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डाक्टरों का मिला साथ तो टीम ने दी कोरोना को मात
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कोरोना के युद्ध में डॉक्टर ही हमारे भगवान हैं, जो इस महामारी के मुंह से हमें सुरक्षित निकाल रहे हैं। इन्हीं के भरोसे तीन पॉजिटिव मरीजों ने कोरोना से सात दिनों तक लड़ाई लड़ी और अब कोरोना को हराकर सुरक्षित अपने घर लौट गए हैं। तीनों ही मरीजों ने डॉक्टरों को भगवान मानते हुए उनका शुक्रिया अदा किया और सभी से घर पर ही सुरक्षित रहने की अपील की। उन्होंने कहा कि मेडिकल कॉलेज के डायरेक्टर डॉ. जगदीश दुरेजा और डॉ. अभिनव समेत पूरी टीम ने उनका ख्याल रखा। इसके वे विशेष तौर पर आभारी हैं। रविवार को तीनों को कल्पना चावला राजकीय मेडिकल कॉलेज एवं कोविड-19 अस्पताल से डिस्चार्ज कर दिया गया। अब ये अगले 14 दिन तक होम क्वारंटीन का पालन करेंगे। डीसी निशांत कुमार यादव ने बताया कि अब जिले में केवल दो ही पॉजिटिव केस एक्टिव हैं। उन पर भी निगाह रखी जा रही है। उम्मीद है जल्द ही वे भी ठीक हो जाएंगे।
जानिए.. कोरोना से जंग जीतने वाले तीनों मरीजों की कहानी-
हेडिंग- साथ वाले रूम में थे बच्चे, फिर भी वीडियो कॉल से देखती थी
-मैं पूनम, मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल की इमरजेंसी में छह माह से स्टाफ नर्स हूं। पहले मरीज ज्ञान सिंह के संपर्क में आने के बाद चार तारीख को हमारा टेस्ट हुआ था तो रिपोर्ट पॉजिटिव आई। कोरोना पॉजिटिव आने के बाद छह अप्रैल को मुझे आईसोलेशन वार्ड में भर्ती किया गया था। मेरे साथ वाले रूम में मेरे पति राकेश, डेढ़ साल का बेटा और छह साल की बेटी भी थी। मैं उनसे मिल नहीं पाती थी, लेकिन वीडियो कॉल से देखती और बात करती थी।
संदेश : अब बाद में दो बार टेस्ट हुआ तो रिपोर्ट नेगटिव आई है। मेरे में कोरोना के कोई लक्षण नहीं दिखे। प्रशासन और अस्पताल प्रबंधन ने पूरा सहयोग दिया। मेरा ख्याल रखा। हर कोई मेरे पास आता भी था, सभी से अपील है कि घरों में रहें।
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पूरी टीम का मिला सहयोग, सुरक्षा उपकरण सभी को मिलने चाहिए
-मैं डॉ. अंजलि। मेडिकल कॉलेज के ईएनटी में कार्यरत हूं। मरीज ज्ञान सिंह का सैंपल लिया था। तीन अप्रैल को पता चला कि वे कोरोना पॉजिटिव हैं। तो चार को मेरा टेस्ट हुआ। रिपोर्ट पॉजिटिव आते ही छह अप्रैल को आईसोलेशन वार्ड में एडमिट किया गया। प्रशासन और अस्पताल प्रबंधन का पूरा सहयोग मिला। सभी ने ध्यान रखा। अब दो बार टेस्ट हुआ तो रिपोर्ट नेगटिव आई है।
संदेश : मुझे में कोविड-19 का कोई लक्षण नहीं दिखाई दिया। सभी अपना ध्यान रखें और सुरक्षित रहें। मरीजों की जांच के लिए फोर्थ क्लास कर्मचारी से डॉक्टर तक सभी को सुरक्षा उपकरण दिए जाने चाहिए। ताकि सभी सुरक्षित रहें। क्योंकि तीन तारीख तक तो मुझे भी नहीं पता था कि मेरी रिपोर्ट पॉजिटिव आएगी। हालांकि खुद को आईसोलेट तो किया था। लेकिन फिर भी सभी को संभलने की जरूरत है।
डॉक्टरों ने रखा पूरा ख्याल, मिली हर मदद
मैं संदीप कुमार, बिर्चपुर का रहने वाला हूं। चार अप्रैल को कोरोना पॉजिटिव पाए जाने पर कल्पना चावला राजकीय मेडिकल कॉलेज के आइसोलेशन वार्ड में भर्ती हुआ था। प्रशासन और डॉक्टरों की टीम का पूरा सहयोग मिला। मेरा पूरा ध्यान रखा गया। हर मदद मिली।
संदेश : मैं प्रशासन का आभारी हूं। जिन्होंने इस मुश्किल समय में मेरा ध्यान रखा और अच्छा बर्ताव किया। लोग घर पर रहें। इसी में सभी की भलाई है। क्योंकि घरों में रहेंगे तो हम सुरक्षित रहेंगे।
बहुत अच्छी बात है कि तीन मरीजों की रिपोर्ट दोबारा टेस्ट होने पर नेगेटिव आई है। लोग डरे नहीं। बस सहयोग करें। हम सभी मिलकर कोरोना को जरूर हराएंगे। उन्होंने स्पष्ट किया करनाल में भी टेस्ट हो रहे हैं। जो चंडीगढ़ में मरीज दाखिल हैं, वे कोरोना के मरीज नहीं थे। दूसरी बीमारी के कारण भर्ती थे, एहतियात के तौर पर ही उनके सैंपल लिए गए थे, जो कि नेगेटिव आए हैं।
