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Karnal News: सभी जिलों में बनेंगी फॉरेंसिक लैब, एक्सपर्ट होंगे तैनात

Amar Ujala Bureau अमर उजाला ब्यूरो
Updated Mon, 19 May 2025 06:02 AM IST
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Forensic labs will be built in all districts, experts will be deployed
- 155 साइबर फॉरेंसिक एक्सपर्ट भर्ती होने के बाद दो हफ्ते में मिलेगी एफएसएल, विसरा व अन्य जांच रिपोर्ट
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- अभी मधुबन में प्रदेश स्तरीय, गुरुग्राम, रोहतक, पंचकूला और हिसार में है क्षेत्रीय लैब

गगन तलवार
करनाल। प्रदेश के सभी जिलों में जिला स्तर पर फॉरेंसिक लैब स्थापित की जाएंगी। इसके अलावा साइबर फॉरेंसिक एक्सपर्ट भी तैनात किए जाएंगे। इसे लेकर हरियाणा पुलिस की ओर से प्रक्रिया शुरू हो चुकी है। इस वर्ष के अंत तक इसे पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है। मधुबन में प्रदेश स्तरीय फॉरेंसिक लैब वाले करनाल जिले में सिविल लाइन थाने में जिला स्तरीय लैब स्थापित की जा चुकी है, इसी तर्ज पर अन्य जिलों में भी लैब स्थापित होंगी।
डीजीपी शत्रुजीत कपूर के अनुसार, प्रदेश में 155 साइबर फॉरेंसिक डिवीजन के पद नए स्वीकृत किए गए हैं, इन पर भर्ती की प्रक्रिया शुरू हो चुकी है। इस भर्ती के पूरा होने के बाद अभी विसरा, एफएसएल व साक्ष्यों से जुड़ी जो अन्य रिपोर्ट हैं, जिन्हें आने में लंबा समय लगता है, इसकी रिपोर्ट देने की अवधि दो सप्ताह में पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है। जब जिला स्तर पर लैब होगी तो तुरंत जांच और रिपोर्ट भी मिलेगी।
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फिलहाल हरियाणा में एक मुख्य लैब मधुबन में और चार रीजनल लैब गुरुग्राम, रोहतक, पंचकूला और हिसार में हैं। जिला स्तरीय लैब बनने से क्षेत्रीय या मुख्य एफएसएल पर निर्भरता कम होगी और लैब की संख्या भी पांच से बढ़कर 27 हो जाएगी।
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अब डिब्बे में नहीं दिखाई देंगे साक्ष्य
पुलिस की ओर से अभी आपराधिक मामलों में साक्ष्यों को जुटाने के बाद उन्हें डिब्बे या कंटेनर में रखा जाता है। इसके बाद वैक्स का इस्तेमाल करके सील करते हैं। अब ऐसा नहीं होगा। डीजीपी ने बताया कि करीब एक साल की मेहनत के बाद नया पैकेजिंग मैटीरियल तैयार किया है। अब मोबाइल टीमें जहां भी साक्ष्य लेंगी, वे इसी पैकेजिंग में रखेंगी। इसमें वैक्स से सील करने की जरूरत नहीं पड़ेगी। मॉडर्न तरीके से पैकेजिंग होगी। बीच में कोई खोलने का प्रयास करेगा तो भी पता चलेगा। यह मैटीरियल अभी केवल प्रदेश या मंडल लैब पर ही उपलब्ध रहेगा।


आजकल अपराधों में डिजिटल डिवाइस की भूमिका बढ़ रही है। ऐसे में उन्हें सही तरीके से साक्ष्य कलेक्ट करना, उसका विश्लेषण करना और डाटा को रिट्रीट करना जरूरी है। इस जरूरत को देखते हुए साइबर फॉरेंसिक डिवीजन के पद स्वीकृत किए हैं। इसी साल में प्रदेश के सभी जिलों में जिला स्तरीय फॉरेंसिक लैब स्थापित की जाएंगी। करनाल में पहली लैब स्थापित हो चुकी है।
- शत्रुजीत कपूर, डीजीपी
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