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Karnal News: बंगाली कॉलोनी में ढांक की थाप पर शुरू हुई दुर्गा पूजा
Mon, 29 Sep 2025 01:16 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, करनाल
संवाद न्यूज एजेंसी, करनाल
Updated Mon, 29 Sep 2025 01:16 AM IST
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संवाद न्यूज एजेंसी
करनाल। बंगाली कॉलोनी में ढांक की थाप पर रविवार सुबह दुर्गा पूजा शुरू हो गई। पूजा पांच दिनों तक चलेगी। दुर्गा पूजा में इस बार भी दिल्ली से लगभग ग्यारह फीट की दुर्गा, महिषासुर, गणेश, कार्तिक, लक्ष्मी और सरस्वती की मूर्ति लाई गई हैं।
रविवार सुबह कोलकाता से आए पंडित सूरजकांत ने बताया कि कल्पारंभ दुर्गा पूजा उत्सव की शुरुआत छठे नवरात्र से की जाती है। इस अनुष्ठान में जल से भरे बर्तन में देवी दुर्गा का आह्वान किया जाता है। कलश को चावल के ढेर पर रखा जाता है और आम के पत्तों से बंधा एक नारियल कलश के ऊपर रखा जाता है।
इसके बाद मंत्रों का उच्चारण कर देवी को मां दुर्गा पूजा के दौरान कलश में रहने के लिए आमंत्रित किया जाता है। वहीं बोधन समारोह षष्ठी की शाम को बेल्व वृक्ष पर एक दर्पण बांध दिया गया, इस दर्पण के माध्यम से देवी दुर्गा की मूर्ति प्रतिबिंबित होती है। रविवार शाम को पंडित सूरजकांत ने बेल्व पत्र की पूजा करवाई। श्रद्धालु भावना, सुमित विश्वास, रिंकी विश्वास ने बताया कि सुबह हुई पूजा के बाद और शाम को आरती के बाद मां दुर्गा के साथ सभी देवताओं और राक्षकों को अस्त्र-शस्त्र पहनाए गए।
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करनाल। बंगाली कॉलोनी में ढांक की थाप पर रविवार सुबह दुर्गा पूजा शुरू हो गई। पूजा पांच दिनों तक चलेगी। दुर्गा पूजा में इस बार भी दिल्ली से लगभग ग्यारह फीट की दुर्गा, महिषासुर, गणेश, कार्तिक, लक्ष्मी और सरस्वती की मूर्ति लाई गई हैं।
रविवार सुबह कोलकाता से आए पंडित सूरजकांत ने बताया कि कल्पारंभ दुर्गा पूजा उत्सव की शुरुआत छठे नवरात्र से की जाती है। इस अनुष्ठान में जल से भरे बर्तन में देवी दुर्गा का आह्वान किया जाता है। कलश को चावल के ढेर पर रखा जाता है और आम के पत्तों से बंधा एक नारियल कलश के ऊपर रखा जाता है।
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इसके बाद मंत्रों का उच्चारण कर देवी को मां दुर्गा पूजा के दौरान कलश में रहने के लिए आमंत्रित किया जाता है। वहीं बोधन समारोह षष्ठी की शाम को बेल्व वृक्ष पर एक दर्पण बांध दिया गया, इस दर्पण के माध्यम से देवी दुर्गा की मूर्ति प्रतिबिंबित होती है। रविवार शाम को पंडित सूरजकांत ने बेल्व पत्र की पूजा करवाई। श्रद्धालु भावना, सुमित विश्वास, रिंकी विश्वास ने बताया कि सुबह हुई पूजा के बाद और शाम को आरती के बाद मां दुर्गा के साथ सभी देवताओं और राक्षकों को अस्त्र-शस्त्र पहनाए गए।
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