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अफगानिस्तान में प्रजातंत्र की हुई हत्या
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अफगानिस्तान में तालिबान द्वारा सत्ता हथियाने से विश्व के कई देश चिंतित हैं। हथियारों के बल पर तालिबान ने जिस तरह एक देश पर कब्जा किया है वह प्रजातंत्र की हत्या है। शांति दूत, राजनीतिक विशेषज्ञ, इतिहासकार व राष्ट्रीय सैनिक संघ का कहना है कि इसके पीछे पाकिस्तान का हाथ है। उनका कहना है कि वर्तमान के आधुनिक युग में जहां महिलाएं पुरुषों के समान काम करके परिवार की आर्थिक स्थिति में बराबर सहयोग करती हैं, वहीं तालिबानी विचारधारा में महिलाएं नौकरी नहीं कर सकती। 15 साल की आयु में लड़की की शादी कर देते हैं और आदमी की उम्र तक नहीं देखते। यही वजह है कि अफगानिस्तानी देश छोड़कर जा रहे हैं।
यह तानाशाही और प्रजातंत्र की हत्या है। दहशतगर्दी से सत्ता हथियाने का जो रास्ता अख्तियार किया गया है वह निंदनीय है। अफगानिस्तान में अवाम का तालिबानी हुकूमत पर विश्वास नहीं है। जिस कारण वहां अफरा-तफरी मची है।
- डा. राकेश भारद्वाज, सदस्य, आर्गेनाइजेशन फॉर द प्रोहिबिशन केमिकल विपन
तालिबानी विचारधारा आज के युग से विपरीत है। विशेषकर महिलाओं को लेकर। महिलाएं नौकरी नहीं कर सकतीं। कम उम्र में लड़की की शादी। अफगानिस्तान में लोगों को तालिबानी पसंद नहीं तभी वे देश छोड़कर भाग रहे हैं।
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- डा. उपेंद्र चौधरी, पूर्व निदेशक इंडियन कौंसिल फॉर सोशल साइंसेज रिसर्च, पूर्व प्राध्यापक राजनीतिक शास्त्र, दयाल सिंह कॉलेज
तालिबानी विचारधारा मध्यकाल का अनुसरण करती है। ये लड़ाकू प्रवृत्ति के हैं। तालिबानियों की विचारधारा आज के आधुनिक परिप्रेक्ष्य में सटीक नहीं बैठती। अमेरिका के राष्ट्रपति ने ठीक ही कहा कि अफगानिस्तान की फौज ने बिना लड़े हथियार डाल दिए तो अन्य देश क्या मदद कर सकते हैं।
-प्रो. विनय कुमार डांगी, इतिहासकार, राजकीय महिला कॉलेज मतलौड़ा-पानीपत
तालिबान क्रूर सत्ता है। अफगानिस्तान में इनका कब्जा हो चुका है। भारत सरकार ने अपने नागरिकों को वहां से सुरक्षित वापस लाने का सराहनीय निर्णय लिया है। जो देश इन्हें मान्यता दे रहा है वह गलत है।
-आरएस चौहान, अध्यक्ष, राष्ट्रीय सैनिक संघ
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यह तानाशाही और प्रजातंत्र की हत्या है। दहशतगर्दी से सत्ता हथियाने का जो रास्ता अख्तियार किया गया है वह निंदनीय है। अफगानिस्तान में अवाम का तालिबानी हुकूमत पर विश्वास नहीं है। जिस कारण वहां अफरा-तफरी मची है।
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- डा. राकेश भारद्वाज, सदस्य, आर्गेनाइजेशन फॉर द प्रोहिबिशन केमिकल विपन
तालिबानी विचारधारा आज के युग से विपरीत है। विशेषकर महिलाओं को लेकर। महिलाएं नौकरी नहीं कर सकतीं। कम उम्र में लड़की की शादी। अफगानिस्तान में लोगों को तालिबानी पसंद नहीं तभी वे देश छोड़कर भाग रहे हैं।
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- डा. उपेंद्र चौधरी, पूर्व निदेशक इंडियन कौंसिल फॉर सोशल साइंसेज रिसर्च, पूर्व प्राध्यापक राजनीतिक शास्त्र, दयाल सिंह कॉलेज
तालिबानी विचारधारा मध्यकाल का अनुसरण करती है। ये लड़ाकू प्रवृत्ति के हैं। तालिबानियों की विचारधारा आज के आधुनिक परिप्रेक्ष्य में सटीक नहीं बैठती। अमेरिका के राष्ट्रपति ने ठीक ही कहा कि अफगानिस्तान की फौज ने बिना लड़े हथियार डाल दिए तो अन्य देश क्या मदद कर सकते हैं।
-प्रो. विनय कुमार डांगी, इतिहासकार, राजकीय महिला कॉलेज मतलौड़ा-पानीपत
तालिबान क्रूर सत्ता है। अफगानिस्तान में इनका कब्जा हो चुका है। भारत सरकार ने अपने नागरिकों को वहां से सुरक्षित वापस लाने का सराहनीय निर्णय लिया है। जो देश इन्हें मान्यता दे रहा है वह गलत है।
-आरएस चौहान, अध्यक्ष, राष्ट्रीय सैनिक संघ