{"_id":"5f18ad0d8ebc3e63a47f2b06","slug":"dfsc-sent-recovery-report-to-centre-karnal-news-knl38179986","type":"story","status":"publish","title_hn":"चावल हेराफेरी मामला : डीएफएससी ने केंद्र को भेजी रिकवरी रिपोर्ट","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
चावल हेराफेरी मामला : डीएफएससी ने केंद्र को भेजी रिकवरी रिपोर्ट
विज्ञापन
चावल हेराफेरी मामले में जिले के 108 राइस मिलों पर बकाया 11,66,340 क्विंटल चावल की आपूर्ति के लिए लिखित में समय मांगने के बावजूद केंद्र सरकार ने अभी राइस मिलों को और समय नहीं दिया है। खाद्य एवं आपूर्ति विभाग हरियाणा ने केंद्र सरकार को 2019 में चावल आपूर्ति की रिपोर्ट भेज दी है। जिसमें कहा गया है कि पिछले साल पूरे हरियाणा राज्य में 1300 राइस मिलर्स के पास चावल की शॉर्टेज पाई गई थी, जिनसे करीब 76 करोड़ रुपये की वसूली की गई थी। यह रिपोर्ट भेजे जाने के बाद राइस मिलर्स को वीरवार या शुक्रवार तक और समय मिलने की उम्मीद है। दूसरी ओर हरियाणा राइस मिलर्स एसोसिएशन ने चावल की आपूर्ति नहीं करने वाले राइस मिलर्स की मदद करने से अपने हाथ खींच लिए हैं।
हरियाणा राइस मिलर्स एसोसिएशन व राइस मिलर्स से जुड़ी अन्य यूनियनों को जब लगा कि निर्धारित समय तक राज्य के सैकड़ों राइस मिलर्स सीएमआर का चावल नहीं दे सकेंगे तो एसोसिएशन ने पहले ही और समय देने की मांग तेज कर दी थी। हुआ भी ऐसा ही, करनाल जिले के भी 108 राइस मिल 11.66 लाख क्विंटल चावल नहीं दे सके। डीएफएससी मुख्यालय चंडीगढ़ ने भी 13 जुलाई को ही केंद्रीय खाद्य एवं आपूर्ति मंत्रालय को राइस मिलर्स को और समय देने की सिफारिश भेज दी लेकिन केंद्र ने इस पर पिछले साल की रिपोर्ट तलब कर ली। राइस मिलर्स से व्यक्तिगत तौर पर प्रार्थना पत्र लेने को भी कहा। खाद्य एवं आपूर्ति विभाग के डिप्टी डायरेक्टर डा. घनश्याम दास ने बताया कि केंद्र सरकार ने जो रिपोर्ट मांगी थी, वह भेज दी है। इसमें 2019 में 1300 राइस मिलों से चावल नहीं दे पाने की स्थिति में 76 करोड़ रुपये की ब्याज सहित वसूली करने की बात लिखी है। रिपोर्ट जाने के बाद अब केंद्र सरकार राइस मिलों को और समय देने पर विचार कर सकती है, इस कारण यह उम्मीद की जा सकती है कि एक दो दिन में समय बढ़ाया जा सकता है। इधर, सूत्रों का कहना है कि केंद्र सरकार ने शायद यही देखने के लिए पिछले साल की रिपोर्ट तलब की थी कि राइस मिलर्स चावल आपूर्ति करने के प्रति कितने गंभीर हैं। यदि केंद्र ने पिछले रिकार्ड को गंभीरता से लिया तो शायद और समय देने में सरकार हिचकिचा सकती है। हालांकि हरियाणा राइस मिलर्स एसोसिएशन के सीनियर वाइस प्रेसीडेंट विनोद कुमार गोयल ने बताया कि डीएफएससी ने मांगी गई पिछले साल की रिपोर्ट भेज दी है, राइस मिलर्स ने लिखित में भी प्रार्थना पत्र दे दिए हैं, अब केंद्र सरकार से वीरवार या शुक्रवार तक राइस मिलर्स को चावल की आपूर्ति करने के लिए 15 सितंबर या फिर 30 अगस्त तक का समय मिल सकता है। सभी राइस मिलर्स पूरी ईमानदारी से चावल की शतप्रतिशत आपूर्ति करेंगे।
