{"_id":"570d56744f1c1b51124a6b02","slug":"sugar-storage-karnal","type":"story","status":"publish","title_hn":"दाल के बाद अब चीनी की जमाखोरी","category":{"title":"Crime","title_hn":"क्राइम ","slug":"crime"}}
दाल के बाद अब चीनी की जमाखोरी
ब्यूरो /अमर उजाला, करनाल
Updated Wed, 13 Apr 2016 01:45 AM IST
विज्ञापन
चीनी
- फोटो : demo
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
मीठी चीनी आसमान छूते भाव से कड़वी होती जा रही है। हर घर में जरूरत है और लागत भी अधिक है। इसमें बेहतर मुनाफा कमाने के चक्कर में व्यापारियों ने चीनी की जमाखोरी कर ली है। दो माह से लगे जमाखोरी का असर अब साफ नजर आने लगा है। 32 से 33 रुपये किलोग्राम मिलने वाली चीनी के दाम 38 रुपये प्रति किलोग्राम हो गए हैं। इससे रसोई का बजट बिगड़ गया है और लोग चीनी का भाव देखकर हैरान रह जाते हैं। बता दें कि इससे पहले दाल के रेट भी अचानक बढ़ गए थे और जमाखोरों ने दाल से अपने स्टाक भर लिए थे।
जिले में करीब 140 व्यापारियों के पास चीनी का स्टॉक है। कई दुकानदार भी इस जमाखोरी में चीनी की शोर्टेज की हुई है। कुछ व्यापारियों ने बताया कि दो माह पहले की पता चल गया था कि इस बार गन्ने की पैदाइश कम है। इसलिए चीनी पर संकट मचना तय है। इसलिए जिस व्यापारी जितनी स्टॉक मिला वह जमा करते गए। अब चीनी के दाम बढ़ते ही इन व्यापारियों में खुशी का ठिकाना नहीं है। सूत्र बताते हैं कि एक-एक व्यापारी के लिए 500 से 600 कट्टे स्टॉक पर रखे हैं, जो नियमों के विरुध है। मार्केट के भाव को बढ़ा रहे हैं। इस जमाखोरी की तरफ न तो प्रशासन का ध्यान है और न ही संबंधित अधिकारियों का। चीनी के बढ़ते दाम से आमजन को झटका लगा है और वह सरकार को कोस रहे हैं।
दाल के बाद अब चीनी बढ़ाएगी परेशानी
दाल के बाद अब चीनी परेशानी बढाएगी। दाल की जमाखोरी को खत्म करने के लिए प्रशासन ने स्पेशल काउंटर खोलकर लोगों को बड़ी राहत दी थी। अब चीनी पर भी वहीं संकट आ गया है। इस कारण प्रशासन ने चीनी की जमाखोरी तोड़ने के लिए काउंटर खोलने पड़ेंगे। बता दें कि दाल को लेकर जिलेभर में भारी हंगामा हुआ था। लोगों ने दाल के बढ़े दामों के विरोध में धरने और प्रदर्शन भी किए थे।
विज्ञापन
व्यापारियों ने प्लानिंग से की जमाखोरी
सूत्रों का कहना है कि चीनी पर मुनाफा कमाने के चक्कर में व्यापारियों ने पूरी प्लानिंग से काम लिया हुआ है। इस जमाखोरी के बारे में न अफसर जान पाएंगे। क्योंकि जमाखोरों की दुकान के बाहर न दुकान का नाम है और न ही कोई रजिस्टर्ड नंबर। उदाहरण के तौर पर बड़े व्यापारी दुकान के सामने चावल के कट्टे रखते हैं और अंदर पूरा स्टॉक चीनी का जमा है। इसलिए इस जमाखोरी को तोड़ने के लिए अधिकारियों ने भी हर पहलु की जांच पड़ताल के बाद आगामी कदम उठाना होगा। सूत्र बताते हैं कि चीनी की संभावित महंगाई को देखते हुए एक से दो माह पहले ही गुप्त गोदामों में चीनी का भारी स्टाक कर लिया गया। इसका असर अब थोक के साथ साथ खुदरा बाजार में भी दिखने लगा है।
राशन डिपो से भी मार्केट की तरफ चीनी
जिले में राशन डिपो पर भी इस बार चीनी पर सभी की नजर रही। गरीब लोगों को कम बांटकर मार्केट में बेचने के मामले सामने आए हैं। सरकार द्वारा राशन डिपो पर 13 रुपये 50 पैसे प्रति किलोग्राम के हिसाब से दो किलो प्रति कार्ड बांटी जाती है। डिपो धारक चीनी न बांटकर मार्केट में 30 रुपये प्रति किलोग्राम के भाव से बेचकर मुनाफा कमाते हैं। डिपो होल्डर से कोई चीनी लेेने की जिद्द करता है तो उसका राशन भी बंद कर दिया जाता है। शिकायत होती है, लेकिन सुनवाई नहीं होती। जिले में राशन पर गड़बड़ करने वाले करीब 20 डिपो होल्डरों पर गाज गिरी हुई है।
