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धान की सीधी बिजाई करें किसान : डॉ. प्रमोद
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जाट भवन में किसान समूह की प्रशिक्षण कार्यशाला में एपीडी के वैज्ञानिक ने दी सलाह
माई सिटी रिपोर्टर
करनाल। कृषि एवं प्रसंस्कृत खाद्य उत्पाद निर्यात विकास प्राधिकरण (एपीडा) के बासमती निर्यात विकास प्रतिष्ठान मोदीपुरम-मेरठ (बीईडीएफ) के वैज्ञानिक डॉ. प्रमोद तोमर बुधवार को करनाल पहुंचे। यहां उन्होंने जाट भवन में किसान समूह की प्रशिक्षण कार्यशाला में कहा कि बासमती धान के क्षेत्र में धान की सीधी बिजाई तकनीक (डीएसआर.) किसानों के लिए फायदेमंद है। इससे ग्लोबल वार्मिंग के दौर में ग्रीनहाउस गैसों का उत्सर्जन 30 से 35 प्रतिशत तक कम होता है।
एचएफपीसी. फार्मर्स प्रोडयूसर आर्गेनाइजेशन ऑफ इंडिया (एफपीओ.) की ओर से आयोजित प्रशिक्षण कार्यशाला में डॉ. प्रमोद तोमर ने कहा कि डीएसआर से बकानी रोग की संभावना कम होती है। एक किलो चावल पैदा करने में 3000 लीटर से अधिक पानी की खपत हो रही है। लेजर लेवलिंग से पानी बचता है। एक हेक्टेयर में यदि एक सेंटीमीटर पानी भरते हैं तो एक लाख लीटर पानी चाहिए, जबकि किसान रोपाई के समय धान के खेत में पांच से छह इंच तक पानी भरते हैं। बासमती धान की दो प्रजातियां डीएसआर के लिए अनुशंसित की गई हैं। किसानों को मित्रकीटों व शत्रु कीटों की पहचान बताते हुए उन्होंने कहा कि पिछले वर्ष देश से सात लाख टन बासमती चावल निर्यात हुआ, जिससे 50 हजार करोड़ से ज्यादा विदेशी मुद्रा अर्जित हुई। पेस्टीसाइड के अंश आने से चावल की विदेशों में मांग पर फर्क पड़ता है।
चौ. चरण सिंह हरियाणा कृषि विश्वविद्यालय के क्षेत्रीय अनुसंधान केंद्र उचानी (करनाल) के क्षेत्रीय निदेशक डॉ. ओपी. चौधरी ने किसानों को स्वयं की घरेलू खपत के लिए सब्जियां व फल उगाने की सलाह दी। रिसर्च एनालिटिक्स एंड मॉडलिंग लीड्स कनेक्ट प्रतिष्ठान के निदेशक डॉ. अलोक मुखर्जी ने एआई. आधारित पोर्टल से फार्म स्तर पर प्रबंधन करने का तरीका समझाया। उन्होंने सेटेलाइट एंड फोटोग्राफी एनालिटिक्स के लिए तैयार किए नए शप्तशती पोर्टल का अनावरण करते हुए उसकी खूबियां बताई।
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एफपीओ. के अध्यक्ष डॉ. डीएस. मलिक ने अतिथियों का स्वागत किया। उपाध्यक्ष डॉ. एसपी. तोमर ने जल प्रबंधन के लिए डीएसआर. को अपनाने, समय पर खरपतवार नियंत्रण की विधियां, पेस्टीसाइड फ्री शुद्ध बासमती चावल उत्पादन संबंधी गुर बताए।
इस मौके पर भारतीय गेहूं एवं जौ अनुसंधान संस्थान के प्रधान वैज्ञानिक डॉ. अनुज कुमार, कृषि विभाग के उपनिदेशक डॉ. वजीर सिंह, कंवलजीत, नाबार्ड के एजीएम. हिमांशु खत्री, निफको नीलोखेड़ी के चेयरमैन डॉ. सरदार सिंह मौजूद रहे।
