{"_id":"6758d315abf3012f720f55d4","slug":"discussion-on-principles-of-learning-and-teaching-karnal-news-c-18-knl1008-536979-2024-12-11","type":"story","status":"publish","title_hn":"Karnal News: सीखने और सिखाने के सिंद्धांतों पर की चर्चा","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Karnal News: सीखने और सिखाने के सिंद्धांतों पर की चर्चा
विज्ञापन
इंद्री। निपुण हरियाणा मिशन की ओर से राजकीय मॉडल संस्कृति प्राथमिक विद्यालय में चल रही प्रशिक्षण कार्यशाला के दूसरे दिन प्रशिक्षक रीना, शैलजा, युगल किशोर मित्तल व गरिमा शर्मा ने सीखने सिखाने के सामान्य सिद्धांत एवं मान्यताओं पर चर्चा की।
खंड शिक्षा अधिकारी डॉ गुरनाम मंढान की अध्यक्षता में चल रही प्रशिक्षण कार्यशाला में निपुण हरियाणा मिशन के राज्य प्रकोष्ठ के सदस्य मोक्षित जैन व एफएलएन समन्वयक विपिन शर्मा पहुंचे। उन्होंने कहा कि सभी बच्चों में सीखने की समान रूप से संभावनाएं रहती है। उन्होंने कहा कि कक्षा कक्षा का सौहार्दपूर्ण वातावरण सीखने में मदद करता है। उन्होंने कहा कि रुचि पूर्ण तरीके से विषय वस्तु बच्चों के बीच में ले जाने से बच्चे सक्रिय तौर पर भागीदारी करते हैं। कक्षा कक्ष में शामिल होने से पूर्व बच्चों के पूर्व ज्ञान को भी नजर अंदाज नहीं किया जा सकता। उन्होंने कहा कि बाल वाटिका में शामिल होते हुए बच्चे अपनी बोली भाषा का प्रयोग करते हैं, इसलिए उनकी बोली को महत्व दिया जाना चाहिए सीखने सिखाने की प्रक्रिया में शामिल हो सके।
कार्यशाला में प्रशिक्षक शैलजा गुप्ता और युगल किशोर मित्तल ने शिक्षक के लिए पंचपदी प्रक्रिया के पांच चरणों रोशनी डालते हुए कहा कि परिचय, अवधारणात्मक समझ, अभ्यास, अनुप्रयोग तथा समझ का विस्तार का वर्णन एनसीएफ-एफएस में किया गया है। रीना कंबोज व गरिमा शर्मा ने प्रशिक्षण के दौरान कहा कि शिक्षक बच्चों के पूर्व ज्ञान और अनुभव को जोड़कर एक नई अवधारणा का परिचय देते हैं।
विज्ञापन
विज्ञापन
खंड शिक्षा अधिकारी डॉ गुरनाम मंढान की अध्यक्षता में चल रही प्रशिक्षण कार्यशाला में निपुण हरियाणा मिशन के राज्य प्रकोष्ठ के सदस्य मोक्षित जैन व एफएलएन समन्वयक विपिन शर्मा पहुंचे। उन्होंने कहा कि सभी बच्चों में सीखने की समान रूप से संभावनाएं रहती है। उन्होंने कहा कि कक्षा कक्षा का सौहार्दपूर्ण वातावरण सीखने में मदद करता है। उन्होंने कहा कि रुचि पूर्ण तरीके से विषय वस्तु बच्चों के बीच में ले जाने से बच्चे सक्रिय तौर पर भागीदारी करते हैं। कक्षा कक्ष में शामिल होने से पूर्व बच्चों के पूर्व ज्ञान को भी नजर अंदाज नहीं किया जा सकता। उन्होंने कहा कि बाल वाटिका में शामिल होते हुए बच्चे अपनी बोली भाषा का प्रयोग करते हैं, इसलिए उनकी बोली को महत्व दिया जाना चाहिए सीखने सिखाने की प्रक्रिया में शामिल हो सके।
विज्ञापन
कार्यशाला में प्रशिक्षक शैलजा गुप्ता और युगल किशोर मित्तल ने शिक्षक के लिए पंचपदी प्रक्रिया के पांच चरणों रोशनी डालते हुए कहा कि परिचय, अवधारणात्मक समझ, अभ्यास, अनुप्रयोग तथा समझ का विस्तार का वर्णन एनसीएफ-एफएस में किया गया है। रीना कंबोज व गरिमा शर्मा ने प्रशिक्षण के दौरान कहा कि शिक्षक बच्चों के पूर्व ज्ञान और अनुभव को जोड़कर एक नई अवधारणा का परिचय देते हैं।
विज्ञापन