चीनी जमाखोरी नहीं होने दी जाएगी। लिमिट की पूरी जानकारी लेकर कल से ही छापेमार कार्रवाई शुरू कराई जाएगी। आमजन से अपील है कि यदि उन्हें किसी जमाखोरी की सूचना मिलती है तो संपर्क करें। सूचना देने वाले का नाम गोपनीय रखा जाएगा। चीनी की जमाखोरी से आमजन पर प्रभाव पड़ना तय है।
-निशांत राठी, डीएफएससी, करनाल।
विज्ञापन
जिले में करीब 140 व्यापारियों के पास चीनी का स्टॉक है। कई दुकानदार भी इस जमाखोरी में चीनी की शोर्टेज की हुई है। कुछ व्यापारियों ने बताया कि दो माह पहले की पता चल गया था कि इस बार गन्ने की पैदाइश कम है। इसलिए चीनी पर संकट मचना तय है। इसलिए जिस व्यापारी जितनी स्टॉक मिला वह जमा करते गए। अब चीनी के दाम बढ़ते ही इन व्यापारियों में खुशी का ठिकाना नहीं है। सूत्र बताते हैं कि एक-एक व्यापारी के लिए 500 से 600 कट्टे स्टॉक पर रखे हैं, जो नियमों के विरुध है। मार्केट के भाव को बढ़ा रहे हैं। इस जमाखोरी की तरफ न तो प्रशासन का ध्यान है और न ही संबंधित अधिकारियों का। चीनी के बढ़ते दाम से आमजन को झटका लगा है और वह सरकार को कोस रहे हैं।
विज्ञापन
दाल के बाद अब चीनी बढ़ाएगी परेशानी
दाल के बाद अब चीनी परेशानी बढाएगी। दाल की जमाखोरी को खत्म करने के लिए प्रशासन ने स्पेशल काउंटर खोलकर लोगों को बड़ी राहत दी थी। अब चीनी पर भी वहीं संकट आ गया है। इस कारण प्रशासन ने चीनी की जमाखोरी तोड़ने के लिए काउंटर खोलने पड़ेंगे। बता दें कि दाल को लेकर जिलेभर में भारी हंगामा हुआ था। लोगों ने दाल के बढ़े दामों के विरोध में धरने और प्रदर्शन भी किए थे।
विज्ञापन
व्यापारियों ने प्लानिंग से की जमाखोरी
सूत्रों का कहना है कि चीनी पर मुनाफा कमाने के चक्कर में व्यापारियों ने पूरी प्लानिंग से काम लिया हुआ है। इस जमाखोरी के बारे में न अफसर जान पाएंगे। क्योंकि जमाखोरों की दुकान के बाहर न दुकान का नाम है और न ही कोई रजिस्टर्ड नंबर। उदाहरण के तौर पर बड़े व्यापारी दुकान के सामने चावल के कट्टे रखते हैं और अंदर पूरा स्टॉक चीनी का जमा है। इसलिए इस जमाखोरी को तोड़ने के लिए अधिकारियों ने भी हर पहलु की जांच पड़ताल के बाद आगामी कदम उठाना होगा। सूत्र बताते हैं कि चीनी की संभावित महंगाई को देखते हुए एक से दो माह पहले ही गुप्त गोदामों में चीनी का भारी स्टाक कर लिया गया। इसका असर अब थोक के साथ साथ खुदरा बाजार में भी दिखने लगा है।
राशन डिपो से भी मार्केट की तरफ चीनी
जिले में राशन डिपो पर भी इस बार चीनी पर सभी की नजर रही। गरीब लोगों को कम बांटकर मार्केट में बेचने के मामले सामने आए हैं। सरकार द्वारा राशन डिपो पर 13 रुपये 50 पैसे प्रति किलोग्राम के हिसाब से दो किलो प्रति कार्ड बांटी जाती है। डिपो धारक चीनी न बांटकर मार्केट में 30 रुपये प्रति किलोग्राम के भाव से बेचकर मुनाफा कमाते हैं। डिपो होल्डर से कोई चीनी लेेने की जिद्द करता है तो उसका राशन भी बंद कर दिया जाता है। शिकायत होती है, लेकिन सुनवाई नहीं होती। जिले में राशन पर गड़बड़ करने वाले करीब 20 डिपो होल्डरों पर गाज गिरी हुई है।
चीनी जमाखोरी नहीं होने दी जाएगी। लिमिट की पूरी जानकारी लेकर कल से ही छापेमार कार्रवाई शुरू कराई जाएगी। आमजन से अपील है कि यदि उन्हें किसी जमाखोरी की सूचना मिलती है तो संपर्क करें। सूचना देने वाले का नाम गोपनीय रखा जाएगा। चीनी की जमाखोरी से आमजन पर प्रभाव पड़ना तय है।
-निशांत राठी, डीएफएससी, करनाल।