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डिफेंस इंडस्ट्री को मिलेगी ताकत, रोजगार के अवसर मिलेंगे

Amar Ujala Bureau अमर उजाला ब्यूरो
Updated Wed, 02 Feb 2022 02:57 AM IST
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Defense industry will get strength, will get employment opportunities
मोहित धुपड़
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करनाल। बजट में घरेलू रक्षा उत्पाद इकाइयों को मजबूत करने और इस सेक्टर में आत्मनिर्भर बनने की जो घोषणा केंद्रीय वित्तमंत्री ने की है, उससे न केवल डिफेंस इंडस्ट्री की ताकत बढ़ेगी बल्कि इस क्षेत्र में रोजगार के अवसर भी सृजित होंगे। इस घोषणा से हरियाणा, पंजाब, चंडीगढ़ और हिमाचल में स्थित विभिन्न रक्षा उत्पाद इकाइयों को भी आर्थिक मजबूती मिलेगी।
पिछले कुछ वर्षों के दौरान देश की सुरक्षा को लेकर बढ़ी चिंता और चुनौतियों के मद्देनजर सरकार इस सेक्टर को लगातार मजबूत करने में जुटी है। इससे पहले भी सरकार घरेलू रक्षा उद्योगों के लिए करीब 4 लाख करोड़ का विशेष पैकेज घोषित कर चुकी है और अब इस बजट में रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता की सरकारी प्रतिबद्धता से इस सेक्टर को और मजबूती मिलने की उम्मीद जगी है। बजट में घोषणा की गई है कि सशस्त्र बलों के लिए उपकरणों में आत्मनिर्भरता को बढ़ावा दिया जाना है। यानी रक्षा संबंधी उपकरणों व हथियारों का निर्यात अब कम किया जाएगा। इस दौरान खरीद बजट को भी गत वर्ष की तुलना में 58 प्रतिशत से बढ़ाकर वर्ष 2022-23 में घरेलू उद्योगों के लिए 68 प्रतिशत कर दिया गया है।
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साथ ही रक्षा संबंधी उद्योगों, स्टार्ट-अप व शिक्षा जगत में अनुसंधान व विकास संबंधी परियोजनाओं को बढ़ावा देने के लिए विशेष बजट का प्रावधान रहेगा। रक्षा उत्पादों से जुड़े निजी उद्योगों को उपकरणों के डिजाइन और विकास निष्पादित करने के लिएएसपीवी (स्पेशल पर्पस व्हीकल) मॉडल के जरिए डीआरडीओ और अन्य संगठनों का सहयोग और प्रोत्साहन भी मिलेगा। साथ ही इन सब कार्यों की व्यापक निगरानी और प्रमाणन आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए एक स्वतंत्र नोडल अंब्रैला निकाय गठित किया जाएगा।
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उधर, रक्षा विशेषज्ञों की माने तो रक्षा उपकरणों व हथियारों के मामले में देश जितना आत्मनिर्भर बनेगा, उतना अन्य देशों पर निर्भरता कम होगी। रक्षा विशेषज्ञ कर्नल नंद किशोर सिहाग कहते हैं कि घरेलू रक्षा उत्पाद इकाइयों को मजबूत करने की सोच अच्छी है। निसंदेह इससे रोजगार के अवसर भी सृजित होंगे। बस, ध्यान यह रखना होगा कि उपकरणों की गुणवत्ता से कोई समझौता न हो और रक्षा उत्पादों की गोपनीयता भी बनी रही और इससे नई इकाइयां भी पनपेगीं। कर्नल सिहाग के अनुसार सरकार को इसके अलावा इन उपकरणों और हथियारों का इस्तेमाल करने वाले जवानों का हौसला भी बढ़ाकर रखना चाहिए। उनकी दिक्कतों पर फोकस करते हुए उनकी जायज समस्याओं का समाधान भी जरूरी है।
उत्तर भारत रक्षा उत्पादों का बड़ा केंद्र
उत्तर भारत में हरियाणा, पंजाब, चंडीगढ़ व हिमाचल प्रदेश में रक्षा उत्पाद निर्माण की कई महत्वपूर्ण सूक्ष्म, लघु और मध्यम इकाइयां मौजूद हैं। हरियाणा के अंबाला, पंचकूला, फरीदाबाद, पलवल, पृथला, बहादुरगढ़, गुरुग्राम व झज्जर में भी रक्षा उपकरण तैयार किए जाते हैं। इसी तरह चंडीगढ़ समेत पंजाब के रोपड़, लालड़ू, मोहाली व हिमाचल के बद्दी व सोलन में भी रक्षा उत्पाद के उद्योग स्थापित हैं। हरियाणा की बात करें तो विभिन्न रक्षा उत्पादों में अग्नि व ब्रह्मोस मिसाइल, जगुआर व मिराज जैसे लाइट कॉम्बैट एयरक्त्रसफ्ट और हेलिकॉप्टर के उपकरण व कल-पुर्जे समेत बुलेट प्रूफ जैकेट, फैब्रीकेटर और मोबाइल सर्विलांस सिस्टम, मिलिट्री सिम्युलेटरस फॉर वैपन व्हीकल्स, आर्मी जैकेट्स, बीपी हेलमेट, बॉम्ब ब्लैंकेट्स, कवच प्लेट्स, मिनी अनमैंड एरियल व्हीकल, एयर फ्लाइट्स के उपकरण, फील्ड आर्टलरी वैपन सिस्टम, राकेट्स, मोर्टार, गन, एयर डिफेंस वैपन सिस्टम ऑफ राडार, राकेट लॉन्चर, ग्रेनेड लॉन्चर व मिसाइल लॉन्चर के उपकरण एवं कलपुर्जे, एम्युनेशन फॉर एंटी एयरक्त्रसफ्ट गन, टैंक, डिफेंस रेडियो सिस्टम के कलपुर्जे तैयार किए जाते हैं।

इसके अतिरिक्त राडर सीकर्स, ईवी एंड डाटा लिंक एप्लीकेशन, इलेक्ट्रो ऑप्टिक्स यूनिट, नेवल सिस्टम कंट्रोल एंड कम्युनिकेशन रैक सिस्टम, सेफिंग एंड आर्मिंग डिवाइस व फ्यूज सेंसर डिवाइज तैयार की जाती है। इस तरह चंडीगढ़ में फील्ड एंड एम्पिटी फ्यूज फॉर आर्टलरी, शैल्स, मोर्टर बम, ग्रेनेड्स एंड म्यूनिशन फॉर वार समेत सेफ्टी एंड आर्मिंग डिवाइज व क्लॉक वर्क मैकेनिज्म तैयार होता है। चंडीगढ़ में ऑर्डिनेंस केबल फैक्टरी भी मौजूद है। जो टैंक से लेकर विभिन्न सैन्य उपकरणों में इस्तेमाल होने वाली बिजली की तारें बनाती है। इसी तरह पंजाब व हिमाचल में भी कई तरह के रक्षा उपकरणों समेत उनके कलपुर्जे भी निर्मित किए जाते हैं। इन्हें तैयार करने वाले उद्योगों को इस घोषणा से आर्थिक मजबूती की आस बंधी है।
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