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Karnal News: दिव्यांगता से नहीं मानी हार, सरकार से पेंशन की गुहार
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संवाद न्यूज एजेंसी
यमुनानगर। पंखों से कुछ नहीं होता, हौसलों से उड़ान होती है...इसे साबित कर रही है यमुनानगर की दशमेश कॉलोनी निवासी दिव्यांग कुसुम, जो अपने बच्चे का भविष्य सुरक्षित करने के लिए हर मुश्किल से लड़ने को तैयार है। मुश्किल परिस्थितियों में भी उसने हार नहीं मानी और दिव्यांगता के बावजूद आज ई-रिक्शा चलाकर अपने बच्चे को सपनों को उड़ान देने में जुटी है। साथ से भी उसने दिव्यांग पेंशन की गुहार लगाई है।
कुसुम जब तीसरी कक्षा में थी तो उसके माता-पिता का देहांत हो चुका था। आर्थिक तंगी के बीच रिश्तेदारों और शुभचिंतकों की मदद से जैसे-तैसे उसने 10वीं की परीक्षा पास की। सैलून में काम करने के साथ ही 12वीं पास की। फिर दो साल के लिए दिल्ली जाकर अस्पताल के ऑपरेशन थियेटर में ड्रेसिंग का काम भी सीखा।
वापस आकर कुसुम ने फिर सैलून में काम कर गुजर बसर किया। 2024 में एक मंदिर में उसने लव मैरिज की। पति भी फैक्ट्री में काम करने के साथ ई-रिक्शा चलाता है। शादी के बाद भी कुसुम का संघर्ष खत्म नहीं हुआ और आर्थिक तंगी के कारण उसने भी पति के साथ ई-रिक्शा चलाने का निर्णय लिया।
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कुसुम का एक ही लड़का है जो कि छछरौली के बालकुंज में चौथी कक्षा में पढ़ता है। कुसुम का सपना है कि उसे बीएससी करवाकर इंजीनियर बनाना है। विदित हो कि 2021 में एक सड़क हादसे में कुसुम की टांग और कूल्हे पर गंभीर चोट आने की वजह से ज्यादा चल फिर नहीं सकती। कुसुम ने सरकार से मांग कि है कि उसकी पेंशन लगाई जाए, जिससे उसकी आर्थिक स्थिति सुधर सकती है।
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यमुनानगर। पंखों से कुछ नहीं होता, हौसलों से उड़ान होती है...इसे साबित कर रही है यमुनानगर की दशमेश कॉलोनी निवासी दिव्यांग कुसुम, जो अपने बच्चे का भविष्य सुरक्षित करने के लिए हर मुश्किल से लड़ने को तैयार है। मुश्किल परिस्थितियों में भी उसने हार नहीं मानी और दिव्यांगता के बावजूद आज ई-रिक्शा चलाकर अपने बच्चे को सपनों को उड़ान देने में जुटी है। साथ से भी उसने दिव्यांग पेंशन की गुहार लगाई है।
कुसुम जब तीसरी कक्षा में थी तो उसके माता-पिता का देहांत हो चुका था। आर्थिक तंगी के बीच रिश्तेदारों और शुभचिंतकों की मदद से जैसे-तैसे उसने 10वीं की परीक्षा पास की। सैलून में काम करने के साथ ही 12वीं पास की। फिर दो साल के लिए दिल्ली जाकर अस्पताल के ऑपरेशन थियेटर में ड्रेसिंग का काम भी सीखा।
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वापस आकर कुसुम ने फिर सैलून में काम कर गुजर बसर किया। 2024 में एक मंदिर में उसने लव मैरिज की। पति भी फैक्ट्री में काम करने के साथ ई-रिक्शा चलाता है। शादी के बाद भी कुसुम का संघर्ष खत्म नहीं हुआ और आर्थिक तंगी के कारण उसने भी पति के साथ ई-रिक्शा चलाने का निर्णय लिया।
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कुसुम का एक ही लड़का है जो कि छछरौली के बालकुंज में चौथी कक्षा में पढ़ता है। कुसुम का सपना है कि उसे बीएससी करवाकर इंजीनियर बनाना है। विदित हो कि 2021 में एक सड़क हादसे में कुसुम की टांग और कूल्हे पर गंभीर चोट आने की वजह से ज्यादा चल फिर नहीं सकती। कुसुम ने सरकार से मांग कि है कि उसकी पेंशन लगाई जाए, जिससे उसकी आर्थिक स्थिति सुधर सकती है।