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Karnal News: औषधीय पौधों की खेती से होगी छह गुना तक आय
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- एमएचयू में अश्वगंधा की खेती पर हुई राष्ट्रीय कार्यशाला
माई सिटी रिपोर्टर
करनाल। किसान अगर परंपरागत खेती के साथ-साथ औषधीय पौधे की भी खेती करें तो उनकी आय दोगुनी ही नहीं बल्कि छह गुना तक हो सकती है। यह कहना है कि कृषि क्षेत्र से जुड़े विशेषज्ञों का। शनिवार को महाराणा प्रताप उद्यान विश्वविद्यालय में अश्वगंधा के औषधीय गुणों और इसकी खेती के फायदों को लेकर आयोजित राष्ट्रीय कार्यशाला का आयोजन हुआ।
भारत सरकार के आयुष मंत्रालय द्वारा प्रायोजित कार्यशाला में मुख्य अतिथि के तौर पर नेशनल मेडिसनली प्लांट बोर्ड आयुष मंत्रालय मुख्य कार्यकारी अधिकारी डॉ. महेश दधिचि ने शिरकत की। उन्होंने कहा कि औषधीय पौधों की मार्केट बहुत बड़ी है, भारत में मांग के हिसाब से केवल 25 प्रतिशत ही उत्पादन हो पाता है। भारत सरकार किसानों की आय दुगनी करने के लिए विभिन्न योजनाएं चल रही है। हरियाणा में अश्वगंधा की खेती को बढ़ावा देने के लिए विश्वविद्यालय को यह प्रोजेक्ट दिया है। इसमें किसानों विशेषकर एससी, एसटी वर्ग के लोगों की आय को बढ़ाने के लिए उनमें जागरूकता लाई जाएगी। इसके तहत किसानों को दो लाख पौध नि:शुल्क दी जाएंगी।
विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. सुरेश ने कहा कि देश के करीब 80 प्रतिशत लोग अभी भी औषधीय पौधों पर निर्भर हैं। औषधीय पौधों के उत्पादन की जरूरत है, एमएचयू औषधीय पौधों के उत्पादन के कार्य पर जोर देती है। फल सब्जियां, औषधीय पौधे, मसाले ओर मशरूम की खेती, मधु मक्खी पालन को बढ़ावा दिया जाता है। कार्यक्रम की संयोजिका डॉ. बिमला सिंह ने अश्वगंधा की खेती के औषधीय गुण एवं इसके उत्पादों द्वारा आय संवर्धन की संभावनाओं पर बल दिया। उन्होंने साधनहीन किसानों को अश्वगंधा को एक किफायती फसल के तौर पर अपनाने के लिए प्रोत्साहित किया। एमएचयू के अनुसंधान निदेशक व डीन प्रो. रमेश गोयल, छात्र कल्याण निदेशक प्रो. रंजना गुप्ता ने भी विचार रखे। मंच संचालन डॉ. विजय अरोड़ा ने किया।
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माई सिटी रिपोर्टर
करनाल। किसान अगर परंपरागत खेती के साथ-साथ औषधीय पौधे की भी खेती करें तो उनकी आय दोगुनी ही नहीं बल्कि छह गुना तक हो सकती है। यह कहना है कि कृषि क्षेत्र से जुड़े विशेषज्ञों का। शनिवार को महाराणा प्रताप उद्यान विश्वविद्यालय में अश्वगंधा के औषधीय गुणों और इसकी खेती के फायदों को लेकर आयोजित राष्ट्रीय कार्यशाला का आयोजन हुआ।
भारत सरकार के आयुष मंत्रालय द्वारा प्रायोजित कार्यशाला में मुख्य अतिथि के तौर पर नेशनल मेडिसनली प्लांट बोर्ड आयुष मंत्रालय मुख्य कार्यकारी अधिकारी डॉ. महेश दधिचि ने शिरकत की। उन्होंने कहा कि औषधीय पौधों की मार्केट बहुत बड़ी है, भारत में मांग के हिसाब से केवल 25 प्रतिशत ही उत्पादन हो पाता है। भारत सरकार किसानों की आय दुगनी करने के लिए विभिन्न योजनाएं चल रही है। हरियाणा में अश्वगंधा की खेती को बढ़ावा देने के लिए विश्वविद्यालय को यह प्रोजेक्ट दिया है। इसमें किसानों विशेषकर एससी, एसटी वर्ग के लोगों की आय को बढ़ाने के लिए उनमें जागरूकता लाई जाएगी। इसके तहत किसानों को दो लाख पौध नि:शुल्क दी जाएंगी।
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विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. सुरेश ने कहा कि देश के करीब 80 प्रतिशत लोग अभी भी औषधीय पौधों पर निर्भर हैं। औषधीय पौधों के उत्पादन की जरूरत है, एमएचयू औषधीय पौधों के उत्पादन के कार्य पर जोर देती है। फल सब्जियां, औषधीय पौधे, मसाले ओर मशरूम की खेती, मधु मक्खी पालन को बढ़ावा दिया जाता है। कार्यक्रम की संयोजिका डॉ. बिमला सिंह ने अश्वगंधा की खेती के औषधीय गुण एवं इसके उत्पादों द्वारा आय संवर्धन की संभावनाओं पर बल दिया। उन्होंने साधनहीन किसानों को अश्वगंधा को एक किफायती फसल के तौर पर अपनाने के लिए प्रोत्साहित किया। एमएचयू के अनुसंधान निदेशक व डीन प्रो. रमेश गोयल, छात्र कल्याण निदेशक प्रो. रंजना गुप्ता ने भी विचार रखे। मंच संचालन डॉ. विजय अरोड़ा ने किया।
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