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धरतीपुत्रों पर बरपा कुदरत का कहर

Amar Ujala Bureau अमर उजाला ब्यूरो
Updated Sat, 18 Apr 2020 01:12 AM IST
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earth son wreaks havoc
सरकार की ओर से गेहूं खरीद की तैयारी हो चुकी है और किसान खेतों में कटाई में जुट गया था, लेकिन मौसम की मार ने किसानों के सारे अरमानों पर पानी फेर दिया। एक ओर जहां कटाई करने वाले किसानों का गेहूं भीग गया, वहीं दूसरी ओर शेष कटाई पर करीब एक सप्ताह का ब्रेक लग गया है। कुदरत के इस कहर से धरतीपुत्रों के आंखों में भी आंसू आ गये।
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शुक्रवार की शाम अचानक गरज के साथ बारिश होने से किसानों के होश फाख्ता हो गए। दिन के समय खेतों में कंबाइन से गेहूं कटाई का काम चल रहा था और शाम को सभी कृषि कार्य बंद हो गए। इसके साथ ही बार-बार आसमानी बिजली की तेज गर्जना ने दिलों में दहशत पैदा की। आखिर में वही हुआ जिसका किसानों को डर सता रहा था। बारिश के कारण गेहूं कटाई का कार्य कई दिन के लिए रुक गया है। शाम को तेज आंधी आने से गेहूं की ढेरियों पर रखी तिरपालें उड़ गई। अनाज की हिफाजत के लिए किसान दौड़े लेकिन मौसम के आगे बेबस नजर आये।
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फिलहाल दो दिन और बूंदाबांदी की संभावना जताई जा रही है। इससे गेहूं की फसल को काफी नुकसान होगा। मौसम विभाग का पूर्वानुमान है कि 18 व 19 अप्रैल को बादल, गरज व चमक के साथ छिटपुट बूंदाबांदी होने के आसार हैं। 20 से 23 अप्रैल तक आंशिक बादल रहेंगे। मौसम की यह स्थिति किसानों के लिए दुखदायी बन चुकी है। इस बार कुदरत ने ऐसा कहर बरपाया कि किसान को संभलने का मौका ही नहीं दिया। इस बरसात से गेहूं की गुणवत्ता पर भी असर पड़ेगा।
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खुले में भीगकर सड़ सकता है अनाज, गुणवत्ता होगी प्रभावित
सरकार ने लॉकडाउन व कोरोना वायरस के संक्रमण को रोकने के लिए कई कड़े नियम बनाए। इस बीच कृषि कार्यों को निपटाने के लिए ढील दी गई। लगातार मौसम खराब रहने की वजह से इस बार गेहूं कटाई का काम 12 दिन लेट शुरू हुआ। गेहूं की फसल पकने में समय लगा है। अनाज मंडियों में भीड़ ना हो इसके लिए खरीद केंद्र बनाए गए। लेकिन 20 अप्रैल से पहले खरीद नहीं करने की घोषणा सरकार ने की हुई है। जिन किसानों ने गेहूं की कटाई करवा ली है। उन्होंने कहीं बरामदे में, पशु बाड़े में या घरों में जगह का प्रबंध अनाज रखने के लिए किया। वहीं कुछ ने खेत में तिरपाल बिछाकर उसी पर अनाज की ढेरी लगा दी। अनाज की रात को पहरेदारी का भी इंतजाम किया। लेकिन कुदरत को कुछ और ही मंजूर था। खेतों में खुले आसमान तले रखा अनाज रात भर भीगता रहा। अब जल्द व्यवस्था नहीं होने पर इसके सड़ने की संभावना बन जाएगी। वहीं गेहूं की गुणवत्ता प्रभावित होना तय माना जा रहा है। किसान हरप्रीत सिंह कलवेहड़ी ने कहा कि यदि अनाज मंडियों में गेहूं मंगवाया होता तो किसानों को अनाज रखने के लिए शेड की सुविधा मिल जाती।
मार्च में हुए नुकसान का करवाया था आंकलन
13 से 17 मार्च के बीच हुई ओलावृष्टि, बारिश और तेज हवा ने पहले किसानों पर सितम बरपाया। जिले में 5500 से अधिक किसानों ने फसल खराब को लेकर हुए नुकसान की शिकायत की। नुकसान का सर्वे शुरू होनेे से पहले ही कोरोना वायरस के चलते लॉकडाउन हो गया। इस कारण समय पर सर्वे शुरू नहीं करवाया जा सका। सरकार के आदेश पर अधिकारियों ने सर्वे कार्य हाल ही में निपटाया और रिपोर्ट तैयार की। कृषि अधिकारियों ने किसानों को आश्वासन दिया कि उन्हें नुकसान का मुआवजा जरूर मिलेगा, लेकिन इससे पहले ही मौसम की एक और चोट ने किसानों की कमर तोड़ दी है।
गेहूं खरीद में भी आ सकती है मुश्किलें
किसान क्लब के महासचिव विजय कपूर का कहना है कि किसानों के पास अनाज रखने की जगह नहीं। जिन खेतों का गेहूं कंबाइन से कटवाया है, उसे खेत में तिरपाल बिछाकर डाला गया है। कुछ किसानों ने पशुबाड़े के बरामदे, घरों में या अन्य ठिकाने देखकर उनमें गेहूं को रखा है। किसानों के लिए इससे मुश्किल की घड़ी कोई नहीं हो सकती। यदि ज्यादा बरसात हुई तो गेहूं की क्वालिटी पर भी फर्क पड़ेगा। मंडियों में अधिकारियों को गेहूं रिजेक्ट करने का बहाना मिल जाता है, जिससे किसान प्रताड़ित होता है।
आसमानी बिजली ने फार्म हाउस पर बरपाया कहर
20 फुट तक बिखरे दीवार के टुकड़े, लाखों के बिजली उपकरण जले, दहशत में परिवार ने काटी काली रात
नगला रोड़ान गांव स्थित लाठर फार्म हाउस पर शुक्रवार की शाम आसमानी बिजली गिरने से क्षेत्र में दहशत पसर गई। फार्म हाउस की दीवार फट गई और टुकड़े 20 फुट दूर खेत तक पहुंचे। कोठी के अंदर टीवी, फ्रिज, पंखे, लाइटें, वातानुकूलित यंत्र सहित तमाम बिजली उपकरण जल गए। अंदर बैठे परिवार के सदस्य दहशत में आ गए। शोर सुन ग्रामीण मौके पर पहुंचे और कुशलक्षेम पूछा। दहशत में परिवार ने जागकर काली रात काटी।

शुक्रवार को किसान अपने खेतों में गेहूं कटाई के काम में व्यस्त थे। शाम को अनाज को संभालने में जुटे हुए थे। नगला रोड़ान निवासी महेंद्र सिंह लाठर का परिवार फार्म हाउस में रहता है। शाम के समय जब बरसात चल रही थी तो परिवार के सदस्य कोठी में थे। उसी दौरान आसमानी बिजली की तेज गर्जना हुई। कोठी की दीवार जिस पर लेंटर रखा होता है, उस पर बिजली गिरने से दीवार के एक हिस्से के टुकड़े होकर दूर तक बिखर गए। गनीमत यह रही कि कोई जानमाल का नुकसान नहीं हुआ। बिजली उपकरणों का हाल यह हुआ कि पंखों के भी टुकड़े हो गए। रात को फार्म हाउस पर अंधेरा छाया रहा। परिवार के सदस्यों ने जाग कर रात काटी।
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