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Karnal News: यूपीएसी में चार बार असफल होने पर भी हार नहीं मानी, पांचवें प्रयास में मिली सफलता
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यूपीएसी में चार बार असफल होने पर भी हार नहीं मानी, पांचवें प्रयास में मिली सफलता
यूपीएसी में चार बार असफल होने पर भी हार नहीं मानी, पांचवें प्रयास में मिली सफलता
- सपना पूरा करने के लिए 28वें रैंक पर मिली सीएटीएफ सहायक कमांडेंट की नौकरी भी छोड़ी
- करनाल के मनस्वी ने हासिल की 101 रैंक, पिता नैक टीम के चेयरमैन व मां राजकीय कॉलेज की हैं प्रिंसिपल
गगन तलवार
करनाल। बचपन में आईएएस और आईपीएस अधिकारी को कार्यक्रम में देखा और उनके जैसा बनने का सपना देख लिया। इस मंजिल तक पहुंचने के लिए लगातार मेहनत की और आज मुकाम हासिल किया है। यह कहना है कर्ण नगरी के इंजीनियर बेटे मनस्वी शर्मा का, जिन्होंने 101 रैंक के साथ यूपीएससी की परीक्षा पास की है। अपने सपने को पूरा करने के लिए उन्होंने न केवल इंजीनियर की नौकरी छोड़ी बल्कि सीएटीएफ (सेंट्रल आर्म पुलिस फोर्स) के सहायक कमांडेंट की नौकरी भी ज्वाइन नहीं की। लगातार चार बार असफल होने के बाद भी हार नहीं मानी और अब पांचवें प्रयास में सफलता पाई।
सेक्टर-9 निवासी मनस्वी शर्मा के पिता डॉ. राधेश्याम शर्मा सीडीएलयू सिरसा और जीजेयू हिसार के वाइस चांसलर रहे, जबकि वर्तमान में नैक टीम के चेयरमैन हैं। वहीं मां डॉ. रेखा शर्मा जिला उच्च शिक्षा अधिकारी रहीं और वर्तमान में तरावड़ी के राजकीय कॉलेज की प्रिंसिपल हैं। 28 वर्षीय मनस्वी शर्मा ने बताया कि उन्होंने अब से पहले चार बार यूपीएससी और एक बार एचसीएस की परीक्षा भी दी। यूपीएससी की परीक्षा के दौरान दो बार मेन्स और दो बार साक्षात्कार में कुछ अंकों से असफल हुए। उन्होंने बताया कि जब वे स्कूल में पढ़ाई करते थे, उस समय पिता करनाल के राजकीय पीजी कॉलेज में प्रिंसिपल थे। उनके साथ कई बार बड़े कार्यक्रमों में भी जाना होता था। वहां आईएएस या आईपीएस अधिकारियों की बातों ने उन्हें प्रभावित किया। इससे प्रेरित होकर उन्होंने यूपीएससी की तैयारी करने की ठानी। उन्होंने अपनी सफलता का श्रेय अपने परिवार, गुरुजनों और दोस्तों को दिया है। ब्यूरो
- डेंटिस्ट बहन बनी प्रेरणा, सबसे पहले उसे कॉल कर दी सूचना
वर्तमान में दिल्ली में रह रहे मनस्वी ने बताया कि रिजल्ट आने पर सबसे पहला कॉल भी उन्होंने अपनी बहन को किया। इस दौरान दोनों की आंखों से खुशी की आंसू छलके। दूसरा कॉल माता-पिता को किया। कॉलेज प्रिंसिपल जैसे बड़े पद पर रहे माता-पिता ने उन्हें हमेशा अच्छे से पढ़ने के लिए प्रेरित किया। इसके साथ ही उनकी बड़ी बहन डॉ. अपूर्वा शर्मा का भी हमेशा उन्हें सहयोग रहा। चार बार असफल होने पर गुरुग्राम में रह रही डेंस्टिट बहन और जीजा डॉ. पुलकित ने हमेशा नई सीख लेने के लिए प्रेरित किया।
