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विकास कार्यों को मिलेगी गति, 50 एकड़ में बनेगा हर्वल पार्क
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विकास कार्यों को गति देने और शहर के कायाकल्प के लिए नगर निगम ने पूरी तैयारी कर ली है। इसके तहत निगमायुक्त नरेश नरवाल ने विभागवार विकास कार्यों, जिम्मेदारियों, उपलब्धियों, आगामी योजनाओं, उनके क्रियान्वयन पर आधारित बैठकों की शुरुआत कर दी है। इसमें उपब्धता के आधार पर विकास कार्य करने की तैयारी है।
अभी नगर निगम के पास 2200 एकड़ खाली जमीन है, इसमें से 50 एकड़ जमीन को चिन्हित कर वहां ऑक्सी वन व हर्बल पार्क विकसित किया जाएगा। स्लम बस्तियों में सुधार की योजनाओं को गंभीरता के साथ लागू करने को कहा है। आईटीआई चौक पर शीरोरूम के साथ एक पुरुष शौचालय, जिसमें पोटा केबिन शौचालय रखवाने को भी कहा है। साथ ही स्ट्रीट लाइट, जलापूर्ति व मल निकासी, गरुग्राम की तर्ज पर आईसीसीसी से कनेक्ट कर ऐसी सेवाओं को स्मार्ट सिस्टम में लाने की तैयारी शुरू कर दी है।
निगमायुक्त ने इंजीनियरिंग विंग के साथ बुधवार को पहली बैठक में कई योजनाओं को खंगाला। व्यस्त बाजारों में वाहनों की भीड़ कम करने के लिए पार्किंग की समस्या पर मंथन किया। कालीदास रंगशाला को सांस्कृतिक गतिविधियां करने लायक बनाने को कहा। साथ ही निगम के 14 गांवों में 23 तालाब हैं, जिन्हें विकसित करने, सड़कों पर भटकते पशुओं को पकड़कर गोशाला व नंदीशाला में पहुंचाने, बंदरों को पकड़ने के लिए शीघ्र टेंडर जारी करने को कहा।
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उन्होंने कहा कि शेखपुरा स्थित सोलिड वेस्ट प्लांट में लिगेसी वेस्ट के निस्तारण को अगले तीन महीनों में पूरा करके जीरो वेस्ट पर लेकर आएं। बैठक में संयुक्त निगमायुक्त गगनदीप सिंह, उप निगमायुक्त अरुण कुमार, कार्यकारी अधिकारी देवेन्द्र नरवाल, एडीए पुष्पा कुमारी सहित अन्य अधिकारी मौजूद रहे।
प्रजेंटेशन कर दिखाया क्षेत्र
संयुक्त निगमायुक्त गगनदीप सिंह ने पावर प्वाइंट प्रजेंटेशन के जरिये बताया कि चार लाख की आबादी को समेटे हुए नगर निगम का क्षेत्र 87.5 किलोमीटर में फैला है। अभी निगम के अधीन करीब 2200 एकड़ खाली जमीन है। 1949 में शहर में सिविक बॉडी के रूप में एक कमेटी बनाई गई थी। शहरीकरण की सुविधाओं को लेकर पहला कदम बढ़ाया गया। इसके बाद 1994 में यह नगर परिषद बना। 2010 में इसे नगर निगम का दर्जा मिला। अब निगमायुक्त ने खाली जमीन का सदुपयोग करने, चहारदीवारी बनाने, ऑक्सीवन, हर्वन पार्क बनाने के निर्देश दिए हैं।
112 प्लाटों में 70 पर काम शुरू
निगमायुक्त ने बताया कि निगम के प्रयासों से डेयरी शिफ्टिंग प्रोजेक्ट सिरे चढ़ रहा है। इसके तहत 112 डेयरी संचालकों को प्लॉट अलॉट किए गए थे, अब उनमें से 70 पर निर्माण कार्य करवाया जा रहा है। करीब 30 नए आवेदन भी आए हैं, उनके लिए जल्द ड्रॉ निकालकर प्लॉट अलॉट करें।
204 स्थानों पर विज्ञापन प्रदर्शित कर सकते हैं
उप निगमायुक्त अरुण कुमार ने बताया कि विज्ञापन प्रदर्शित करने के लिए शहर में 101 लोकेशन हैं। इसके अतिरिक्त 87 यूनिपोल हैं, जो डिवाइडर पर स्थित हैं और 16 सांझी साइकिल वाले साइकिल स्टैंड हैं। निगमायुक्त ने बताया कि सरकार द्वारा राज्य स्तर पर ही नगर निकायों के लिए विज्ञापन पॉलिसी बनाई जा रही है। इसके अनुसार यहां विज्ञापन की अनुमति होगी।
1.07 करोड़ के सापेक्ष वसूले 1.51 करोड़
डीएमसी ने बताया कि शहर में नगर निगम की 667 दुकाने हैं, इनमें 641 निगम की और 36 इंप्रूवमेंट की हैं, 6 सामुदायिक केंद्र हैं। वर्ष 2021-22 में एक करोड़ सात लाख रुपये की डिमांड के फलस्वरूप अब तक पिछले एरियर सहित एक करोड़ 51 लाख रुपये की वसूली की गई है। उप निगमायुक्त ने यह भी बताया कि दुकानो का किराया वसूलने के लिए ऑनलाइन रेंट मैनेजमेंट सिस्टम तैयार किया गया है, इससे रेंट वसूली का काम और आसान हो जाएगा।
