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डेयरी उत्पादन से देश की 46 फीसदी से अधिक आबादी का भरण पोषण : डॉ. जाट

Amar Ujala Bureau अमर उजाला ब्यूरो
Updated Sat, 21 Mar 2026 12:39 AM IST
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Dairy production supports more than 46 percent of the country's population: Dr. Jat
आईसीएआर-एनडीआरआई के दीक्षांत समारोह में छात्रा को प्रमाण पत्र देते मुख्य अतिथि डॉ. एम.एल. जाट।
माई सिटी रिपोर्टर
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करनाल। देश में पशुधन क्षेत्र का प्रभुत्व 17.25 लाख करोड़ रुपये का है। इसमें डेयरी उत्पादन का 65 प्रतिशत योगदान है। ये भारत के सकल लाभ मूल्य में 16 प्रतिशत का योगदान रखता है और देश की 46.1 प्रतिशत आबादी का भरण-पोषण करता है। अबकी बार केंद्रीय बजट में पशुपालन के लिए 6,153 करोड़ रुपये की यानी 16 प्रतिशत की वृद्धि की गई है। इससे 20,000 पशु चिकित्सकों की भर्ती, कॉलेजों, प्रयोगशालाओं को सब्सिडी और सहकारी कर राहत प्रदान की जाएगी।
आईसीएआर के महानिदेशक और डीएआरआई के सचिव डॉ. एमएल जाट ने शुक्रवार को आईसीएआर-राष्ट्रीय डेयरी अनुसंधान संस्थान के 22वें दीक्षांत समारोह में बतौर मुख्य अतिथि ये जानकारी दी। डॉ. जाट ने बताया कि भारत में दूध का उत्पादन 1950 में 17 मीट्रिकटन से बढ़कर वर्ष 2025 में 247 मीट्रिक टन हो गया है। इसमें उत्तर प्रदेश का योगदान सबसे अधिक रहा जबकि पंजाब-हरियाणा ने उत्पादन में शीर्ष स्थान हासिल किया। नीति आयोग ने 2047 तक 480-606 मीट्रिक टन दूध की मांग का अनुमान लगाया है।
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सौ फीसदी प्लेसमेंट, डेयरी मेले में एनडीआरआई का दूसरा स्थान-
डॉ. जाट ने करनाल, बंगलूरू और कल्याणी परिसर में एनडीआरआई की सौ साल पुरानी विरासत की प्रशंसा करते हुए 100 प्रतिशत प्लेसमेंट की सराहना की। इनमें 22 को जर्मनी में जगह मिली। उन्होंने एनडीआरआई की उपलब्धियों में करण फ्राइज नस्ल, जीन एडिटिंग, त्वरित दूध परीक्षण, तापमान-आद्रता सूचकांक-आधारित एनडीआरआई जलवायु सेवाएं, मीथेन-कम करने वाले फीड और बिहार-हरियाणा में जलवायु-लचीले डेयरी फार्म स्कूल मॉडल के बारे में बताया। उन्होंने बताया कि राष्ट्रीय डेयरी मेला 55,000 से अधिक किसानों तक पहुंचा और एनआईआरएफ रैंकिंग में दूसरा स्थान मिला।
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253 छात्रों को दी उपाधियां
आईसीएआर-एनडीआरआई के निदेशक डॉ. धीर सिंह ने 253 छात्रों को उपाधियां दी। डेयरी प्रौद्योगिकी में बीटेक करने वाले 41 छात्र-छात्राओं, 130 मास्टर और 82 पीएचडी शोधार्थी शामिल रहे। इस वर्ष डॉक्टरेट ऑफ साइंस की उपाधि आईसीएआर के पूर्व सचिव और महानिदेशक डॉ. आरएस परोदा और नाबार्ड के पूर्व अध्यक्ष डॉ. हर्ष कुमार भानवाला को प्रदान की गई।
पशु प्रजनन स्त्रीरोग एवं प्रसूति विज्ञान के डॉ. अभिजीत फर्नांडेस को स्वर्ण पदक, कृषि अर्थशास्त्र के डॉ. अमित ठाकुर को रजत पदक और डेयरी इंजीनियरिंग के डॉ. पसागड़ी आदित्य सुकुमार को कांस्य पदक से सम्मानित किया गया।
स्नातकोत्तर कार्यक्रम के अंतर्गत, पशु प्रजनन स्त्रीरोग एवं प्रसूति विज्ञान की सिंधु वीके को स्वर्ण पदक, डेयरी प्रौद्योगिकी की प्रीति रानी को रजत पदक और अनिर्बन दास को कांस्य पदक से सम्मानित किया गया। बीटेक डेयरी प्रौद्योगिकी के अंतर्गत, बीटेक डेयरी प्रौद्योगिकी की कीर्ति को स्वर्ण पदक, हर्षवी को रजत पदक और हरि एस को कांस्य पदक से सम्मानित किया गया।
वर्ष 2024-25 के दौरान डॉक्टरेट कार्यक्रम के अंतर्गत 15 छात्रों को योग्यता प्रमाण पत्र प्रदान किया गया जबकि मास्टर्स कार्यक्रम के अंतर्गत 14 छात्रों को योग्यता प्रमाण पत्र प्रदान किया गया। इसी वर्ष बीटेक (डेयरी टेक्नोलॉजी) के अंतर्गत 8 छात्रों को योग्यता प्रमाण पत्र प्रदान किया गया।


डॉक्टरेट कार्यक्रम के अंतर्गत सर्वश्रेष्ठ शोध प्रबंध पुरस्कार उत्पादन समूह में पशु आनुवंशिकी एवं प्रजनन विभाग की डॉ. सुरुति उत्सवभाई शैलेश कुमार, प्रसंस्करण समूह में डेयरी माइक्रोबायोलॉजी विभाग की श्रेया साहा और कृषि विस्तार शिक्षा विभाग के अमितवा पांजा को प्रदान किया गया।

मास्टर्स कार्यक्रम 2024-25 के अंतर्गत, सर्वश्रेष्ठ शोध प्रबंध पुरस्कार उत्पादन समूह में पशु आनुवंशिकी एवं प्रजनन विभाग की हेमलता वाल्मीकि, प्रसंस्करण समूह में डेयरी इंजीनियरिंग विभाग की किरण गोयत और कृषि विस्तार शिक्षा विभाग के अनिर्बन को प्रदान किया गया। वर्ष 2025 के लिए सर्वश्रेष्ठ विभाग का पुरस्कार पशु जैव प्रौद्योगिकी विभाग को दिया गया।
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