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- प्राथमिक शिक्षा में सुधार करना रहेगा प्राथमिकता
मनस्वी का कहना है कि उनका परिवार शिक्षा क्षेत्र से जुड़ा है। यदि वे आईएएस अधिकारी बनते हैं तो प्राथमिक शिक्षा व्यवस्था में सुधार करना उनकी प्राथमिकता रहेगा। उनका कहना है कि हरियाणा में एनरोलमेंट तो बढ़ा है पर विद्यार्थी बीच में पढ़ाई छोड़ते हैं। इसका कारण तलाश कर सुधार लाएंगे। सरकारी स्कूल का पांचवीं में पढ़ने वाला बच्चा भी कई बार लिख नहीं पाता है, इसलिए एक्सपीरियंस या डिस्कवरी लर्निंग पर फोकस करेंगे, ताकि बच्चा जो पढ़े और सीखे, उसे हमेशा याद रखे।
बाजी कभी भी पलट सकती है, भगवान और खुद पर भरोसा रख मेहनत करें
प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे युवाओं के लिए मनस्वी का कहना है कि असफलता से हार नहीं माननी चाहिए। बाजी कभी भी पलट सकती है, इसलिए हमेशा तैयार रहें। भगवान और खुद पर भरोसा रखते हुए मेहनत करें। काॅन्वेंट स्कूल से 12वीं तक की पढ़ाई के बाद थापर यूनिवर्सिटी पटियाला से उन्होंने मैकेनिकल इंजीनियरिंग की। कैंपस प्लेसमेंट के दौरान ही उनकी मारुति सुजूकी में सहायक प्रबंधक के पद पर नौकरी लग गई थी। बाद में नौकरी को छोड़कर यूपीएससी की तैयारी शुरू कर दी। वर्तमान में परीक्षा देने के बाद एड टेक सेक्टर दिल्ली में नौकरी कर रहे हैं। 2019 में ऑल इंडिया 28 रैंक से सहायक कमांडेंट की परीक्षा पास की थी, मगर आईएएस बनने के लिए यह नौकरी ज्वाइन नहीं की।
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- सपना पूरा करने के लिए 28वें रैंक पर मिली सीएटीएफ सहायक कमांडेंट की नौकरी भी छोड़ी
- करनाल के मनस्वी ने हासिल की 101 रैंक, पिता नैक टीम के चेयरमैन व मां राजकीय कॉलेज की हैं प्रिंसिपल
गगन तलवार
करनाल। बचपन में आईएएस और आईपीएस अधिकारी को कार्यक्रम में देखा और उनके जैसा बनने का सपना देख लिया। इस मंजिल तक पहुंचने के लिए लगातार मेहनत की और आज मुकाम हासिल किया है। यह कहना है कर्ण नगरी के इंजीनियर बेटे मनस्वी शर्मा का, जिन्होंने 101 रैंक के साथ यूपीएससी की परीक्षा पास की है। अपने सपने को पूरा करने के लिए उन्होंने न केवल इंजीनियर की नौकरी छोड़ी बल्कि सीएटीएफ (सेंट्रल आर्म पुलिस फोर्स) के सहायक कमांडेंट की नौकरी भी ज्वाइन नहीं की। लगातार चार बार असफल होने के बाद भी हार नहीं मानी और अब पांचवें प्रयास में सफलता पाई।
