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दुर्गा पूजा : ढाक की ताल से गूंजेंगे पंडाल, कोलकाता से आएंगे कलाकार
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भगवान दास
करनाल। कोरोना काल के बाद इस बार बंगाली कॉलोनी में मां दुर्गा भवानी की विशेष पूजा की जाएगी। इसके लिए दिल्ली से आठ फीट की मां दुर्गा की मूर्ति रविवार शाम को लाई गई है। सोमवार की शाम इसे बंगाली कॉलोनी में स्थापित किया जाएगा। पारंपरिक बंगला शैली में दुर्गा पूजा के लिए कोलकाता से पुजारी और ढाक बजाने के लिए कलाकार भी यहां पहुंचेंगे। 11 अक्तूबर से मां की पूजा शुरू होगी जो कि विजया दशमी 15 अक्तूूबर की सुबह तक चलेगी। दशमी पर मां की प्रतिमा का विसर्जन होगा।
सुबह केले के पेड़ की पूजा के बाद मां देवी की आराधना शुरू होगी। करनाल दुर्गा पूजा समिति के प्रधान पंकज देवनाथ ने बताया कि सुबह देवी की दुर्गाष्टी पूजा होगी। शाम को देवी की आमंत्रण और अधिवास होगा। इसी दिन मां का पट भी खुल जाएगा। सातवीं से विधिवत रूप से पूजा शुरू हो जाएगी जो कि सप्तमी से लेकर दशमी की सुबह तक चलेगी। संवाद
संधि पूजा, संध्या आरती और अंतिम दिन सिंदूर खेल रहेगा मुख्य आकर्षण
रिंकी विश्वास ने बताया कि सप्तमी से नवमी तक प्रतिदिन शाम होने वाली संध्या आरती होगी। दशमी को सिंदूर खेला जाएगा इसमें शादीशुदा महिलाएं शामिल होती हैं। बंगाली के अलावा दूसरे समाज की महिलाएं भी आती हैं। दशमी की सुबह विसर्जन पूजा होगी। दोपहर बाद प्रतिमा का विसर्जन के साथ पूजनोत्सव का समापन हो जाएगा।
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मां के लिए बनाई जाएगी विशेष रसोई
मां दुर्गा की पूजा के लिए विशेष रसोई बनाई जाएगी, जिसमें व्रत रखने वाली पांच महिलाएं प्रतिदिन सात तरह के व्यजन मां के लिए तैयार करेंगी।
बंगलादेश से 1965 में आए थे करनाल
बंगाली वेलफेयर एसोसिएशन के महासचिव सुमित विश्वास के अनुसार उनकी दादी जमना विश्वास ने उन्हें बताया था कि वह और उनका परिवार 1965 में बंगलादेश से मध्यप्रदेश के शहर रायपुर माना कैंप में आए थे, उसके बाद करनाल आए। तभी से मां दुर्गा की पूजा चल रही है। अब करनाल की बंगाली कॉलोनी में 46 परिवार रहते हैं।
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करनाल। कोरोना काल के बाद इस बार बंगाली कॉलोनी में मां दुर्गा भवानी की विशेष पूजा की जाएगी। इसके लिए दिल्ली से आठ फीट की मां दुर्गा की मूर्ति रविवार शाम को लाई गई है। सोमवार की शाम इसे बंगाली कॉलोनी में स्थापित किया जाएगा। पारंपरिक बंगला शैली में दुर्गा पूजा के लिए कोलकाता से पुजारी और ढाक बजाने के लिए कलाकार भी यहां पहुंचेंगे। 11 अक्तूबर से मां की पूजा शुरू होगी जो कि विजया दशमी 15 अक्तूूबर की सुबह तक चलेगी। दशमी पर मां की प्रतिमा का विसर्जन होगा।
सुबह केले के पेड़ की पूजा के बाद मां देवी की आराधना शुरू होगी। करनाल दुर्गा पूजा समिति के प्रधान पंकज देवनाथ ने बताया कि सुबह देवी की दुर्गाष्टी पूजा होगी। शाम को देवी की आमंत्रण और अधिवास होगा। इसी दिन मां का पट भी खुल जाएगा। सातवीं से विधिवत रूप से पूजा शुरू हो जाएगी जो कि सप्तमी से लेकर दशमी की सुबह तक चलेगी। संवाद
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संधि पूजा, संध्या आरती और अंतिम दिन सिंदूर खेल रहेगा मुख्य आकर्षण
रिंकी विश्वास ने बताया कि सप्तमी से नवमी तक प्रतिदिन शाम होने वाली संध्या आरती होगी। दशमी को सिंदूर खेला जाएगा इसमें शादीशुदा महिलाएं शामिल होती हैं। बंगाली के अलावा दूसरे समाज की महिलाएं भी आती हैं। दशमी की सुबह विसर्जन पूजा होगी। दोपहर बाद प्रतिमा का विसर्जन के साथ पूजनोत्सव का समापन हो जाएगा।
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मां के लिए बनाई जाएगी विशेष रसोई
मां दुर्गा की पूजा के लिए विशेष रसोई बनाई जाएगी, जिसमें व्रत रखने वाली पांच महिलाएं प्रतिदिन सात तरह के व्यजन मां के लिए तैयार करेंगी।
बंगलादेश से 1965 में आए थे करनाल
बंगाली वेलफेयर एसोसिएशन के महासचिव सुमित विश्वास के अनुसार उनकी दादी जमना विश्वास ने उन्हें बताया था कि वह और उनका परिवार 1965 में बंगलादेश से मध्यप्रदेश के शहर रायपुर माना कैंप में आए थे, उसके बाद करनाल आए। तभी से मां दुर्गा की पूजा चल रही है। अब करनाल की बंगाली कॉलोनी में 46 परिवार रहते हैं।