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Karnal News: फर्जी नंबर और बिना पंजीकृत टिपर से कूड़ा उठान
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- एजेंसी ने टीसी सीरिज का लिखा दो टिपरों पर पंजीकृत नंबर जबकि आरटीए ने यह अभी शुरू भी नहीं की
- नपा सचिव बोले, पुराने टिपर हमसे ही एजेंसी ने खरीदे
प्रवीण कुमार
इंद्री। नगरपालिका के टिपरों पर फर्जी नंबर प्लेट लगा कचरे का उठान करने का मामला सामने आया है। हैरत की बात यह है कि एजेंसी ने टिपरों पर जो नंबर लगाए हैं वह सीरीज अभी तक शुरू भी नहीं हुई है। वर्षों पहले खरीदे इन टिपरों की आज तक आरसी नहीं बनवाई गई न ही इन पर हाई सिक्योरिटी नंबर प्लेट है।
साधारण नंबर प्लेट पर ही चेसी नंबर लिखकर टिपरों को कचरा ढोने के लिए उतार दिया गया। टिपरों पर लगे एचआर45टीसी3602 और एचआर45टीसी 3495 नंबर का आरटीए विभाग में रिकॉर्ड मौजूद नहीं है। परिवहन विभाग के अनुसार, फिलहाल टीसी नहीं बल्कि डी सीरीज चल रही है। इन टिपरों की आरसी नहीं बनी इसलिए इंश्योरेंस और प्रदूषण तक नहीं है। इस बारे में नपा अधिकारियों ने बताया कि एजेंसी ने पुराने टिपर उन्हीं से खरीद थे, तब टिपर की कीमत से ज्यादा महंगा इनका पंजीकरण पड़ रहा था, इसीलिए एजेंसी भी ऐसे ही चला रही होगी।
नपा सचिव ने कहा कि नपा ने नहीं बल्कि एजेंसी ने ही इन पर चेसी नंबर लिखा है। इंद्री की सफाई का जिम्मा संभाल रही एजेंसी सुगम स्वच्छता के प्रतिनिधि प्रदीप सिंगला ने दावा किया कि हमारे पास इन टिपरों की आरसी है लेकिन इन टिपरों की आरसी की फोटो उपलब्ध नहीं करवाई गई। - संवाद
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रोजाना निकलता है 13 टन कचरा
इंद्री नगरपालिका क्षेत्र से रोजाना 12 से 13 टन कचरा निकलता है। चार टिपरों व ट्रैक्टर ट्रॉली के माध्यम से वार्डों से यह कचरा समेट कर बाईपास पर स्थित डंपिंग यार्ड में लाया जाता है। यहां से डंपर के माध्यम से एजेंसी इस कचरे को करनाल स्थित कचरा निस्तारण प्लांट में लेकर जाती है। नगर पालिका इंद्री कचरे के निपटारे की एवज में एजेंसी को 2350 रुपये प्रति टन के हिसाब से भुगतान कर चुकी है। इस हिसाब से हर महीने करीब नौ लाख रुपये एजेंसी को चुकाया जा रहा है। साल में यह राशि एक करोड़ से अधिक बनती है।
फर्जी नंबर मिलते ही वाहन होगा इंपाउंड
पुलिस अधिकारी के अनुसार, वाहन पर फर्जी नंबर लगाकर सड़क पर उतारना अपराध है। पुलिस ऐेसे वाहन को तुरंत इंपाउंड करती है। इसके बाद विभिन्न धाराओं के तहत केस दर्ज कर कानूनी कार्रवाई की जाती है। अपराधी प्रवृत्ति के लोग अक्सर फर्जी नंबर प्लेट लगाकर अपराध के लिए ऐसे वाहनों का प्रयोग करते हैं, ताकि वह आसानी से पकड़ में न आ सकें। आरटीए विभाग के अधिकारी के अनुसार यदि उन्हें फर्जी नंबर का वाहन मिलता है तो चार हजार का चालान कर उसे पुलिस को सौंप दिया जाता है।
एजेंसी ने आज तक नहीं किया भुगतान
टेंडर के समय सुगम स्वच्छता के पास अपने टिपर नहीं थे। इसलिए वेल्यूएशन लगाकर नगर पालिका से यह टिपर एजेंसी ने लिए थे। इनकी पेमेंट आज तक विभाग में जमा नहीं करवाई गई है। इन टिपरों की आरसी बनवाने के लिए फाइल आगे बढ़ाई थी। कई साल पहले खरीदे टिपरों की आरसी बनवाने का खर्चा इनकी कीमत से भी अधिक बन गया। इसलिए आज तक इन पर नंबर नहीं लग पाए। एजेंसी ने जो नंबर लगाए हैं वह चेसी के बताए जा रहे हैं।
- धर्मबीर सिंह, सचिव, नगरपालिका
नपा अधिकारी ही बेहतर बता सकते हैं : एजेंसी
हमारे पास इन टिपरों की आरसी है। वैसे ये गाड़ियां नगरपालिका इंद्री की हैं। सचिव यदि इनके नंबर को फर्जी कह रहे हैं तो इसके बारे में बेहतर वही बता सकते हैं। टिपर की पेमेंट हमने करनाल में जमा करवा रखी है।
