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बच्चों को गोशाला जरूर लेकर जाएं : स्वामी शाश्वत
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- श्रीमद्भागवत कथा से पूर्व महिलाओं ने निकाली कलश यात्रा
संवाद न्यूज एजेंसी
करनाल। सेक्टर-14 के श्रीकृष्ण मंदिर में आयोजित श्रीमद्भागवत कथा से पूर्व मेरठ रोड के पंचमुखी हनुमान मंदिर से कलश यात्रा निकाली गई, जो मेरठ रोड से होते हुए सेक्टर-14 के श्रीकृष्ण मंदिर में संपन्न हुई। कलश यात्रा का पुष्प वर्षा से स्वागत किया गया। कथा में प्रवचन करते हुए महंत स्वामी शाश्वत आचार्य ने कहा कि हमें रोजाना अपने परिवार सहित गोशाला में जाकर गोवंश का आशीर्वाद लेना चाहिए और उनको गुड़ और चारा खिलाना चाहिए। अपने बच्चों को चाहे किसी भी तरह का लालच देकर गोशाला जरूर लेकर जाएं ताकि वो अपनी धरोहर और संस्कृति को समझें और गोवंश सड़कों पर वाहनों के नीचे न आएं।
आचार्य ने कहा कि हमें हमेशा गरीब परिवार की लड़की की पढ़ाई में सहयोग करना चाहिए क्योंकि एक बेटी पढ़कर दो परिवारों का सुधार करती है। उन्होंने कहा कि जब मन भगवान के चिंतन में पूर्णत: लगता है, तब वह गोकुल बन जाता है। इसलिए प्रतिदिन प्रातः काल सबसे पहले ईश्वर का सुमिरण करना चाहिए, जिससे पूरा दिन व जीवन खुशहाली से भर जाता है। जब मन पवित्र रहेगा तो कोई विकार आपको स्पर्श नहीं कर सकता। महंत ने कहा कि श्रीमद्भागवत कीर्ति, ज्ञान सहित धर्म,अर्थ ,काम, मोक्ष को विस्तार से संतुष्ट और पुष्ट करके हमेशा हमेशा के लिए अपने चरणों में भक्ति प्राप्त कराता है। उन्होंने कहा कि मृत्यु को जानने से मृत्यु का भय मन से मिट जाता है, जिस प्रकार परीक्षित ने भागवत कथा का श्रवण कर अभय को प्राप्त किया, वैसे ही भागवत जीव को अभय बना देती है।
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संवाद न्यूज एजेंसी
करनाल। सेक्टर-14 के श्रीकृष्ण मंदिर में आयोजित श्रीमद्भागवत कथा से पूर्व मेरठ रोड के पंचमुखी हनुमान मंदिर से कलश यात्रा निकाली गई, जो मेरठ रोड से होते हुए सेक्टर-14 के श्रीकृष्ण मंदिर में संपन्न हुई। कलश यात्रा का पुष्प वर्षा से स्वागत किया गया। कथा में प्रवचन करते हुए महंत स्वामी शाश्वत आचार्य ने कहा कि हमें रोजाना अपने परिवार सहित गोशाला में जाकर गोवंश का आशीर्वाद लेना चाहिए और उनको गुड़ और चारा खिलाना चाहिए। अपने बच्चों को चाहे किसी भी तरह का लालच देकर गोशाला जरूर लेकर जाएं ताकि वो अपनी धरोहर और संस्कृति को समझें और गोवंश सड़कों पर वाहनों के नीचे न आएं।
आचार्य ने कहा कि हमें हमेशा गरीब परिवार की लड़की की पढ़ाई में सहयोग करना चाहिए क्योंकि एक बेटी पढ़कर दो परिवारों का सुधार करती है। उन्होंने कहा कि जब मन भगवान के चिंतन में पूर्णत: लगता है, तब वह गोकुल बन जाता है। इसलिए प्रतिदिन प्रातः काल सबसे पहले ईश्वर का सुमिरण करना चाहिए, जिससे पूरा दिन व जीवन खुशहाली से भर जाता है। जब मन पवित्र रहेगा तो कोई विकार आपको स्पर्श नहीं कर सकता। महंत ने कहा कि श्रीमद्भागवत कीर्ति, ज्ञान सहित धर्म,अर्थ ,काम, मोक्ष को विस्तार से संतुष्ट और पुष्ट करके हमेशा हमेशा के लिए अपने चरणों में भक्ति प्राप्त कराता है। उन्होंने कहा कि मृत्यु को जानने से मृत्यु का भय मन से मिट जाता है, जिस प्रकार परीक्षित ने भागवत कथा का श्रवण कर अभय को प्राप्त किया, वैसे ही भागवत जीव को अभय बना देती है।
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