-डॉ. अश्वनी आहुजा, सीएमओ करनाल।
तीनों मरीजों की दो बार रिपोर्ट नेगटिव आई है। नियम के अनुसार, अब वे पूरी तरह से ठीक हैं। इसलिए उन्हें अस्पताल से डिस्चार्ज कर घर भेज दिया है। अगले 14 दिन तक तीनों होम क्वारंटीन रहेंगे। मैं अस्पताल की पूरी टीम का धन्यवाद करता हूं, जिन्होंने मरीजों को स्वस्थ किया।
-निशांत कुमार यादव, डीसी करनाल।
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जानिए.. कोरोना से जंग जीतने वाले तीनों मरीजों की कहानी-
हेडिंग- साथ वाले रूम में थे बच्चे, फिर भी वीडियो कॉल से देखती थी
-मैं पूनम, मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल की इमरजेंसी में छह माह से स्टाफ नर्स हूं। पहले मरीज ज्ञान सिंह के संपर्क में आने के बाद चार तारीख को हमारा टेस्ट हुआ था तो रिपोर्ट पॉजिटिव आई। कोरोना पॉजिटिव आने के बाद छह अप्रैल को मुझे आईसोलेशन वार्ड में भर्ती किया गया था। मेरे साथ वाले रूम में मेरे पति राकेश, डेढ़ साल का बेटा और छह साल की बेटी भी थी। मैं उनसे मिल नहीं पाती थी, लेकिन वीडियो कॉल से देखती और बात करती थी।
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संदेश : अब बाद में दो बार टेस्ट हुआ तो रिपोर्ट नेगटिव आई है। मेरे में कोरोना के कोई लक्षण नहीं दिखे। प्रशासन और अस्पताल प्रबंधन ने पूरा सहयोग दिया। मेरा ख्याल रखा। हर कोई मेरे पास आता भी था, सभी से अपील है कि घरों में रहें।
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पूरी टीम का मिला सहयोग, सुरक्षा उपकरण सभी को मिलने चाहिए
-मैं डॉ. अंजलि। मेडिकल कॉलेज के ईएनटी में कार्यरत हूं। मरीज ज्ञान सिंह का सैंपल लिया था। तीन अप्रैल को पता चला कि वे कोरोना पॉजिटिव हैं। तो चार को मेरा टेस्ट हुआ। रिपोर्ट पॉजिटिव आते ही छह अप्रैल को आईसोलेशन वार्ड में एडमिट किया गया। प्रशासन और अस्पताल प्रबंधन का पूरा सहयोग मिला। सभी ने ध्यान रखा। अब दो बार टेस्ट हुआ तो रिपोर्ट नेगटिव आई है।
संदेश : मुझे में कोविड-19 का कोई लक्षण नहीं दिखाई दिया। सभी अपना ध्यान रखें और सुरक्षित रहें। मरीजों की जांच के लिए फोर्थ क्लास कर्मचारी से डॉक्टर तक सभी को सुरक्षा उपकरण दिए जाने चाहिए। ताकि सभी सुरक्षित रहें। क्योंकि तीन तारीख तक तो मुझे भी नहीं पता था कि मेरी रिपोर्ट पॉजिटिव आएगी। हालांकि खुद को आईसोलेट तो किया था। लेकिन फिर भी सभी को संभलने की जरूरत है।
डॉक्टरों ने रखा पूरा ख्याल, मिली हर मदद
मैं संदीप कुमार, बिर्चपुर का रहने वाला हूं। चार अप्रैल को कोरोना पॉजिटिव पाए जाने पर कल्पना चावला राजकीय मेडिकल कॉलेज के आइसोलेशन वार्ड में भर्ती हुआ था। प्रशासन और डॉक्टरों की टीम का पूरा सहयोग मिला। मेरा पूरा ध्यान रखा गया। हर मदद मिली।
संदेश : मैं प्रशासन का आभारी हूं। जिन्होंने इस मुश्किल समय में मेरा ध्यान रखा और अच्छा बर्ताव किया। लोग घर पर रहें। इसी में सभी की भलाई है। क्योंकि घरों में रहेंगे तो हम सुरक्षित रहेंगे।
बहुत अच्छी बात है कि तीन मरीजों की रिपोर्ट दोबारा टेस्ट होने पर नेगेटिव आई है। लोग डरे नहीं। बस सहयोग करें। हम सभी मिलकर कोरोना को जरूर हराएंगे। उन्होंने स्पष्ट किया करनाल में भी टेस्ट हो रहे हैं। जो चंडीगढ़ में मरीज दाखिल हैं, वे कोरोना के मरीज नहीं थे। दूसरी बीमारी के कारण भर्ती थे, एहतियात के तौर पर ही उनके सैंपल लिए गए थे, जो कि नेगेटिव आए हैं।
-डॉ. अश्वनी आहुजा, सीएमओ करनाल।
तीनों मरीजों की दो बार रिपोर्ट नेगटिव आई है। नियम के अनुसार, अब वे पूरी तरह से ठीक हैं। इसलिए उन्हें अस्पताल से डिस्चार्ज कर घर भेज दिया है। अगले 14 दिन तक तीनों होम क्वारंटीन रहेंगे। मैं अस्पताल की पूरी टीम का धन्यवाद करता हूं, जिन्होंने मरीजों को स्वस्थ किया।
-निशांत कुमार यादव, डीसी करनाल।