चावल देने में इसलिए रुचि नहीं लेते राइस मिलर्स
चावल आपूर्ति न करने पर भी राइस मिल मुनाफे में रहते हैं। यदि वह चावल की आपूर्ति देते हैं और यूपी आदि से पीडीएस का चावल मंगाते हैं तो यह चावल उन्हें 2050 रुपये क्विंटल मिलता है, जो भाड़ा आदि लगाकर 2100 रुपये प्रति क्विंटल मिल जाता है। जबकि डेढ़ क्विंटल धान के बदले एक क्विंटल चावल देना होता है। यानी 2800 रुपये का धान लेकर 2100 रुपये का चावल देना होता है। कुल मिलाकर 700 रुपये प्रति क्विंटल बच जाते हैं। साथ ही दस रुपये प्रति क्विंटल कुटाई भी मिलती है। यदि नहीं देते हैं तो भी डीएफएससी के रेट से वसूली होती है, 12 फीसदी ब्याज के साथ तो भी राइस मिलर्स फायदे में रहते हैं। यही कारण है कि राइस मिलर्स धान तो लेते हैं लेकिन चावल देने में अधिक रुचि नहीं दिखाते हैं। फिलहाल तो इस साल फिजिकल वेरीफिकेशन में जिन 77 राइस मिलों में चावल व धान की उपलब्धता कम मिली है, उनके खिलाफ कार्रवाई अब चंडीगढ़ मुख्यालय से ही होनी है।
विज्ञापन
चावल न देने वाले मिलर्स का साथ नहीं देगी एसोसिएशन
हरियाणा राइस मिलर्स एसोसिएशन, सीएमआर का चावल आपूर्ति न करने की पक्षधर नहीं है। लॉकडाउन, बारिश, लेबर न मिलने, ट्रांसपोर्ट न मिलने आदि कई कारणों से तय समय पर चावल की आपूर्ति नहीं हो सकी है, लेकिन अब और समय मिला तो सभी पूरा चावल दे देंगे, यदि कोई राइस मिलर्स सीएमआर चावल की आपूर्ति नहीं करता है तो एसोसिएशन उसका साथ नहीं देगी। फिर सरकार जैसे चाहे वैसे उससे चावल या उसकी कीमत की रिकवरी कर सकती है।
-विनोद कुमार गोयल, सीनियर वाइस प्रेसीडेंट हरियाणा राइस मिलर्स एसोसिएशन
विज्ञापन
हरियाणा राइस मिलर्स एसोसिएशन व राइस मिलर्स से जुड़ी अन्य यूनियनों को जब लगा कि निर्धारित समय तक राज्य के सैकड़ों राइस मिलर्स सीएमआर का चावल नहीं दे सकेंगे तो एसोसिएशन ने पहले ही और समय देने की मांग तेज कर दी थी। हुआ भी ऐसा ही, करनाल जिले के भी 108 राइस मिल 11.66 लाख क्विंटल चावल नहीं दे सके। डीएफएससी मुख्यालय चंडीगढ़ ने भी 13 जुलाई को ही केंद्रीय खाद्य एवं आपूर्ति मंत्रालय को राइस मिलर्स को और समय देने की सिफारिश भेज दी लेकिन केंद्र ने इस पर पिछले साल की रिपोर्ट तलब कर ली। राइस मिलर्स से व्यक्तिगत तौर पर प्रार्थना पत्र लेने को भी कहा। खाद्य एवं आपूर्ति विभाग के डिप्टी डायरेक्टर डा. घनश्याम दास ने बताया कि केंद्र सरकार ने जो रिपोर्ट मांगी थी, वह भेज दी