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Karnal News: गीता मानव को कर्मयोगी बनाने का दुनिया का एकमात्र ग्रंथ

Amar Ujala Bureau अमर उजाला ब्यूरो
Updated Fri, 02 Dec 2022 08:30 AM IST
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Geeta is the only book in the world to make man a Karmayogi.
कुरुक्षेत्र। पवित्र ग्रंथ गीता मानव को कर्मयोगी बनाने का एकमात्र ग्रंथ है। इस ग्रंथ से मानव को ज्ञान मिलता है और जीवन को सफल बनाने के लिये जीवन का सार भी मिलता है। इस ग्रंथ में हर वर्ग के लिए आगे बढ़ने का मार्ग भी दिखाया गया है। इसलिए जो मनुष्य इस ग्रंथ को अपने जीवन में धारण करेगा, वह निश्चित ही अपने मुकाम को हासिल करेगा।
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केंद्रीय वन एवं पर्यावरण मंत्री भूपेंद्र यादव, वीरवार को कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय (केयू) के सीनेट हॉल में केयू और केडीबी के तत्वावधान में श्रीमद्भागवद गीता के परिप्रेक्ष्य में विश्व शांति एवं सद्भाव विषय पर आयोजित तीन दिवसीय अंतरराष्ट्रीय गीता सेमिनार में बोल रहे थे। इससे पहले केंद्रीय मंत्री भूपेंद्र यादव, स्वामी ज्ञानानंद, यूके की चंडीगढ़ में डिप्टी हाई कमिश्नर कारोलिन रोबेटे, यूएसए यूनिवर्सिटी ऑफ बफेलो के वाइस प्रेसिडेंट प्रो. गोविंद राजू, सांसद नायब सिंह सैनी, विधायक सुभाष सुधा, कुलपति डॉ. सोमनाथ सचदेवा, कुलसचिव डॉ. संजीव शर्मा, केडीबी के मानद सचिव मदन मोहन छाबड़ा, हरियाणा योग आयोग के चेयरमैन डॉ. जयदीप आर्य, प्रो. मंजुला चौधरी ने दीप प्रज्ज्वलित करके विधिवत रूप से कार्यक्रम का शुभारंभ किया।
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केंद्रीय मंत्री भूपेंद्र यादव ने तीन दिवसीय अंतरराष्ट्रीय सेमिनार को लेकर तैयार की गई स्मारिका का विमोचन भी किया। इस तीन दिवसीय सेमिनार में 569 शोधार्थियों ने पंजीकरण कराया और 515 लघु शोध पत्र प्रस्तुत किए गए।
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यादव ने कहा कि कुरुक्षेत्र की पहचान अंतरराष्ट्रीय पटल पर बन चुकी है। यह पहचान 5159 वर्ष पूर्व से है। इस पावन धरा पर भगवान श्रीकृष्ण ने अर्जुन का मोह भंग और कर्म करने का संदेश देने के लिए उपदेश दिए थे। यह उपदेश आज भी पूरी मानवता के लिये पूर्णत: प्रासंगिक हैं। इसलिए इन उपदेशों की कशिश मानव को धर्मक्षेत्र की तरफ खींच कर ले आती है। स्वामी ज्ञानानंद ने कहा कि गीता का यह दिव्य ग्रंथ दुनिया का एकमात्र ऐसा ग्रंथ है, जिस ग्रंथ में संशोधन अथवा परिवर्तन करने की कभी आवश्यकता नहीं पड़ी। इस ग्रंथ में हर चुनौती से निपटने का बल मिलता है। इस ग्रंथ में व्यवस्था को सुचारू रूप से चलाने और हर क्षेत्र की समस्या का समाधान करने के उपाय भी मिलते हैं।

कुलपति डॉ. सोमनाथ सचदेवा ने कहा कि पूरे विश्व में पवित्र ग्रंथ गीता का खूब प्रचार-प्रसार हो रहा है। इन उपदेशों पर मंथन और चर्चा करने के लिए पिछले कई वर्षों से केयू में अंतरराष्ट्रीय सेमिनार का आयोजन किया जा रहा है। इस पौराणिक धरती पर वेदों की रचना हुई और पूरे विश्व को ज्ञान की प्राप्ति हुई। इस ग्रंथ में जीवन में सफलता हासिल करने का मूल मंत्र छिपा है। इस मौके पर प्रो. तेजिंद्र शर्मा, प्रो. वनिता ढींगड़ा सहित अन्य मौजूद रहे।
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