- प्रदीप सिंगला, सुगम स्वच्छता, एजेंसी
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- नपा सचिव बोले, पुराने टिपर हमसे ही एजेंसी ने खरीदे
प्रवीण कुमार
इंद्री। नगरपालिका के टिपरों पर फर्जी नंबर प्लेट लगा कचरे का उठान करने का मामला सामने आया है। हैरत की बात यह है कि एजेंसी ने टिपरों पर जो नंबर लगाए हैं वह सीरीज अभी तक शुरू भी नहीं हुई है। वर्षों पहले खरीदे इन टिपरों की आज तक आरसी नहीं बनवाई गई न ही इन पर हाई सिक्योरिटी नंबर प्लेट है।
साधारण नंबर प्लेट पर ही चेसी नंबर लिखकर टिपरों को कचरा ढोने के लिए उतार दिया गया। टिपरों पर लगे एचआर45टीसी3602 और एचआर45टीसी 3495 नंबर का आरटीए विभाग में रिकॉर्ड मौजूद नहीं है। परिवहन विभाग के अनुसार, फिलहाल टीसी नहीं बल्कि डी सीरीज चल रही है। इन टिपरों की आरसी नहीं बनी इसलिए इंश्योरेंस और प्रदूषण तक नहीं है। इस बारे में नपा अधिकारियों ने बताया कि एजेंसी ने पुराने टिपर उन्हीं से खरीद थे, तब टिपर की कीमत से ज्यादा महंगा इनका पंजीकरण पड़ रहा था, इसीलिए एजेंसी भी ऐसे ही चला रही होगी।
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नपा सचिव ने कहा कि नपा ने नहीं बल्कि एजेंसी ने ही इन पर चेसी नंबर लिखा है। इंद्री की सफाई का जिम्मा संभाल रही एजेंसी सुगम स्वच्छता के प्रतिनिधि प्रदीप सिंगला ने दावा किया कि हमारे पास इन टिपरों की आरसी है लेकिन इन टिपरों की आरसी की फोटो उपलब्ध नहीं करवाई गई। - संवाद
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रोजाना निकलता है 13 टन कचरा
इंद्री नगरपालिका क्षेत्र से रोजाना 12 से 13 टन कचरा निकलता है। चार टिपरों व ट्रैक्टर ट्रॉली के माध्यम से वार्डों से यह कचरा समेट कर बाईपास पर स्थित डंपिंग यार्ड में लाया जाता है। यहां से डंपर के माध्यम से एजेंसी इस कचरे को करनाल स्थित कचरा निस्तारण प्लांट में लेकर जाती है। नगर पालिका इंद्री कचरे के निपटारे की एवज में एजेंसी को 2350 रुपये प्रति टन के हिसाब से भुगतान कर चुकी है। इस हिसाब से हर महीने करीब नौ लाख रुपये एजेंसी को चुकाया जा रहा है। साल में यह राशि एक करोड़ से अधिक बनती है।
फर्जी नंबर मिलते ही वाहन होगा इंपाउंड
पुलिस अधिकारी के अनुसार, वाहन पर फर्जी नंबर लगाकर सड़क पर उतारना अपराध है। पुलिस ऐेसे वाहन को तुरंत इंपाउंड करती है। इसके बाद विभिन्न धाराओं के तहत केस दर्ज कर कानूनी कार्रवाई की जाती है। अपराधी प्रवृत्ति के लोग अक्सर फर्जी नंबर प्लेट लगाकर अपराध के लिए ऐसे वाहनों का प्रयोग करते हैं, ताकि वह आसानी से पकड़ में न आ सकें। आरटीए विभाग के अधिकारी के अनुसार यदि उन्हें फर्जी नंबर का वाहन मिलता है तो चार हजार का चालान कर उसे पुलिस को सौंप दिया जाता है।
एजेंसी ने आज तक नहीं किया भुगतान
टेंडर के समय सुगम स्वच्छता के पास अपने टिपर नहीं थे। इसलिए वेल्यूएशन लगाकर नगर पालिका से यह टिपर एजेंसी ने लिए थे। इनकी पेमेंट आज तक विभाग में जमा नहीं करवाई गई है। इन टिपरों की आरसी बनवाने के लिए फाइल आगे बढ़ाई थी। कई साल पहले खरीदे टिपरों की आरसी बनवाने का खर्चा इनकी कीमत से भी अधिक बन गया। इसलिए आज तक इन पर नंबर नहीं लग पाए। एजेंसी ने जो नंबर लगाए हैं वह चेसी के बताए जा रहे हैं।
- धर्मबीर सिंह, सचिव, नगरपालिका
नपा अधिकारी ही बेहतर बता सकते हैं : एजेंसी
हमारे पास इन टिपरों की आरसी है। वैसे ये गाड़ियां नगरपालिका इंद्री की हैं। सचिव यदि इनके नंबर को फर्जी कह रहे हैं तो इसके बारे में बेहतर वही बता सकते हैं। टिपर की पेमेंट हमने करनाल में जमा करवा रखी है।
- प्रदीप सिंगला, सुगम स्वच्छता, एजेंसी