सेक्टर-9 निवासी मनस्वी शर्मा के पिता डॉ. राधेश्याम शर्मा सीडीएलयू सिरसा और जीजेयू हिसार के वाइस चांसलर रहे, जबकि वर्तमान में नैक टीम के चेयरमैन हैं। वहीं मां डॉ. रेखा शर्मा जिला उच्च शिक्षा अधिकारी रहीं और वर्तमान में तरावड़ी के राजकीय कॉलेज की प्रिंसिपल हैं। 28 वर्षीय मनस्वी शर्मा ने बताया कि उन्होंने अब से पहले चार बार यूपीएससी और एक बार एचसीएस की परीक्षा भी दी। यूपीएससी की परीक्षा के दौरान दो बार मेन्स और दो बार साक्षात्कार में कुछ अंकों से असफल हुए। उन्होंने बताया कि जब वे स्कूल में पढ़ाई करते थे, उस समय पिता करनाल के राजकीय पीजी कॉलेज में प्रिंसिपल थे। उनके साथ कई बार बड़े कार्यक्रमों में भी जाना होता था। वहां आईएएस या आईपीएस अधिकारियों की बातों ने उन्हें प्रभावित किया। इससे प्रेरित होकर उन्होंने यूपीएससी की तैयारी करने की ठानी। उन्होंने अपनी सफलता का श्रेय अपने परिवार, गुरुजनों और दोस्तों को दिया है। ब्यूरो
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- डेंटिस्ट बहन बनी प्रेरणा, सबसे पहले उसे कॉल कर दी सूचना
वर्तमान में दिल्ली में रह रहे मनस्वी ने बताया कि रिजल्ट आने पर सबसे पहला कॉल भी उन्होंने अपनी बहन को किया। इस दौरान दोनों की आंखों से खुशी की आंसू छलके। दूसरा कॉल माता-पिता को किया। कॉलेज प्रिंसिपल जैसे बड़े पद पर रहे माता-पिता ने उन्हें हमेशा अच्छे से पढ़ने के लिए प्रेरित किया। इसके साथ ही उनकी बड़ी बहन डॉ. अपूर्वा शर्मा का भी हमेशा उन्हें सहयोग रहा। चार बार असफल होने पर गुरुग्राम में रह रही डेंस्टिट बहन और जीजा डॉ. पुलकित ने हमेशा नई सीख लेने के लिए प्रेरित किया।
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- प्राथमिक शिक्षा में सुधार करना रहेगा प्राथमिकता
मनस्वी का कहना है कि उनका परिवार शिक्षा क्षेत्र से जुड़ा है। यदि वे आईएएस अधिकारी बनते हैं तो प्राथमिक शिक्षा व्यवस्था में सुधार करना उनकी प्राथमिकता रहेगा। उनका कहना है कि हरियाणा में एनरोलमेंट तो बढ़ा है पर विद्यार्थी बीच में पढ़ाई छोड़ते हैं। इसका कारण तलाश कर सुधार लाएंगे। सरकारी स्कूल का पांचवीं में पढ़ने वाला बच्चा भी कई बार लिख नहीं पाता है, इसलिए एक्सपीरियंस या डिस्कवरी लर्निंग पर फोकस करेंगे, ताकि बच्चा जो पढ़े और सीखे, उसे हमेशा याद रखे।
बाजी कभी भी पलट सकती है, भगवान और खुद पर भरोसा रख मेहनत करें
प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे युवाओं के लिए मनस्वी का कहना है कि असफलता से हार नहीं माननी चाहिए। बाजी कभी भी पलट सकती है, इसलिए हमेशा तैयार रहें। भगवान और खुद पर भरोसा रखते हुए मेहनत करें। काॅन्वेंट स्कूल से 12वीं तक की पढ़ाई के बाद थापर यूनिवर्सिटी पटियाला से उन्होंने मैकेनिकल इंजीनियरिंग की। कैंपस प्लेसमेंट के दौरान ही उनकी मारुति सुजूकी में सहायक प्रबंधक के पद पर नौकरी लग गई थी। बाद में नौकरी को छोड़कर यूपीएससी की तैयारी शुरू कर दी। वर्तमान में परीक्षा देने के बाद एड टेक सेक्टर दिल्ली में नौकरी कर रहे हैं। 2019 में ऑल इंडिया 28 रैंक से सहायक कमांडेंट की परीक्षा पास की थी, मगर आईएएस बनने के लिए यह नौकरी ज्वाइन नहीं की।