिम्मेदारी कई विशिष्ट विभागों को सौंपने का निर्णय लिया है। जिसमें छह वर्ष तक के बच्चों को महिला एवं बाल विकास विभाग को सौंपा गया है। भले ही बच्चा वर्तमान में आंगनबाड़ी केंद्र में जा रहा हो या नहीं। छह से अधिक और 18 वर्ष तक के आयु वर्ग की जिम्मेदारी स्कूल शिक्षा विभाग को दी गई है, ताकि कोई भी बच्चा स्कूल से बाहर न रहे।
18 से 25 वर्ष तक के आयु समूह को उच्च शिक्षा विभाग को सौंपा गया, ताकि हर युवा शिक्षित हो कौशल प्राप्त कर सके। 25 से 40 वर्ष तक के आयु वर्ग को युवा अधिकारिता एवं उद्यमिता विभाग को सौंपा गया है, जिससे युवाओं के लिए कौशल, उद्यमिता एवं रोजगार सुनिश्चित हो सके। 40 से 60 वर्ष तक लोगों की देखभाल राजस्व एवं आपदा प्रबंधन विभाग को और 60 से 80 वर्ष से अधिक आयु वर्ग के लोगों की देखभाल सेवा विभाग को सौंपी गई है। 80 वर्ष से अधिक आयु के वृद्धजनों की देखभाल के लिए नया प्रयोग किया गया है। पीपीपी आंकड़ों के अनुसार 80 वर्ष या उससे अधिक आयु के करीब 3600 लोग अकेले रह रहे हैं। उनकी देखभाल के लिए वरिष्ठ नागरिक सेवा आश्रम योजना के तहत एक आश्रम बनाने की व्यवस्था की है। इस आश्रम में वरिष्ठ नागरिकों के लिए सभी सुविधाएं एक ही छत के नीचे उपलब्ध होंगी।
मुख्यमंत्री ने कहा कि उन्होंने बतौर वित्त मंत्री जो बजट पेश किया है, इसमें हर विभाग, हर क्षेत्र और हर वर्ग का ख्याल रखा है। नई योजनाओं की घोषणाएं की हैं, जिन पर एक अप्रैल से कार्य शुरू हो जाएगा। सुबह से बड़ी संख्या में लोग शिकायतें लेकर पहुंचे। संख्या अधिक होने के कारण अफसरों की ड्यूटी लगाकर चार जोन में बांटकर शिकायतें सुनी गई। शाम तक करीब 400 शिकायतें सुनी गई।
इससे पहले मुख्यमंत्री ने नरसी विलेज जाकर नगर के वार्ड-दो के कार्यकर्ताओं के साथ बैठक की। जिसमें भी बजट की अच्छाइयों को लोगों तक पहुंचाने की बात कही और निफा के सम्मान समारोह में शामिल होकर रक्तदान कराने वाली देश की विभिन्न संस्थाओं के प्रतिनिधियों को सम्मानित किया। मौके पर विधायक हरविंद्र कल्याण, मंडलायुक्त डॉ. साकेत कुमार, मुख्यमंत्री के उप प्रधान सचिव के मकरंद पाण्डुरंग, शहरी स्थानीय निकाय विभाग के निदेशक डीके बेहरा, मेयर रेनू बाला गुप्ता आदि शामिल रहे।