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Karnal News: साइंस मॉडल के जरिये समस्याओं का समाधान खोजने के प्रयास
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मानसी मौर्य
करनाल। विज्ञान की खोज और नई पद्धति ने जहां जीवन स्तर में सुधार किया है, वहीं बदलते परिवेश में आज हमारे सामने कई समस्याएं भी आ रही हैं।
ऐसे में भावी वैज्ञानिक माने जाने वाले विज्ञान के विद्यार्थी अपनी खोज को आगे बढ़ा रहे हैं। नित नए तैयार होने वाले साइंस के मॉडल से वह हमारे आस-पास की समस्याओं के समाधान खोजने का प्रयास कर रहे हैं। जिस पर मॉडल के रूप में सभी का ध्यानाकर्षण किया जाता है।
शिक्षा विभाग के अलावा उच्चतर शिक्षा विभाग, प्रदेश व केंद्र सरकार की ओर से भी विद्यार्थियों में विज्ञान की तरफ रुचि बढ़ाने के लिए कई प्रयास किए जा रहे हैं। इसी के आधार पर इंस्पायर अवार्ड प्रतियोगिता के अलावा विज्ञान प्रदर्शनी का भी आयोजन किया जाता है। जिले के विद्यार्थियों ने इस दिशा में कैसा कार्य किया है, पढ़ें राष्ट्रीय विज्ञान दिवस पर आधारित इस विशेष रिपोर्ट में-
इलेक्ट्रॉनिक कचरे का होगा निपटान : पंडित चिरंजीलाल शर्मा महाविद्यालय के विज्ञान विभाग के छात्र अमृतपाल और महक ने ई-वेस्ट टू वंडर मॉडल तैयार किया है। इसका उद्देश्य ई-वेस्ट जैसे पुराने मोबाइल फोन को पुन: चक्रित करना है क्योंकि मोबाइल फोन में लेड और मरकरी जैसे धातु होते हैं जो शरीर के लिए अत्यधिक हानिकारक हो सकते हैं।
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यह धातु न केवल कैंसर का कारण बनते हैं बल्कि शरीर के अन्य अंगों जैसे किडनी, लिवर और तंत्रिका तंत्र को भी नुकसान पहुचा सकते हैं। मॉडल में उन्होंने प्रदर्शित किया कि पुराने और खराब हो चुके इलेक्ट्रॉनिक वस्तुओं को रिसाइकल के लिए देकर स्वास्थ्य को और पर्यावरण को बचाया जा सकता है। अमृतपाल ने बताया कि इस मॉडल से जागरूक होकर इलेक्ट्रॉनिक कचरे का निपटान की दिशा में महत्वपूर्ण कदम उठाया जा सकता है और हम इसे सतत विकास के रूप में देख सकते हैं। एआई मॉडल से कैंसर के प्रारंभिक चरण की होगी पहचान : तन्नू और कोमल द्वारा तैयार एआई एट द मोक्यूलर फ्रंटियर ट्रांसफोर्म डाइगनोसिस एंड हेल्थ केयर मॉडल का उद्देश्य है कि आज के समय में एआई कैसे हर क्षेत्र में अपने पैर पसार रहा है और वहीं स्वास्थ्य के क्षेत्र में उपयोगी साबित हो रहा है। पारंपरिक अस्पतालों में एआई का उपयोग रोगों को शीघ्र और सही निदान करने के लिए किया जा सकता है। विशेष रूप से कैंसर जैसे गंभीर रोगों के प्रारंभिक चरण को पहचानने में एआई की महत्वपूर्ण भूमिका हो सकती है।
इससे पहले ही पता लगाया जा सकता है और बीमारी को गंभीर होने से रोका जा सकता है। वहीं एआई आधारित रोबोटिक लैब में काम कर सकेंगे। यह मॉडल दर्शाता है कि कैसे मॉलिक्यूलर लेवल पर एआई उपयोगी हो सकता है। संवाद
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करनाल। विज्ञान की खोज और नई पद्धति ने जहां जीवन स्तर में सुधार किया है, वहीं बदलते परिवेश में आज हमारे सामने कई समस्याएं भी आ रही हैं।
ऐसे में भावी वैज्ञानिक माने जाने वाले विज्ञान के विद्यार्थी अपनी खोज को आगे बढ़ा रहे हैं। नित नए तैयार होने वाले साइंस के मॉडल से वह हमारे आस-पास की समस्याओं के समाधान खोजने का प्रयास कर रहे हैं। जिस पर मॉडल के रूप में सभी का ध्यानाकर्षण किया जाता है।
शिक्षा विभाग के अलावा उच्चतर शिक्षा विभाग, प्रदेश व केंद्र सरकार की ओर से भी विद्यार्थियों में विज्ञान की तरफ रुचि बढ़ाने के लिए कई प्रयास किए जा रहे हैं। इसी के आधार पर इंस्पायर अवार्ड प्रतियोगिता के अलावा विज्ञान प्रदर्शनी का भी आयोजन किया जाता है। जिले के विद्यार्थियों ने इस दिशा में कैसा कार्य किया है, पढ़ें राष्ट्रीय विज्ञान दिवस पर आधारित इस विशेष रिपोर्ट में-
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इलेक्ट्रॉनिक कचरे का होगा निपटान : पंडित चिरंजीलाल शर्मा महाविद्यालय के विज्ञान विभाग के छात्र अमृतपाल और महक ने ई-वेस्ट टू वंडर मॉडल तैयार किया है। इसका उद्देश्य ई-वेस्ट जैसे पुराने मोबाइल फोन को पुन: चक्रित करना है क्योंकि मोबाइल फोन में लेड और मरकरी जैसे धातु होते हैं जो शरीर के लिए अत्यधिक हानिकारक हो सकते हैं।
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यह धातु न केवल कैंसर का कारण बनते हैं बल्कि शरीर के अन्य अंगों जैसे किडनी, लिवर और तंत्रिका तंत्र को भी नुकसान पहुचा सकते हैं। मॉडल में उन्होंने प्रदर्शित किया कि पुराने और खराब हो चुके इलेक्ट्रॉनिक वस्तुओं को रिसाइकल के लिए देकर स्वास्थ्य को और पर्यावरण को बचाया जा सकता है। अमृतपाल ने बताया कि इस मॉडल से जागरूक होकर इलेक्ट्रॉनिक कचरे का निपटान की दिशा में महत्वपूर्ण कदम उठाया जा सकता है और हम इसे सतत विकास के रूप में देख सकते हैं। एआई मॉडल से कैंसर के प्रारंभिक चरण की होगी पहचान : तन्नू और कोमल द्वारा तैयार एआई एट द मोक्यूलर फ्रंटियर ट्रांसफोर्म डाइगनोसिस एंड हेल्थ केयर मॉडल का उद्देश्य है कि आज के समय में एआई कैसे हर क्षेत्र में अपने पैर पसार रहा है और वहीं स्वास्थ्य के क्षेत्र में उपयोगी साबित हो रहा है। पारंपरिक अस्पतालों में एआई का उपयोग रोगों को शीघ्र और सही निदान करने के लिए किया जा सकता है। विशेष रूप से कैंसर जैसे गंभीर रोगों के प्रारंभिक चरण को पहचानने में एआई की महत्वपूर्ण भूमिका हो सकती है।
इससे पहले ही पता लगाया जा सकता है और बीमारी को गंभीर होने से रोका जा सकता है। वहीं एआई आधारित रोबोटिक लैब में काम कर सकेंगे। यह मॉडल दर्शाता है कि कैसे मॉलिक्यूलर लेवल पर एआई उपयोगी हो सकता है। संवाद