{"_id":"67aa6a8f1129cc915f06dcb7","slug":"destitute-animals-will-be-used-in-electricity-generation-karnal-news-c-18-knl1008-578785-2025-02-11","type":"story","status":"publish","title_hn":"Karnal News: बेसहारा पशुओं का बिजली उत्पादन में होगा इस्तेमाल","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Karnal News: बेसहारा पशुओं का बिजली उत्पादन में होगा इस्तेमाल
विज्ञापन
- दो छात्राओं ने बनाया नंदीशाला मॉडल, विज्ञान प्रदर्शनी में मिला सम्मान
माई सिटी रिपोर्टर
करनाल। शहर के दयाल सिंह पब्लिक स्कूल की कक्षा 10वीं की विज्ञान की दो छात्राओं अक्षिका सिंह और रिदिमा रैली ने बेसहारा पशुओं को चला कर बिजली बनाने का नया मॉडल बनाया है। जिसे पिछले दिनों जेएमआईटी रादौर में आयोजित विज्ञान प्रदर्शनी में प्रदर्शित किया। जिसमें छात्राओं को सम्मानित किया गया था।
इन दिनों शहर से लेकर गांव तक बेसहारा पशुओं के घूमने और उनसे होने वाला नुकसान एक बड़ी समस्या है। कृषि में बैलों का उपयोग खत्म होने के बाद ये पशु एक समस्या बनते जा रहे हैं, क्योंकि इनका पालन कोई नहीं करना चाहता हैं। ऐसे में इन छात्राओं ने सड़कों से इन बेसहारा पशुओं को एकत्र करके बिजली बनाने में इनका उपयोग करने का एक खास मॉडल तैयार किया है। छात्रों का कहना है कि बेसहारा पशुओं को इकट्ठा करके नंदी शाला ले जाया जाए, जहां पर उनको चलाकर उनकी गतिज ऊर्जा को बिजली में परिवर्तित किया जा सकता है।
इस बिजली को बिजली चालित वाहनों को चार्ज करने के लिए प्रयोग में लाया जा सकेगा। नंदीशाला परियोजना के अंतर्गत गायों और नंदियों के माध्यम से बिजली उत्पन्न की जा सकती है। यह न केवल स्वच्छ ऊर्जा प्रदान करता है, बल्कि पर्यावरण को भी सुरक्षित रखता है। इसके अतिरिक्त इस बिजली को आसपास के एरिया में स्ट्रीट लाइट के लिए भी उपयोग किया जा सकता है। इस परियोजना से आवारा पशुओं के कारण होने वाले होने वाली दुर्घटनाओं को भी कम किया जा सकता है। बेसहारा पशुओं को भी एक बेहतर जीवन मिल सकता है।
विज्ञापन
इस मॉडल को छात्राओं ने 28 अगस्त 2024 को जेएमआईटी रादौर की विज्ञान प्रदर्शनी में प्रस्तुत किया था, जिसे काफी सराहना भी मिली। मॉडल ने तीसरा पुरस्कार भी जीता था। नगद पुरस्कार देकर भी सम्मानित किया गया। इस मॉडल का नाम नंदी शाला रखा गया है।
विज्ञापन
माई सिटी रिपोर्टर
करनाल। शहर के दयाल सिंह पब्लिक स्कूल की कक्षा 10वीं की विज्ञान की दो छात्राओं अक्षिका सिंह और रिदिमा रैली ने बेसहारा पशुओं को चला कर बिजली बनाने का नया मॉडल बनाया है। जिसे पिछले दिनों जेएमआईटी रादौर में आयोजित विज्ञान प्रदर्शनी में प्रदर्शित किया। जिसमें छात्राओं को सम्मानित किया गया था।
इन दिनों शहर से लेकर गांव तक बेसहारा पशुओं के घूमने और उनसे होने वाला नुकसान एक बड़ी समस्या है। कृषि में बैलों का उपयोग खत्म होने के बाद ये पशु एक समस्या बनते जा रहे हैं, क्योंकि इनका पालन कोई नहीं करना चाहता हैं। ऐसे में इन छात्राओं ने सड़कों से इन बेसहारा पशुओं को एकत्र करके बिजली बनाने में इनका उपयोग करने का एक खास मॉडल तैयार किया है। छात्रों का कहना है कि बेसहारा पशुओं को इकट्ठा करके नंदी शाला ले जाया जाए, जहां पर उनको चलाकर उनकी गतिज ऊर्जा को बिजली में परिवर्तित किया जा सकता है।
विज्ञापन
इस बिजली को बिजली चालित वाहनों को चार्ज करने के लिए प्रयोग में लाया जा सकेगा। नंदीशाला परियोजना के अंतर्गत गायों और नंदियों के माध्यम से बिजली उत्पन्न की जा सकती है। यह न केवल स्वच्छ ऊर्जा प्रदान करता है, बल्कि पर्यावरण को भी सुरक्षित रखता है। इसके अतिरिक्त इस बिजली को आसपास के एरिया में स्ट्रीट लाइट के लिए भी उपयोग किया जा सकता है। इस परियोजना से आवारा पशुओं के कारण होने वाले होने वाली दुर्घटनाओं को भी कम किया जा सकता है। बेसहारा पशुओं को भी एक बेहतर जीवन मिल सकता है।
विज्ञापन
इस मॉडल को छात्राओं ने 28 अगस्त 2024 को जेएमआईटी रादौर की विज्ञान प्रदर्शनी में प्रस्तुत किया था, जिसे काफी सराहना भी मिली। मॉडल ने तीसरा पुरस्कार भी जीता था। नगद पुरस्कार देकर भी सम्मानित किया गया। इस मॉडल का नाम नंदी शाला रखा गया है।