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10. लाखों लोगों की आजीविका का साधन है मत्स्य पालन

Amar Ujala Bureau अमर उजाला ब्यूरो
Updated Sun, 11 Jul 2021 02:39 AM IST
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Fishing is the means of livelihood of millions of people
करनाल। राष्ट्रीय डेयरी अनुसंधान संस्थान के कृषि विज्ञान केंद्र में शनिवार को राष्ट्रीय मत्स्य किसान दिवस पर सतत मत्स्य विकास हेतु पारिस्थितिकी प्रबंधन विषय पर किसान गोष्ठी का आयोजन किया गया। केंद्र के अध्यक्ष डा. पंकज कुमार सारस्वत ने बताया कि भारत में लगभग 1.5 करोड़ लोग मत्स्य पालन से आजीविका प्राप्त कर रहे हैं। इनमें लगभग 80 प्रतिशत लोग समुद्री मत्स्यकी पर आश्रित हैं जबकि बाकी तालाबों में मछली पालन का कार्य करके आजीविका प्राप्त करते हैं।
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मत्स्य पालन विशेषज्ञ डा. राकेश कुमार टोंक ने बताया कि मत्स्य कृषकों को सतत मत्स्य विकास हेतु तालाब का प्रबंधन वैज्ञानिक तकनीकों के आधार पर करना चाहिए। इसके लिए मत्स्य पालक को हर महीने के हिसाब से ताजा गोबर, चूना और पोटेशियम परमैग्नेट का लगातार उपयोग करना चाहिए। जिससे मछलियों को प्राकृतिक आहार की आपूर्ति होती है। चूना के प्रयोग से तालाब के पानी का पीएच मान 8.0 से 8.4 रहता है जो मछली पालन के लिए बहुत आवश्यक है। चूना जीवाणु नाशक का कार्य भी करता है। बीमारियों के उपचार से कहीं अधिक उपयोगी है बीमारियों से बचाव पर अधिक ध्यान दिया जाए।
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उन्होंने कहा कि वैज्ञानिक विधियों के द्वारा मछली के बीज में होने वाली मृत्यु दर को कम किया जा सकता है। इसके लिए उन्होंने केज फिश फार्मिंग को काफी कारगर बताया। जिसका प्रदर्शन कृषि विज्ञान केंद्र के मत्स्य पालन एवं प्रशिक्षण इकाई पर किया हुआ है। केंद्र के मौसम विशेषज्ञ डा. योगेश कुमार ने कहा कि मछली पालन के कार्य से गांव के पंचायती तालाबों की साफ-सफाई और नई जल संरचनाओं का निर्माण होता है। जो वर्षा के मौसम में पानी से भर जाती हैं और जल संरक्षण का कार्य करती हैं। गोष्ठी में 30 मत्स्य पालकों ने भाग लिया।
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