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खाने की व्यवस्था तो ठीक पर शौचालय की समस्या
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धरने के दौरान लंगर तैयार करते सेवादार। संवाद
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करनाल। किसानों के धरना स्थल पर पुलिस के बैरिकेड अब किसानों की रसोई की चहारदीवारी गए हैं तो यहां खड़े पेड़ और शॉपिंग कांप्लेक्स के बरामदे आरामगाह। गुरुद्वारों से लंगर पहुंच रहा है। पेयजल और दवाओं की भी उपलब्धता है लेकिन कमी है तो सिर्फ शौचालय और टॉयलेट की। इसके लिए किसानों को लंबी दूर जाना पड़ता है या फिर पार्कों की झाड़ियों का सहारा लेना पड़ता है।
लघु सचिवालय के मुख्य गेट पर कड़ा पहरा है। किसान बाहर सड़क पर बैठे हैं। यह क्षेत्र शहर के अंदर है। हालांकि जीटी रोड यहां से कुछ ही दूरी पर है लेकिन बुधवार को कई गुरुद्वारों से यहां लंगर पहुंचा तो पुलिस के बैरिकेड को पेड़ के नीचे चारो ओर लगाकर किसानों ने रसोई भी शुरू कर दी। ब्रेड के पैकेट भी बड़ी संख्या में पहुंच गए तो यहां नाश्ते के लिए ब्रेड पकौड़े का भी अच्छा खासा इंतजाम हो गया। पेयजल के लिए कई टैंकर भी पहुंच गए। इसके अलावा बोतल पैक पानी की भी कमी नहीं दिखी। लंगर व पेयजल की सुविधा लगातार जारी रही। इसके कारण किसी किसान को खानपान की कोई असुविधा नहीं हुई।
बात रही आराम करने की तो कोई पेड़ों के नीचे दरी बिछाकर लेटा दिखा तो कोई ट्रालियों व अन्य वाहनों के नीचे। जिला प्रशासन के एक दवाई शिविर के अलावा समाजसेवी संस्थाओं की एंबुलेंस भी यहां दिनभर दवाए वितरित करती रही। सबसे बड़ी परेशानी टॉयलेट व शौच जाने की रही। इसके लिए किसानों को लंबी दूरी तय करके या तो जाट धर्मशाला जाना पड़ता था या फिर लघु सचिवालय के पीछे ग्रीन बेल्ट में जाना पड़ा। कई बुजुर्ग किसानों को इसमें काफी परेशानी भी हुई। युवा किसान तो वाहनों से दूर चले जाते थे। शहर में अपने परिचितों के घरों का भी सहारा लेना पड़ता था। जिला प्रशासन की ओर से भी इस समस्या पर कोई ध्यान नहीं दिया गया।
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लघु सचिवालय के मुख्य गेट पर कड़ा पहरा है। किसान बाहर सड़क पर बैठे हैं। यह क्षेत्र शहर के अंदर है। हालांकि जीटी रोड यहां से कुछ ही दूरी पर है लेकिन बुधवार को कई गुरुद्वारों से यहां लंगर पहुंचा तो पुलिस के बैरिकेड को पेड़ के नीचे चारो ओर लगाकर किसानों ने रसोई भी शुरू कर दी। ब्रेड के पैकेट भी बड़ी संख्या में पहुंच गए तो यहां नाश्ते के लिए ब्रेड पकौड़े का भी अच्छा खासा इंतजाम हो गया। पेयजल के लिए कई टैंकर भी पहुंच गए। इसके अलावा बोतल पैक पानी की भी कमी नहीं दिखी। लंगर व पेयजल की सुविधा लगातार जारी रही। इसके कारण किसी किसान को खानपान की कोई असुविधा नहीं हुई।
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बात रही आराम करने की तो कोई पेड़ों के नीचे दरी बिछाकर लेटा दिखा तो कोई ट्रालियों व अन्य वाहनों के नीचे। जिला प्रशासन के एक दवाई शिविर के अलावा समाजसेवी संस्थाओं की एंबुलेंस भी यहां दिनभर दवाए वितरित करती रही। सबसे बड़ी परेशानी टॉयलेट व शौच जाने की रही। इसके लिए किसानों को लंबी दूरी तय करके या तो जाट धर्मशाला जाना पड़ता था या फिर लघु सचिवालय के पीछे ग्रीन बेल्ट में जाना पड़ा। कई बुजुर्ग किसानों को इसमें काफी परेशानी भी हुई। युवा किसान तो वाहनों से दूर चले जाते थे। शहर में अपने परिचितों के घरों का भी सहारा लेना पड़ता था। जिला प्रशासन की ओर से भी इस समस्या पर कोई ध्यान नहीं दिया गया।
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