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हिसार में लाठी चार्ज के विरोध में किसानों ने किया दो घंटे हाईवे जाम

Amar Ujala Bureau अमर उजाला ब्यूरो
Updated Mon, 17 May 2021 02:16 AM IST
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Farmers jammed the highway in protest against lathicharge in hisar
हिसार में किसानों पर लाठीचार्ज के विरोध स्वरूप संयुक्त किसान मोर्चा के आह्वान पर रविवार को किसानों ने करनाल जिले में बसताड़ा व प्यौंत टोल प्लाजा सहित विभिन्न स्थानों पर शाम को दो घंटे तक हाईवे जामकर विरोध प्रदर्शन किया। किसानों ने पुलिस के वाहनों को भी नहीं गुजरने दिया। पुलिस वाहनों के आगे लेटकर किसानों ने उनका रास्ता रोका। इससे पहले आपात स्थिति से निपटने के लिए जाम स्थलों पर भारी पुलिस बल तैनात किया गया था।
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हिसार में किसानों पर लाठीचार्ज के विरोध में बसताड़ा टोल पर रविवार को किसानों ने दो घंटे तक चंडीगढ़-दिल्ली हाईवे पर जाम लगाया। सरकार व प्रशासन के खिलाफ नारेबाजी की। किसानों ने स्थानीय पुलिस की गाड़ियों के सामने लेटकर विरोध किया। उन्हें भी सड़क पार नहीं करने नहीं दिया। जिससे पुलिस ने अपने वाहनों को बैरंग लौटना पड़ा। हालांकि किसानों ने एंबुलेंस, ऑक्सीजन, सेना व बीमार लोगों की गाड़ियों को जाने दिया गया। किसानों ने कहा कि हिसार में किसानों के साथ लाठीचार्ज करके सरकार ने किसानों के साथ गलत व्यवहार किया है, जो सहन नहीं किया जाएगा। किसानों ने कहा कि रविवार को हिसार में प्रदेश मुख्यमंत्री मनोहर लाल ने पांच सौ बेड के कोविड केयर सेंटर का उद्घाटन किया। किसानों ने सीएम का विरोध किया तो पुलिस ने किसानों पर लाठीचार्ज कर दिया। जिसके विरोध में संयुक्त किसान मोर्चा ने शाम पांच से सात बजे तक नेशनल हाईवे जाम करने का एलान किया था। इस पर किसानों ने बसताड़ा टोल पर चंडीगढ़-दिल्ली व दिल्ली-चंडीगढ़ हाईवे को जाम कर दिया। इधर जयसिंहपुरा गांव के सैकड़ों किसानों ने असंध करनाल नेशनल हाईवे 709 पर गांव जयसिंहपुर में जाम लगाया। सरकार व प्रशासन के खिलाफ नारेबाजी की। इसमें शुक्रपाल सिंह, छत्रपाल सिंह, वेदप्रकाश, शमशेर सिंह, काला, सतबीर सिंह, सूरजभान, कश्मीर सिंह आदि कई किसान शामिल रहे। इसके अलावा निसिंग क्षेत्र में हिसार में किसानों पर लाठीचार्ज के विरोध में किसानों ने करनाल-जींद स्टेट हाईवे स्थित प्योंत टोल प्लाजा को दो घंटे के लिए जाम लगाकर विरोध प्रदर्शन किया। दोनों ओर वाहनों की लंबी कतारें लग गई। शाम करीब 5 बजे किसान लक्खा सिंह व साहब सिंह की अध्यक्षता में प्योंत टोल के बीचोबीच आकर बैठ गए और सरकार के खिलाफ नारेबाजी शुरू कर दी। किसानों ने कहा कि स्वतंत्र भारत में हर किसी को शांतिपूर्वक तरीके से विरोध प्रदर्शन का अधिकार है लेकिन सरकार सत्ता का नाजायज फायदा उठाते हुए किसानों के ऊपर अत्याचार कर रही है। शाम 7 बजे किसानों ने जाम खोल दिया।
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पुलिस ने वाहनों को किया डायवर्ट
पुलिस ने हाईवे पर जाम की स्थिति से निपटने के लिए वाहनों का डायवर्ट करना शुरू कर दिया। पुलिस ने बसताड़ा ओवरब्रिज से वाहनों को डायवर्ट कर दिया और कुटेल से निकाल कर करनाल की ओर रवाना किया, वही करनाल की ओर से आने वाले वाहनों को झिवेरहेड़ी और कुटेल से निकाल कर पानीपत की ओर भेजा। इस दौरान यहां भारी पुलिस बल तैनात किया गया।
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पुलिस से किसानों की तीखी नोकझोंक
मधुबन। बसताड़ा टोल पर जाम के दौरान वाहनों के आवागमन को लेकर किसानों व आंदोलनकारी किसानों के बीच तीखी नोकझोंक हुई। लोकल वाहन चालक टोल से वाहन निकालने की कोशिश कर रहे, लेकिन किसानों ने उनको टोल से गुजरने नहीं दिया।
लाठी डंडे लेकर पहुंचे किसान
-बसताड़ा टोल प्लाजा पर किसान भी विरोध प्रदर्शन करने लाठी डंडे लेकर पहुंचे थे। हिसार में हुए लाठीचार्ज के विरोध में किसान गुस्से में थे। किसानों का कहना था कि अब सरकार के खिलाफ आर पार की लड़ाई लड़ी जाएगी।
ज्यादती कर किसानों का हौसला नहीं तोड़ सकती सरकार : राकेश टिकैत
असंध। जींद जिले के रौढ़ गांव में जनसभा करके वापस लौटते समय असंध में किसान नेता गुरमुख सिंह के आवास पर रुके भाकियू के राष्ट्रीय प्रवक्ता राकेश टिकैत ने कहा कि हिसार में किसानों पर लाठी चार्ज निंदनीय है, लेकिन सरकार किसानों के आंदोलन को ज्यादती करके दबा नहीं सकती है। इस घटना ने अग्रंजों की हुकूमत की याद ताजा कर दी है।

टिकैत ने पत्रकारों से बातचीत के दौरान कहा कि हिसार में ऐसे मौके पर अस्पताल का उद्घाटन करना कोई जरूरी नहीं था। यह तो ऑनलाइन भी हो सकता था, लेकिन जानबूझ कर किसानों को उकसाने के लिए ऐसा किया जा रहा है। बेकसूर किसानों को लाठियां मारी गईं, प्लास्टिक की गोलियां चलाई र्गइं, सैकड़ों किसान बुरी तरह घायल हैं। भाजपा नेताओं को वार्ता करके किसानों की जो मांगे हैं, उन्हें मंजूर करके आंदोलन खत्म करवाना चाहिए, लेकिन इस पर उनका कोई ध्यान नहीं है। उन्होंने किसानों से इसी तरह विरोध जारी रखने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि किसानों की लड़ाई सच्ची है, आखिर में जीत किसानों की ही होगी। इस मौके पर दलविंद, चरनजीत, गुरजीत, पाला जुंडला, सतनाम आदि मौजूद रहे।
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