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सरकारी विभागों पर पेट्रोल पंपों के 15 करोड़ बकाया, करनाल के 80 लाख
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प्रदेश के पेट्रोल पंप संचालकों के सरकारी विभागों पर करोड़ों रुपये बकाया हैं। अकेले करनाल में सरकारी विभागों पर यह रकम 80 लाख रुपये के करीब है। प्रदेश की बात करें तो सरकारी विभागों पर पेट्रोल पंप संचालकों के 15 करोड़ रुपये बकाया हैं। पेट्रोल पंप संचालकों का कहना है कि यह राशि लोकसभा चुनाव से लेकर मेयर चुनाव तक सरकारी मशीनरी द्वारा प्रयोग किए तेल के हैं। कई मामलों में दो से तीन साल तक के पैसे भी अटके हैं। बकाया राशि का भुगतान नहीं होने पर एक तरफ जहां पेट्रोल पंप संचालक आंदोलन के मूड में हैं, वहीं हो रही किरकिरी और पेट्रोल पंप संचालकों के तेवर देखकर सीएम ने स्वयं मोर्चा संभाल लिया है। चुनाव से पहले माहौल न बिगड़े इसको लेकर सीएम ने करनाल समेत अन्य जिलों के पंप संचालकों की बकाया राशि का ब्योरा मांगा है। साथ ही निर्देश दिए हैं कि पिछली राशि का भुगतान जल्द कर दिया जाए। इसके अलावा सरकारी अमला पेट्रोल पंप संचालकों को सीएम से मिलवाकर उनका रोष कम करने की कोशिशों में लगा है। शनिवार को सीएम मनोहर लाल करनाल में होंगे, ऐसे में पेट्रोल पंप संचालकों के साथ एसोसिएशन की बैठक होने की संभावना है। मामले में सीएम के ओएसडी अमरेंद्र सिंह ने बताया कि यह मामला सीएम के संज्ञान में आ चुका है। सीएम ने बकाया राशि का रिकार्ड मांगा है, साथ ही अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि बकाया राशि का भुगतान कर दिया जाए।
पहले मिलता था 2 प्रतिशत ब्याज, अब मूल को भी तरसे
पेट्रोल पंप एसोसिएशन के पदाधिकारी राजबीर चौहान का कहना है कि उनका 1969 से पेट्रोल पंप है। पहले सरकारी विभाग तेल लेने के 15 दिन बाद पेमेंट करते थे, लेकिन धीरे-धीरे यह एक माह हुआ। अब तो कोई सिस्टम ही नहीं है। कई पेट्रोल पंप संचालकों के कई-कई साल के पैसे अटके पड़े हैं। नियम के हिसाब से तो इस राशि पर ब्याज समेत पैसे मिलने चाहिए, लेकिन यहां पर संचालक मूल पैसे के लिए ही भटक रहे हैं। पहले देरी से राशि मिलने पर दो प्रतिशत ब्याज भी मिलता था। सवाल है कि एक तो पंप संचालक सरकार को एडवांस में टैक्स देते हैं और बिना पैसे के तेल, बावजूद इसके संचालकों को परेशान किया जा रहा है।
ये विभाग लेते हैं पंपों से तेल
पेट्रोल पंपों से उधार में तेल वाले विभागों की बात करें तो इनमें पुलिस, नगर निगम, जनस्वास्थ्य विभाग, बिजली निगम, शिक्षा विभाग, डीएफएससी समेत अन्य विभाग भी शामिल हैं। सरकारी विभागों की गाड़ियां पंपों से अनुबंध के आधार पर तेल लेते हैं। सभी विभाग अलग-अलग पंपों से टाईअप रखते हैं। पेट्रोल पंप संचालकों का कहना है कि बार-बार चक्कर लगाने के बाद भी विभाग पैसा जारी नहीं कर रहे हैं।
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इसलिए अटके हैं पैसे
करनाल पेट्रोल पंप एसोसिएशन के जिला प्रधान रामकुमार कल्याण ने पैसे अटकने के पीछे सरकारी सिस्टम की कमी को बताया है। उन्होंने बताया कि दिक्कत तो यह है कि न तो संबंधित विभागों के पास इसका हिसाब रखने के लिए अलग से कोई व्यक्ति है और न ही कोई रिकार्ड संभालता है। पंप के अकाउंटेंट के पास विभाग के भी काम होते हैं, पेट्रोल पंप संचालक 15 दिन बाद बिल दे देते हैं, लेकिन बाद में कभी बिल नहीं मिलते तो कभी उनकी लाग बुक में रिकार्ड नहीं मिलता। इसी कारण एक बार अटकी राशि अटक ही जाती है।
