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Hindi News ›   Haryana ›   Karnal News ›   Tue song turned into mourning

मातम में बदल गए मंगल गीत

Sun, 13 Sep 2015 12:26 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला,करनाल
ब्यूरो/अमर उजाला,करनाल Updated Sun, 13 Sep 2015 12:26 AM IST
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कुछ ही घंटे पहले जिस घर में भात के मंगल गीत गाए जा रहे थे, उसी घर में शनिवार को मातम पसर गया। मंगल गीत मातम में बदल गए। पूरे कुनबे में हाहाकार मच गया। लक्ष्मी चंद और बाबूराम सहित रामकरण और रोशनलाल के घर से चीत्कार की आवाजें निकली, जिसने हर एक को रुला दिया। जिसने भी हादसे के बारे में सुना वो घटनास्थल पर पहुंच गया और फिर अस्पताल।

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एक साथ पांच लाशों को देखकर सबका दिल दहल उठा। हादसे के बाद भी मृतकों के परिजनों ने अपने रिश्तेदारों को दोपहर तक इस बात की सूचना तक नहीं दी कि उन पर इस समय कितनी बड़ी आपदा टूट पड़ी है। अपने दर्द को छुपाकर हर कोई यही सोच रहा था कि वैवाहिक कार्यक्रम में खलल न पड़े, लेकिन इतने बड़े हादसे को आखिर कैसे छुपाया जा सकता था। सूचना मिलते ही गांव चिब्बा में बज रहे डीजे बंद कर दिए गए। गांव चिब्बा के साथ-साथ गांव मोदीनपुर में भी मातम पसर गया। चूंकि गांव चिब्बा से बारात करनाल के मोदीनपुर में आनी थी।
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वहीं, गांव दरड़ में भी दोपहर के समय किसी भी घर में चूल्हा नहीं जला। हादसे में मारे गए कार चालक रविपाल के गांव चुरनी में भी जैसे ही हादसे की सूचना गई तो वहां भी सन्नाटा पसर गया। गांव दरड़ निवासी लखमी चंद का परिवार बड़ी खुशी खुशी से शादी समारोह में शामिल होने जा रहा था, लेकिन उन्हें पता नहीं था कि रास्ते में ही मौत उनका इंतजार कर रही है। घायल ममता, सतपाल ने बताया कि गाड़ी में सवार सभी खुशी मना रहे थे कि ये हादसा हो गया।
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विलाप देख हर एक आंख नम
एक साथ पांच मौतों से परिवारजन बदहवाश हो गए, लेकिन अस्पताल में परिजनों के विलाप पर आने जाने वाले लोग भी रो पड़े। दोपहर तक पांचों मृतकों का पोस्टमार्टम हुआ, इस दौरान गांव व आसपास के काफी संख्या में लोग मौजूद रहे। परिजनों के विलाप ने अस्पताल में दवा लेने आए मरीजों की आंखें भी नम कर दी।


गांव दौड़ पड़ा
गांव दरड़ के लोग सूचना मिलते ही अस्पताल और घटनास्थल की तरफ दौड़ पड़े। एक और मृतकों के परिजन अस्पताल में अपनों के लिए विलाप कर रहे थे तो वहीं जिंदा बचे 6 लोगों को बचाने के प्रयास भी चल रहे थे। इस दौरान मृतकों को इस दुख की घड़ी में गांव के सरंपच व अन्य ग्रामीणों ने मृतकों के परिजनों का ढांढस बांधते हुए अस्पताल में ही मृतकों के संस्कार के लिए पैसे जुटाए व 12 क्विंटल लकड़ी मंगवाकर एक साथ इन सभी के अंतिम संस्कार की व्यवस्था कराई। 

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