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अभी नगर निगम के पास 2200 एकड़ खाली जमीन है, इसमें से 50 एकड़ जमीन को चिन्हित कर वहां ऑक्सी वन व हर्बल पार्क विकसित किया जाएगा। स्लम बस्तियों में सुधार की योजनाओं को गंभीरता के साथ लागू करने को कहा है। आईटीआई चौक पर शीरोरूम के साथ एक पुरुष शौचालय, जिसमें पोटा केबिन शौचालय रखवाने को भी कहा है। साथ ही स्ट्रीट लाइट, जलापूर्ति व मल निकासी, गरुग्राम की तर्ज पर आईसीसीसी से कनेक्ट कर ऐसी सेवाओं को स्मार्ट सिस्टम में लाने की तैयारी शुरू कर दी है।
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निगमायुक्त ने इंजीनियरिंग विंग के साथ बुधवार को पहली बैठक में कई योजनाओं को खंगाला। व्यस्त बाजारों में वाहनों की भीड़ कम करने के लिए पार्किंग की समस्या पर मंथन किया। कालीदास रंगशाला को सांस्कृतिक गतिविधियां करने लायक बनाने को कहा। साथ ही निगम के 14 गांवों में 23 तालाब हैं, जिन्हें विकसित करने, सड़कों पर भटकते पशुओं को पकड़कर गोशाला व नंदीशाला में पहुंचाने, बंदरों को पकड़ने के लिए शीघ्र टेंडर जारी करने को कहा।
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उन्होंने कहा कि शेखपुरा स्थित सोलिड वेस्ट प्लांट में लिगेसी वेस्ट के निस्तारण को अगले तीन महीनों में पूरा करके जीरो वेस्ट पर लेकर आएं। बैठक में संयुक्त निगमायुक्त गगनदीप सिंह, उप निगमायुक्त अरुण कुमार, कार्यकारी अधिकारी देवेन्द्र नरवाल, एडीए पुष्पा कुमारी सहित अन्य अधिकारी मौजूद रहे।
प्रजेंटेशन कर दिखाया क्षेत्र
संयुक्त निगमायुक्त गगनदीप सिंह ने पावर प्वाइंट प्रजेंटेशन के जरिये बताया कि चार लाख की आबादी को समेटे हुए नगर निगम का क्षेत्र 87.5 किलोमीटर में फैला है। अभी निगम के अधीन करीब 2200 एकड़ खाली जमीन है। 1949 में शहर में सिविक बॉडी के रूप में एक कमेटी बनाई गई थी। शहरीकरण की सुविधाओं को लेकर पहला कदम बढ़ाया गया। इसके बाद 1994 में यह नगर परिषद बना। 2010 में इसे नगर निगम का दर्जा मिला। अब निगमायुक्त ने खाली जमीन का सदुपयोग करने, चहारदीवारी बनाने, ऑक्सीवन, हर्वन पार्क बनाने के निर्देश दिए हैं।
112 प्लाटों में 70 पर काम शुरू
निगमायुक्त ने बताया कि निगम के प्रयासों से डेयरी शिफ्टिंग प्रोजेक्ट सिरे चढ़ रहा है। इसके तहत 112 डेयरी संचालकों को प्लॉट अलॉट किए गए थे, अब उनमें से 70 पर निर्माण कार्य करवाया जा रहा है। करीब 30 नए आवेदन भी आए हैं, उनके लिए जल्द ड्रॉ निकालकर प्लॉट अलॉट करें।
204 स्थानों पर विज्ञापन प्रदर्शित कर सकते हैं
उप निगमायुक्त अरुण कुमार ने बताया कि विज्ञापन प्रदर्शित करने के लिए शहर में 101 लोकेशन हैं। इसके अतिरिक्त 87 यूनिपोल हैं, जो डिवाइडर पर स्थित हैं और 16 सांझी साइकिल वाले साइकिल स्टैंड हैं। निगमायुक्त ने बताया कि सरकार द्वारा राज्य स्तर पर ही नगर निकायों के लिए विज्ञापन पॉलिसी बनाई जा रही है। इसके अनुसार यहां विज्ञापन की अनुमति होगी।
1.07 करोड़ के सापेक्ष वसूले 1.51 करोड़
डीएमसी ने बताया कि शहर में नगर निगम की 667 दुकाने हैं, इनमें 641 निगम की और 36 इंप्रूवमेंट की हैं, 6 सामुदायिक केंद्र हैं। वर्ष 2021-22 में एक करोड़ सात लाख रुपये की डिमांड के फलस्वरूप अब तक पिछले एरियर सहित एक करोड़ 51 लाख रुपये की वसूली की गई है। उप निगमायुक्त ने यह भी बताया कि दुकानो का किराया वसूलने के लिए ऑनलाइन रेंट मैनेजमेंट सिस्टम तैयार किया गया है, इससे रेंट वसूली का काम और आसान हो जाएगा।