प्रदेश सरकार पेट्रोल पंप संचालकों का शोषण कर रही है। नियम तो यह है कि तेल के पैसे 15 दिन में देने होते हैं, लेकिन कई-कई माह और कई बार साल से भी ज्यादा समय हो जाता है, संचालकों को पैसे नहीं दिए जाते। एसोसिएशन यह मांग पहले भी कई बार उठा चुकी है। करनाल जिले के करीब 80 लाख रुपये बकाया हैं, तो इससे अंदाजा लगाया जा सकता है कि पूरे प्रदेश के हालात क्या होंगे। एसोसिएशन का अनुमान है कि पूरे प्रदेश के पेट्रोल पंप संचालकों के करीब 15 करोड़ रुपये से ज्यादा सरकार के पास उधार है। सरकार ने जिला पेट्रोल पंप संचालकों को जल्द बकाया राशि देने का आश्वासन दिया है, अगर राशि नहीं आई तो आगामी रणनीति बनाई जाएगी और आंदोलन से भी पीछे नहीं हटेंगे। - शमशेर गोगी, प्रदेशाध्यक्ष, पेट्रोल पंप डीलर एसोसिएशन।
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पहले मिलता था 2 प्रतिशत ब्याज, अब मूल को भी तरसे
पेट्रोल पंप एसोसिएशन के पदाधिकारी राजबीर चौहान का कहना है कि उनका 1969 से पेट्रोल पंप है। पहले सरकारी विभाग तेल लेने के 15 दिन बाद पेमेंट करते थे, लेकिन धीरे-धीरे यह एक माह हुआ। अब तो कोई सिस्टम ही नहीं है। कई पेट्रोल पंप संचालकों के कई-कई साल के पैसे अटके पड़े हैं। नियम के हिसाब से तो इस राशि पर ब्याज समेत पैसे मिलने चाहिए, लेकिन यहां पर संचालक मूल पैसे के लिए ही भटक रहे हैं। पहले देरी से राशि मिलने पर दो प्रतिशत ब्याज भी मिलता था। सवाल है कि एक तो पंप संचालक सरकार को एडवांस में टैक्स देते हैं और बिना पैसे के तेल, बावजूद इसके संचालकों को परेशान किया जा रहा है।
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ये विभाग लेते हैं पंपों से तेल
पेट्रोल पंपों से उधार में तेल वाले विभागों की बात करें तो इनमें पुलिस, नगर निगम, जनस्वास्थ्य विभाग, बिजली निगम, शिक्षा विभाग, डीएफएससी समेत अन्य विभाग भी शामिल हैं। सरकारी विभागों की गाड़ियां पंपों से अनुबंध के आधार पर तेल लेते हैं। सभी विभाग अलग-अलग पंपों से टाईअप रखते हैं। पेट्रोल पंप संचालकों का कहना है कि बार-बार चक्कर लगाने के बाद भी विभाग पैसा जारी नहीं कर रहे हैं।
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इसलिए अटके हैं पैसे
करनाल पेट्रोल पंप एसोसिएशन के जिला प्रधान रामकुमार कल्याण ने पैसे अटकने के पीछे सरकारी सिस्टम की कमी को बताया है। उन्होंने बताया कि दिक्कत तो यह है कि न तो संबंधित विभागों के पास इसका हिसाब रखने के लिए अलग से कोई व्यक्ति है और न ही कोई रिकार्ड संभालता है। पंप के अकाउंटेंट के पास विभाग के भी काम होते हैं, पेट्रोल पंप संचालक 15 दिन बाद बिल दे देते हैं, लेकिन बाद में कभी बिल नहीं मिलते तो कभी उनकी लाग बुक में रिकार्ड नहीं मिलता। इसी कारण एक बार अटकी राशि अटक ही जाती है।
प्रदेश सरकार पेट्रोल पंप संचालकों का शोषण कर रही है। नियम तो यह है कि तेल के पैसे 15 दिन में देने होते हैं, लेकिन कई-कई माह और कई बार साल से भी ज्यादा समय हो जाता है, संचालकों को पैसे नहीं दिए जाते। एसोसिएशन यह मांग पहले भी कई बार उठा चुकी है। करनाल जिले के करीब 80 लाख रुपये बकाया हैं, तो इससे अंदाजा लगाया जा सकता है कि पूरे प्रदेश के हालात क्या होंगे। एसोसिएशन का अनुमान है कि पूरे प्रदेश के पेट्रोल पंप संचालकों के करीब 15 करोड़ रुपये से ज्यादा सरकार के पास उधार है। सरकार ने जिला पेट्रोल पंप संचालकों को जल्द बकाया राशि देने का आश्वासन दिया है, अगर राशि नहीं आई तो आगामी रणनीति बनाई जाएगी और आंदोलन से भी पीछे नहीं हटेंगे। - शमशेर गोगी, प्रदेशाध्यक्ष, पेट्रोल पंप डीलर एसोसिएशन।