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माई सिटी रिपोर्टर
करनाल। कृषि एवं प्रसंस्कृत खाद्य उत्पाद निर्यात विकास प्राधिकरण (एपीडा) के बासमती निर्यात विकास प्रतिष्ठान मोदीपुरम-मेरठ (बीईडीएफ) के वैज्ञानिक डॉ. प्रमोद तोमर बुधवार को करनाल पहुंचे। यहां उन्होंने जाट भवन में किसान समूह की प्रशिक्षण कार्यशाला में कहा कि बासमती धान के क्षेत्र में धान की सीधी बिजाई तकनीक (डीएसआर.) किसानों के लिए फायदेमंद है। इससे ग्लोबल वार्मिंग के दौर में ग्रीनहाउस गैसों का उत्सर्जन 30 से 35 प्रतिशत तक कम होता है।
एचएफपीसी. फार्मर्स प्रोडयूसर आर्गेनाइजेशन ऑफ इंडिया (एफपीओ.) की ओर से आयोजित प्रशिक्षण कार्यशाला में डॉ. प्रमोद तोमर ने कहा कि डीएसआर से बकानी रोग की संभावना कम होती है। एक किलो चावल पैदा करने में 3000 लीटर से अधिक पानी की खपत हो रही है। लेजर लेवलिंग से पानी बचता है। एक हेक्टेयर में यदि एक सेंटीमीटर पानी भरते हैं तो एक लाख लीटर पानी चाहिए, जबकि किसान रोपाई के समय धान के खेत में पांच से छह इंच तक पानी भरते हैं। बासमती धान की दो प्रजातियां डीएसआर के लिए अनुशंसित की गई हैं। किसानों को मित्रकीटों व शत्रु कीटों की पहचान बताते हुए उन्होंने कहा कि पिछले वर्ष देश से सात लाख टन बासमती चावल निर्यात हुआ, जिससे 50 हजार करोड़ से ज्यादा विदेशी मुद्रा अर्जित हुई। पेस्टीसाइड के अंश आने से चावल की विदेशों में मांग पर फर्क पड़ता है।
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चौ. चरण सिंह हरियाणा कृषि विश्वविद्यालय के क्षेत्रीय अनुसंधान केंद्र उचानी (करनाल) के क्षेत्रीय निदेशक डॉ. ओपी. चौधरी ने किसानों को स्वयं की घरेलू खपत के लिए सब्जियां व फल उगाने की सलाह दी। रिसर्च एनालिटिक्स एंड मॉडलिंग लीड्स कनेक्ट प्रतिष्ठान के निदेशक डॉ. अलोक मुखर्जी ने एआई. आधारित पोर्टल से फार्म स्तर पर प्रबंधन करने का तरीका समझाया। उन्होंने सेटेलाइट एंड फोटोग्राफी एनालिटिक्स के लिए तैयार किए नए शप्तशती पोर्टल का अनावरण करते हुए उसकी खूबियां बताई।
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एफपीओ. के अध्यक्ष डॉ. डीएस. मलिक ने अतिथियों का स्वागत किया। उपाध्यक्ष डॉ. एसपी. तोमर ने जल प्रबंधन के लिए डीएसआर. को अपनाने, समय पर खरपतवार नियंत्रण की विधियां, पेस्टीसाइड फ्री शुद्ध बासमती चावल उत्पादन संबंधी गुर बताए।
इस मौके पर भारतीय गेहूं एवं जौ अनुसंधान संस्थान के प्रधान वैज्ञानिक डॉ. अनुज कुमार, कृषि विभाग के उपनिदेशक डॉ. वजीर सिंह, कंवलजीत, नाबार्ड के एजीएम. हिमांशु खत्री, निफको नीलोखेड़ी के चेयरमैन डॉ. सरदार सिंह मौजूद रहे।