फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Haryana ›   Karnal News ›   Government hospital of kurukshetra became a referral center

ब्लैक फंगस के लिए रेफरल सेंटर बने कुरुक्षेत्र के सरकारी अस्पताल

Amar Ujala Bureau अमर उजाला ब्यूरो
Updated Sun, 06 Jun 2021 12:27 PM IST
विज्ञापन
Government hospital of kurukshetra became a referral center
कोरोना महामारी के बाद ब्लैक फंगस का खतरा लोगों के लिए परेशानी का सबब बना हुआ है। बढ़ते ब्लैक फंगस के बीच सरकार और स्वास्थ्य विभाग द्वारा भले ही मरीजों को तत्काल बेहतर उपचार देने का दावा किया जा रहा है, लेकिन जमीनी हकीकत इससे कोसों दूर है। गनीमत है कि कुरुक्षेत्र जिले में मात्र एक ही संदिग्ध केस (ब्लैक फंगस) सामने आया है, लेकिन उन्हें भी बेहतर उपचार नसीब नहीं हुआ।
विज्ञापन

कुरुक्षेत्र में न सरकारी अस्पताल में दवा है और न ही उपचार। यही नहीं, शहर के किसी भी मेडिकल स्टोर पर इंजेक्शन उपलब्ध नहीं हैं। आलम यह है कि जो भी ब्लैक फंगस का संदिग्ध मरीज सामने आ रहा है, उसे करनाल कल्पना चावला मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल में रेफर किया जा रहा है। यह भी जरूरी नहीं कि ब्लैक फंगस से पीड़ित मरीज को यहीं एक ही छत के नीचे सभी स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध होंगी, क्योंकि स्वास्थ्य सुविधाओं के अभाव में पहले मरीज को जिला अस्पताल से करनाल मेडिकल कॉलेज रेफर किया जा रहा है और फिर यहां से भी सभी सुविधाएं मुहैया न होने के कारण रोहतक पीजीआई रेफर जा रहा है।
विज्ञापन

पति को बाईं आंख से नहीं दिखाई दे रहा कुछ, डॉक्टर फाइल पर नहीं पर्ची पर लिख रहे इंजेक्शन
23 मई को जिला अस्पताल से संदिग्ध ब्लैक फंगस के जिस केस को करनाल कल्पना चावला मेडिकल कॉलेज रेफर किया था, अब उनका उपचार रोहतक पीजीआई चल रहा है। मरीज की पत्नी श्वेता शर्मा ने अपनी आपबीती सुनाते हुए स्वास्थ्य विभाग के दावों की पोल खोली है। उनका आरोप है कि उनके पति को बाईं आंख से दिखाई नहीं दे रहा। यहां अभी तक न ऑपरेशन हुआ है और न ही समय पर इंजेक्शन उपलब्ध हो रहे हें। डॉक्टर फाइल पर लिखने की बजाय पर्ची पर इंजेक्शन लिख रहे हैं और कह रहे हैं कि आप अपने स्तर पर ही इंजेक्शन उपलब्ध कराओ।
विज्ञापन
विज्ञापन

महिला ने बताया कि 14 मई को उनके पति ने कोरोना वायरस की जांच कराई थी। 15 मई को रिपोर्ट पॉजिटिव आई। इसके बाद तत्काल शहर के एक निजी अस्पताल में उनके पति को दाखिल कराया गया था। यहां 19 मई को उनके पति की बाईं आंख में दिक्कत होने के साथ-साथ शुगर लेवल 480 और लीवर और किडनी में इंफेक्शन हो गया था। यहां तत्काल संबंधित डॉक्टर को सूचित भी किया था, लेकिन डॉक्टर से सब नॉर्मल होने की बात कहकर अनदेखा कर दिया। आरोप लगाया कि 21 मई को रिपोर्ट पॉजिटिव होते हुए भी उनके पति को डिस्चार्ज कर दिया। दो दिन वे घर पर रहे, लेकिन घर रहते हुए उनके पति को ज्यादा दिक्कत हुई तो वे जिला अस्पताल के पोस्ट कोविड केयर सेंटर गए। यहां नेत्र रोग विशेषज्ञ ने जांच कराने के बाद संदिग्ध ब्लैक फंगस की पुष्टि की और करनाल कल्पना चावला मेडिकल कॉलेज रेफर कर दिया। श्वेता ने बताया कि यहां 29 मई तक दाखिल रखा और समय पर इंजेक्शन भी लगाए, लेकिन यहां एंडोस्कॉपी की सुविधा उपलब्ध न होने के कारण 30 मई को रोहतक पीजीआई रेफर कर दिया। 30 मई को यहां कोरोना का सैंपल लिया गया, जो पॉजिटिव आया था, लेकिन 31 मई को फिर कोरोना सैंपल लिया गया, जो निगेटिव आया था। इसके बाद फंगस वाले विभाग में शिफ्ट कर दिया, लेकिन यहां उनकी एंडोस्कॉपी नहीं हो रही है और न ही उनका ऑपरेशन हो रहा। जब तक ऑपरेशन नहीं होगा, तब तक उपचार नहीं होगा।
यहां डॉक्टर इंजेक्शन को फाइल पर नहीं पर्ची पर लिख रहे हैं और खुद ही इंजेक्शन का प्रबंध करने की बात कह रहे हैं, लेकिन यहां कहीं भी इंजेक्शन उपलब्ध नहीं हो रहा। उन्होंने चंडीगढ़ पता किया है, वहां से आठ हजार रुपये में इंजेक्शन मंगवाया है। उन्होंने भावुक होते हुए कहा कि डॉक्टर कम से कम उम्र के लिहाज से मरीजों का उपचार करें। अगर 60-70 साल से ज्यादा उम्र वाले मरीजों पर ज्यादा ध्यान दिया गया और 30-40 साल वाले मरीज के उपचार में देरी होती रही तो ऐसी घड़ी में वे कहां जाएंगे? हम क्या करेंगे? कहां सर्वाइव करेंगे?

ब्लैक फंगस पर विभाग की नजर, करनाल में किया जा रहा मरीजों का उपचार : डॉ. वर्मा
जिला सिविल सर्जन डॉ. संतलाल वर्मा का कहना है कि कुरुक्षेत्र के निजी और सरकारी अस्पताल में चार संदिग्ध ब्लैक फंगस के मामले सामने आ चुके हैं। इनमें एक कुरुक्षेत्र, एक यमुनानगर और दो कैथल जिले से हैं, जिन्हें करनाल कल्पना चावला मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल रेफर किया गया है, जबकि कुरुक्षेत्र वासी एक मरीज का उपचार मोहाली के एक निजी अस्पताल में चल रहा है। अभी तक विभाग द्वारा किसी मरीज को ब्लैक फंगस की पुष्टि नहीं की है। नेत्र रोग विशेषज्ञ डॉ. अनीता गोयल को नोडल अधिकारी नियुक्त किया है और ब्लैक फंगस पर नजर रखी जा रही है। कहा कि सरकार के आदेशानुसार ब्लैक फंगस के मरीजों को करनाल रेफर किया जा रहा है, ताकि मरीजों को बेहतर उपचार मिल सके। सरकार और स्वास्थ्य विभाग द्वारा करनाल मेडिकल कॉलेज में ही मरीजों के लिए दवा और इंजेक्शन उपलब्ध कराए जा रहे हैं।
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed