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डंकी रूट: सुगम सपने में कदम-कदम पर खतरा...जंगल का रास्ता, कंटेनरों में घर; अमेरिका में हर समय पकड़े जाने का डर
Sun, 02 Nov 2025 11:30 AM IST
शाहरुख खान
अमर उजाला नेटवर्क, करनाल
अमर उजाला नेटवर्क, करनाल
Published by: शाहरुख खान
Updated Sun, 02 Nov 2025 11:30 AM IST
सार
डिपोर्ट हुए युवाओं ने वहां कहानी बयां की है। युवाओं ने बताया कि अमेरिका में हर समय पकड़े जाने का डर रहता था। कंटेनरों में छिपकर समय बिताया।
एजेंट खाना देने, कॉल कराने के लिए प्रति मिनट के हिसाब से वसूली करते हैं।
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haryana youth deported
- फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
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विस्तार
डंकी रूट से अमेरिका पहुंचने और अच्छी जिंदगी बिताने की सोच दिमाग में है तो इसे निकाल दें, हकीकत इसके बिलकुल विपरीत है। भारत से निकलने के बाद डंकी रूट पर कदम-कदम पर खतरा है। अमेरिका पहुंचने तक हर रोज मन में यही डर रहता है कि कोई पूछताछ न करने लगे, पकड़ न ले। जिस रात तक कोई न पकड़े, बस वही दिन सुरक्षित कहा जा सकता है।
रास्ते की मुश्किलें, पल-पल पकड़े जाने का खतरा, डर के साये में सांस लेने से गहरा सदमा लगता है। जंगलों के रास्ते पहुंचने के बाद बड़ी दिक्कत तब है काम मिले या न मिले गोदामों और कंटेनरों में छुपकर समय काटना पड़ता है। यह कहना है डिपोर्ट होकर अपने वतन लौटे युवाओं का।
हालात इतने खराब हैं कि डंकी माध्यम से अमेरिका जाकर वापस आए युवाओं ने खुद को घरों में कैद कर रखा है। वे किसी से मिल भी नहीं रहे। वहां के हालात का खौफ अभी उनके जहन से नहीं गया है। विवेक, आकाश और रजत का कहना है कि डंकी माध्यम से अमेरिका जाने वाले सैकड़ों युवा ऐसे हैं, जिनकी महीनों तक अपने परिवार से बात तक नहीं होती।
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रास्ते की मुश्किलें, पल-पल पकड़े जाने का खतरा, डर के साये में सांस लेने से गहरा सदमा लगता है। जंगलों के रास्ते पहुंचने के बाद बड़ी दिक्कत तब है काम मिले या न मिले गोदामों और कंटेनरों में छुपकर समय काटना पड़ता है। यह कहना है डिपोर्ट होकर अपने वतन लौटे युवाओं का।
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हालात इतने खराब हैं कि डंकी माध्यम से अमेरिका जाकर वापस आए युवाओं ने खुद को घरों में कैद कर रखा है। वे किसी से मिल भी नहीं रहे। वहां के हालात का खौफ अभी उनके जहन से नहीं गया है। विवेक, आकाश और रजत का कहना है कि डंकी माध्यम से अमेरिका जाने वाले सैकड़ों युवा ऐसे हैं, जिनकी महीनों तक अपने परिवार से बात तक नहीं होती।
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रास्ते में मिलने वाले एजेंट उन्हें खाना देने के नाम पर वसूली करते हैं। यदि परिवार से बात करनी हो तो प्रति मिनट के हिसाब से रुपये लेते हैं। बात करानी है या नहीं, यह भी उनकी मर्जी पर ही निर्भर करता है।
इसके अलावा जब उन्होंने चाहा वहीं रोक देंगे और आगे ले जाने के नाम पर मोटी रकम की मांग की जाएगी। जिसके परिवार से रुपये नहीं आएंगे, उन्हें प्रताड़ित किया जाता है। शुरुआत में युवाओं के समूह से किसी एक को उठाकर उसे मारते हैं, जिसे देखकर अन्य सभी डर जाते हैं।
लाखों रुपये लेकर दिलाते काम, फिर भी गारंटी नहीं
वापस लौटे आकाश ने बताया कि वे दो साल पहले अमेरिका गए थे। पहुंचने में ही 11 महीनें का समय लगा था। एजेंट ने वहां पहुंचने तक कुल 55 लाख रुपये लिए। इसके बाद वहां पर काम नहीं मिला। रोजाना खेतों व अन्य जगह छुपकर रहते थे।
वापस लौटे आकाश ने बताया कि वे दो साल पहले अमेरिका गए थे। पहुंचने में ही 11 महीनें का समय लगा था। एजेंट ने वहां पहुंचने तक कुल 55 लाख रुपये लिए। इसके बाद वहां पर काम नहीं मिला। रोजाना खेतों व अन्य जगह छुपकर रहते थे।
काम दिलाने के लिए परिवार ने एजेंट से बात की तो 10 लाख रुपये और लिए, फिर किसी के माध्यम से स्टोर पर लगवाया गया, यहां फिर गौदाम में रातें बिताई। यहां भी नौकरी सुरक्षित रहेगी इसकी कोई गारंटी नहीं थी। थोड़े समय बाद यहां से भी नौकरी बदलनी पड़ी।
दो-दो महीने तक तो पता भी नहीं होता बच्चे हैं कहां
अमेरिका से डिपोर्ट किए गए रजत के भाई विक्की ने बताया कि परिवार की उनसे कभी-कभी बात होती थी। डंकर ही अपने फोन से मुश्किल से एक मिनट बात कराते थे। ज्यादा बात करने पर रुपये देने पड़ते थे।
अमेरिका से डिपोर्ट किए गए रजत के भाई विक्की ने बताया कि परिवार की उनसे कभी-कभी बात होती थी। डंकर ही अपने फोन से मुश्किल से एक मिनट बात कराते थे। ज्यादा बात करने पर रुपये देने पड़ते थे।
अब रजत पहुंचकर बताता है कि कई युवा ऐसे थे, जिनकी बात अपने परिवार से दो-दो महीने तक नहीं होती थी। परिवार को पता ही नहीं होता था कि उनके बच्चे कहां पर हैं। वीडियो कॉल में भाई का चेहरा देखकर ही उसके डर और टेंशन झलकती थी।
हमारा भाई तो पहुंचा ही नहीं, बेहाल देख सता रहा डर
तेहरान में फंसे पवन के भाई प्रवीन ने बताया कि उनका भाई तो अभी स्पेन पहुंचा भी नहीं था कि रास्ते में ही मानव तस्करों के हत्थे चढ़ गया। उन दोनों को निवस्त्र करके शरीर पर घाव दिए गए, इसके जारी हुए वीडियो को देखकर रूह कांप जाती है।
तेहरान में फंसे पवन के भाई प्रवीन ने बताया कि उनका भाई तो अभी स्पेन पहुंचा भी नहीं था कि रास्ते में ही मानव तस्करों के हत्थे चढ़ गया। उन दोनों को निवस्त्र करके शरीर पर घाव दिए गए, इसके जारी हुए वीडियो को देखकर रूह कांप जाती है।
उन्हें बेहाल देखकर परिवार को भी डर सकता रहा है। मध्यवर्गीय परिवार बच्चों को कर्ज लेकर विदेश भेजते हैं। पता नहीं था कि ऐसे हालात हैं नहीं तो उन्हें कभी न भेजते, उनकी लोकेशन तक का हमें पता नहीं है।
विदेश भेजने के नाम पर धोखाधड़ी के आए दिन मामले सामने आते हैं। जो शिकायतें दर्ज हुई, उन पर कार्रवाई भी की जा रही है। अब तक जितने भी लड़के डिपोर्ट होकर वापस आए हैं, उनके परिवारों की ओर से अभी शिकायत नहीं मिली है। विदेश जाने के लिए अधिकृत रास्ता ही अपनाया जाना चाहिए। एजेंटों के झांसे में आने से बचें। - गंगाराम पूनिया, एसपी करनाल