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Karnal News: बुजुर्गों को घर बैठे मिलेगी जीवित प्रमाणपत्र की सुविधा
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- एक से 30 नवंबर तक देशभर में चलेगा राष्ट्रव्यापी डिजिटल जीवन प्रमाणपत्र अभियान
विशु शर्मा
करनाल। बुजुर्गों और असक्त पेंशनभोगियों को अब घर बैठे ही जीवित प्रमाण पत्र की सुविधा मिलेगी। डाक विभाग की इंडिया पोस्ट पेमेंट्स बैंक ने यह सुविधा शुरू की है। इसके लिए पेंशन और पेंशनभोगी कल्याण विभाग के साथ समझौता कर 30 दिनों के लिए देश के 800 शहरों और कस्बों में यह सुविधा दी जाएगी है। यह अभियान एक से 30 नवंबर तक चलेगा।
इस पहल का मुख्य उद्देश्य यह है कि चेहरा प्रमाणीकरण और उंगलियों के निशान प्रमाणीकरण तकनीक की डिजिटल प्रक्रिया को बढ़ावा मिले और दूरदराज के क्षेत्रों में रहने वाले सभी पेंशनभोगियों के साथ-साथ वरिष्ठ नागरिकों को उनके घर पर ही यह सुविधा मिल सके। इस सेवा से सभी पेंशनभोगी, भले ही वह ग्रामीण क्षेत्र में रहने वाले हों, आसानी से अपना जीवन प्रमाणपत्र जमा करा सकेंगे। इसमें डाकियों और ग्रामीण डाक सेवकों के साथ मिलकर डाकघरों व पेंशनभोगियों को घर-घर व डिजिटल जीवन प्रमाणपत्र शिविरों द्वारा यह सेवा प्रदान की जाएगी।
मुख्य डाकघर के प्रवर डाकपाल डॉ. कर्म सिंह झंझोलिया ने बताया कि इस अभियान में पेंशनभोगी कल्याण संघों व यूआईडीएआई व विभिन्न हितधारकों को जोड़ा जाएगा, जिससे पेंशनभोगियों को लाभ होगा। डिजिटल जीवन प्रमाणपत्र बनवाने के लिए पेंशन भोगियों को किसी भी प्रकार के सरकारी दस्तावेजों को प्रस्तुत करने की आवश्यकता नहीं होगी और वह आसानी से जीवन प्रमाणपत्र बनवा सकेंगे।
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इंडिया पोस्ट पेमेंट्स बैंक (आईपीपीबी) ने पेंशन और पेंशनभोगी कल्याण विभाग और राष्ट्रीय सूचना विज्ञान केंद्र के समन्वय से सभी केंद्रीय, राज्य और कर्मचारी भविष्य निधि संगठन के पेंशनभोगियों के लिए जीवन प्रमाण बनवाने के लिए 2020 में डिजिटल जीवन प्रमाणपत्र की डोर स्टेप सेवा शुरू की थी।
डिजिटल जीवन प्रमाणपत्र जारी करने के लिए कम से कम समय लगता है। पेंशनभोगी इंडिया पोस्ट पेमेंट्स बैंक (आईपीपीबी) की ओर से दी जाने वाली डोरस्टेप डिजिटल लाइफ सर्टिफिकेट सेवा पूरे जिले व ग्रामीण डाकघर में जाकर जीवन प्रमाणपत्र प्राप्त कर सकेंगे। पेंशनभोगियों को केवल अपने नजदीकी डाकघर के डाकिए व ग्रामीण डाक सेवक से संपर्क करना है, जो अनुरोधकर्ता के दिए गए पते पर जाकर उनको डोरस्टेप सेवा प्रदान कर उनका डिजिटल जीवन प्रमाणपत्र बनाएगा। डाकिया व ग्रामीण डाक सेवक द्वारा डीएलसी जनरेशन के लिए 70 रुपये का शुल्क (जीएसटी सहित) देना होगा।
इस सेवा के लिए पेंशनभोगी की ओर से केवल आधार संख्या और पेंशन का विवरण देना होगा और प्रमाणपत्र बनाने की प्रक्रिया पूरी होने पर पेंशनभोगी को उसके मोबाइल नंबर पर पुष्टिकरण एसएमएस प्राप्त होगा और प्रमाणपत्र को टी+1 दिन के बाद https://jeevanpramaan.gov.in/ppouser/login पर मिल जाएगा। उन्होंने बताया कि अधिक जानकारी के लिए जिला करनाल व ग्रामीण क्षेत्र के सभी डाकघरों में संबंधित अधिकारी से मिल सकते हैं।
क्या है इंडिया पोस्ट पेमेंट बैंक
भारत सरकार के स्वामित्व वाली 100 प्रतिशत इक्विटी के साथ डाक विभाग व संचार मंत्रालय के तहत इंडिया पोस्ट पेमेंट्स बैंक (आईपीपीबी) की स्थापना 17 अगस्त 2016 में की गई थी। इंडिया पोस्ट पेमेंट्स बैंक का शुभारंभ एक सितंबर 2018 को किया गया था। बैंक की स्थापना भारत में आम आदमी के लिए सबसे सुलभ, किफायती और विश्वसनीय बैंक बनाने की दृष्टि से की गई है। इंडिया पोस्ट पेमेंट्स बैंक का मूल उद्देश्य बैंकिंग सेवाओं से वंचित और अल्प बैंकिंग सेवाओं से वंचित लोगों के लिए बाधाओं को दूर करना तथा 1,63,000 से अधिक डाकघरों व ग्रामीण क्षेत्रों में 1,43,000 और 190,000 से अधिक डाक कर्मचारियों वाले डाकघरों के साथ लाभ उठाते हुए प्रगति करना है।
