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Karnal News: खुद निर्यातक बनकर बड़ा मुनाफा कमाएंगे किसान

Amar Ujala Bureau अमर उजाला ब्यूरो
Updated Fri, 02 Dec 2022 09:00 AM IST
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Farmers will earn huge profits by becoming exporters themselves
माई सिटी रिपोर्टर
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करनाल। किसानों को सीधे निर्यातक बनाने की तैयारी शुरू हो गई है। नाबार्ड की ओर से वीरवार को कर्ण लेक सभागार में आयोजित एफपीओ (किसान उत्पादक संगठन) के चेयरमैन और निदेशकों की सहभागिता में कार्यशाला आयोजित की गई। जिसमें उद्योग एवं वाणिज्य मंत्रालय से संबद्ध बासमती निर्यात विकास प्रतिष्ठान (एपीडा) के प्रधान वैज्ञानिक डॉ. रितेश शर्मा ने उन्हें निर्यातक बनने की प्रारंभिक प्रक्रिया को समझाते हुए कहा कि पहले एफपीओ का पंजीकरण कराएं। विदेशी खरीदार (वायर्स) कैसे मिलेंगे, इसके लिए हमें अपने उत्पादों को संबंधित की मांग के अनुसार ढालने होंगे। हमें डेटा माइनिंग की ओर भी बढ़ना होगा। शीघ्र वायर-सेलर मीट का आयोजन भी देशभर में किया जाएगा। अब तक 13 देशों के दूतावासों में एग्री सेल स्थापित किया जा चुका है।
प्रधान वैज्ञानिक डॉ. रितेश शर्मा ने कहा कि अब किसानों को एक्सपर्ट बनाना होगा, यहीं से भारत को दुनिया की टाप-3 अर्थव्यवस्था में शामिल करने का रास्ता निकलेगा। प्रधानमंत्री मोदी ने 10 हजार एफपीओ बनाने का लक्ष्य दिया है। इस सेमिनार में करनाल, कैथल, पानीपत और जींद जिले के 55 एफपीओ शामिल हो रहे हैं, बड़ी तेजी के साथ एफपीओ बन रहे हैं, जिनका निर्माण व प्रमोशन आदि में इंडियन सोसायटी ऑफ एग्री बिजनेस प्रोफेसनल (आईएसएपी), आईएसएफडीसी, एआरएफ व ग्रामीण युवती विकास मंडल आदि संस्थाएं सहयोग करती हैं। नए उद्यमियों के साथ पुराने उद्यमी भी अपने कारोबार को उच्चीकृत कर सकते हैं। पंजीकरण के बाद सबसे पहले हमें इंटरनेशनल ट्रेड फेयर का ध्यान होगा, उनमें सहभागिता करनी होगी, जिसका पूरा खर्च एपीडा वहन करेगा। इतना ही नहीं, ट्रेड फेयर में जगह भी उपलब्ध कराएगा। अपनी वेबसाइट बनाएं, आकर्षक प्रोफाइल तैयार करें, ये आसान और फ्री तरीका है। जो पता लिखें, वह सटीक हो, पिनकोड अवश्य होना चाहिए। अब तक 13 देशों में एग्रीसेल स्थापित किया जा चुका है, जहां से निर्यात प्रोत्साहन के लिए हर संभव मदद मिलेगी। यहां पर किस देश में किस प्रोडक्ट की डिमांड है, क्या क्वालिटी चाहिए, शर्ते क्या है, कौन कौन से बड़े वायर हैं, सभी जानकारी उपलब्ध होगी। अगले कदम की रूपरेखा तय हो गई है, जनवरी, फरवरी में ही दूतावासों के साथ मिलकर वायर सेलर मीट लगाना शुरू किया जाएगा। जिसमें वायर से सीधे डीलिंग हो सकेगी। किसानों की आय कई गुना बढ़ सकेगी।
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डॉ.रितेश ने कहा कि हर व्यक्ति सभी कुछ नहीं कर सकता है, इसलिए कुछ चुनिंदा प्रोडक्ट पर फोकस करना होगा। डाटा माइनिंग बहुत जरूरी है, डाटा बड़ी तेजी के साथ बिक जाता है, ये बड़ा बाजार है। एग्री एक्सचेंज, एपीडा की वेबसाइट की सहायता लें। प्रतिद्वंद्वी पर भी नजर रखें। बासमती चावल देश का बड़ा निर्यात प्रोडक्ट है। पेस्टीसाइड को नियंत्रित करना होगा। नाबार्ड के एजीएम अभिमन्यु मलिक और कुशल दीप ने कहा कि नाबार्ड निर्यातकों की हरह संभव मदद को तैयार है, कई ऐसी योजनाएं हैं जो बड़ा लाभ दे सकती हैं।
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इसमें डॉ.एसपी तोमर, डॉ. डीएस मलिक, डॉ.सरदार सिंह, आरएस मान, महेंद्र सिंह, अब्दुल कादिर आदि कई एफपीओ निदेशक मौजूद रहे।
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