है। इसमें 2019 में 1300 राइस मिलों से चावल नहीं दे पाने की स्थिति में 76 करोड़ रुपये की ब्याज सहित वसूली करने की बात लिखी है। रिपोर्ट जाने के बाद अब केंद्र सरकार राइस मिलों को और समय देने पर विचार कर सकती है, इस कारण यह उम्मीद की जा सकती है कि एक दो दिन में समय बढ़ाया जा सकता है। इधर, सूत्रों का कहना है कि केंद्र सरकार ने शायद यही देखने के लिए पिछले साल की रिपोर्ट तलब की थी कि राइस मिलर्स चावल आपूर्ति करने के प्रति कितने गंभीर हैं। यदि केंद्र ने पिछले रिकार्ड को गंभीरता से लिया तो शायद और समय देने में सरकार हिचकिचा सकती है। हालांकि हरियाणा राइस मिलर्स एसोसिएशन के सीनियर वाइस प्रेसीडेंट विनोद कुमार गोयल ने बताया कि डीएफएससी ने मांगी गई पिछले साल की रिपोर्ट भेज दी है, राइस मिलर्स ने लिखित में भी प्रार्थना पत्र दे दिए हैं, अब केंद्र सरकार से वीरवार या शुक्रवार तक राइस मिलर्स को चावल की आपूर्ति करने के लिए 15 सितंबर या फिर 30 अगस्त तक का समय मिल सकता है। सभी राइस मिलर्स पूरी ईमानदारी से चावल की शतप्रतिशत आपूर्ति करेंगे।
विज्ञापन
चावल देने में इसलिए रुचि नहीं लेते राइस मिलर्स
चावल आपूर्ति न करने पर भी राइस मिल मुनाफे में रहते हैं। यदि वह चावल की आपूर्ति देते हैं और यूपी आदि से पीडीएस का चावल मंगाते हैं तो यह चावल उन्हें 2050 रुपये क्विंटल मिलता है, जो भाड़ा आदि लगाकर 2100 रुपये प्रति क्विंटल मिल जाता है। जबकि डेढ़ क्विंटल धान के बदले एक क्विंटल चावल देना होता है। यानी 2800 रुपये का धान लेकर 2100 रुपये का चावल देना होता है। कुल मिलाकर 700 रुपये प्रति क्विंटल बच जाते हैं। साथ ही दस रुपये प्रति क्विंटल कुटाई भी मिलती है। यदि नहीं देते हैं तो भी डीएफएससी के रेट से वसूली होती है, 12 फीसदी ब्याज के साथ तो भी राइस मिलर्स फायदे में रहते हैं। यही कारण है कि राइस मिलर्स धान तो लेते हैं लेकिन चावल देने में अधिक रुचि नहीं दिखाते हैं। फिलहाल तो इस साल फिजिकल वेरीफिकेशन में जिन 77 राइस मिलों में चावल व धान की उपलब्धता कम मिली है, उनके खिलाफ कार्रवाई अब चंडीगढ़ मुख्यालय से ही होनी है।
विज्ञापन
चावल न देने वाले मिलर्स का साथ नहीं देगी एसोसिएशन
हरियाणा राइस मिलर्स एसोसिएशन, सीएमआर का चावल आपूर्ति न करने की पक्षधर नहीं है। लॉकडाउन, बारिश, लेबर न मिलने, ट्रांसपोर्ट न मिलने आदि कई कारणों से तय समय पर चावल की आपूर्ति नहीं हो सकी है, लेकिन अब और समय मिला तो सभी पूरा चावल दे देंगे, यदि कोई राइस मिलर्स सीएमआर चावल की आपूर्ति नहीं करता है तो एसोसिएशन उसका साथ नहीं देगी। फिर सरकार जैसे चाहे वैसे उससे चावल या उसकी कीमत की रिकवरी कर सकती है।
-विनोद कुमार गोयल, सीनियर वाइस प्रेसीडेंट हरियाणा राइस मिलर्स एसोसिएशन