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विशु शर्मा
करनाल। बुजुर्गों और असक्त पेंशनभोगियों को अब घर बैठे ही जीवित प्रमाण पत्र की सुविधा मिलेगी। डाक विभाग की इंडिया पोस्ट पेमेंट्स बैंक ने यह सुविधा शुरू की है। इसके लिए पेंशन और पेंशनभोगी कल्याण विभाग के साथ समझौता कर 30 दिनों के लिए देश के 800 शहरों और कस्बों में यह सुविधा दी जाएगी है। यह अभियान एक से 30 नवंबर तक चलेगा।
इस पहल का मुख्य उद्देश्य यह है कि चेहरा प्रमाणीकरण और उंगलियों के निशान प्रमाणीकरण तकनीक की डिजिटल प्रक्रिया को बढ़ावा मिले और दूरदराज के क्षेत्रों में रहने वाले सभी पेंशनभोगियों के साथ-साथ वरिष्ठ नागरिकों को उनके घर पर ही यह सुविधा मिल सके। इस सेवा से सभी पेंशनभोगी, भले ही वह ग्रामीण क्षेत्र में रहने वाले हों, आसानी से अपना जीवन प्रमाणपत्र जमा करा सकेंगे। इसमें डाकियों और ग्रामीण डाक सेवकों के साथ मिलकर डाकघरों व पेंशनभोगियों को घर-घर व डिजिटल जीवन प्रमाणपत्र शिविरों द्वारा यह सेवा प्रदान की जाएगी।
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मुख्य डाकघर के प्रवर डाकपाल डॉ. कर्म सिंह झंझोलिया ने बताया कि इस अभियान में पेंशनभोगी कल्याण संघों व यूआईडीएआई व विभिन्न हितधारकों को जोड़ा जाएगा, जिससे पेंशनभोगियों को लाभ होगा। डिजिटल जीवन प्रमाणपत्र बनवाने के लिए पेंशन भोगियों को किसी भी प्रकार के सरकारी दस्तावेजों को प्रस्तुत करने की आवश्यकता नहीं होगी और वह आसानी से जीवन प्रमाणपत्र बनवा सकेंगे।
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इंडिया पोस्ट पेमेंट्स बैंक (आईपीपीबी) ने पेंशन और पेंशनभोगी कल्याण विभाग और राष्ट्रीय सूचना विज्ञान केंद्र के समन्वय से सभी केंद्रीय, राज्य और कर्मचारी भविष्य निधि संगठन के पेंशनभोगियों के लिए जीवन प्रमाण बनवाने के लिए 2020 में डिजिटल जीवन प्रमाणपत्र की डोर स्टेप सेवा शुरू की थी।
डिजिटल जीवन प्रमाणपत्र जारी करने के लिए कम से कम समय लगता है। पेंशनभोगी इंडिया पोस्ट पेमेंट्स बैंक (आईपीपीबी) की ओर से दी जाने वाली डोरस्टेप डिजिटल लाइफ सर्टिफिकेट सेवा पूरे जिले व ग्रामीण डाकघर में जाकर जीवन प्रमाणपत्र प्राप्त कर सकेंगे। पेंशनभोगियों को केवल अपने नजदीकी डाकघर के डाकिए व ग्रामीण डाक सेवक से संपर्क करना है, जो अनुरोधकर्ता के दिए गए पते पर जाकर उनको डोरस्टेप सेवा प्रदान कर उनका डिजिटल जीवन प्रमाणपत्र बनाएगा। डाकिया व ग्रामीण डाक सेवक द्वारा डीएलसी जनरेशन के लिए 70 रुपये का शुल्क (जीएसटी सहित) देना होगा।
इस सेवा के लिए पेंशनभोगी की ओर से केवल आधार संख्या और पेंशन का विवरण देना होगा और प्रमाणपत्र बनाने की प्रक्रिया पूरी होने पर पेंशनभोगी को उसके मोबाइल नंबर पर पुष्टिकरण एसएमएस प्राप्त होगा और प्रमाणपत्र को टी+1 दिन के बाद https://jeevanpramaan.gov.in/ppouser/login पर मिल जाएगा। उन्होंने बताया कि अधिक जानकारी के लिए जिला करनाल व ग्रामीण क्षेत्र के सभी डाकघरों में संबंधित अधिकारी से मिल सकते हैं।
क्या है इंडिया पोस्ट पेमेंट बैंक
भारत सरकार के स्वामित्व वाली 100 प्रतिशत इक्विटी के साथ डाक विभाग व संचार मंत्रालय के तहत इंडिया पोस्ट पेमेंट्स बैंक (आईपीपीबी) की स्थापना 17 अगस्त 2016 में की गई थी। इंडिया पोस्ट पेमेंट्स बैंक का शुभारंभ एक सितंबर 2018 को किया गया था। बैंक की स्थापना भारत में आम आदमी के लिए सबसे सुलभ, किफायती और विश्वसनीय बैंक बनाने की दृष्टि से की गई है। इंडिया पोस्ट पेमेंट्स बैंक का मूल उद्देश्य बैंकिंग सेवाओं से वंचित और अल्प बैंकिंग सेवाओं से वंचित लोगों के लिए बाधाओं को दूर करना तथा 1,63,000 से अधिक डाकघरों व ग्रामीण क्षेत्रों में 1,43,000 और 190,000 से अधिक डाक कर्मचारियों वाले डाकघरों के साथ लाभ उठाते हुए प्रगति करना है।