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मेडिकल कॉलेज में इलाज कराने आएं तो फोल्डिंग और कंबल साथ लाएं

Wed, 21 Dec 2016 12:27 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला/करनाल
ब्यूरो/अमर उजाला/करनाल Updated Wed, 21 Dec 2016 12:27 AM IST
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टाटा मेमोरियल कोलकाता ने भेजा इस्टीमेट, 24 दिसंबर को होगी अहम बैठक - फोटो : अमर उजाला
प्रदेश सरकार के आदेश पर जिले के सभी सामान्य अस्पतालों के बेड़ों पर हर दिन रंग-बिरंगी चादर बिछाने होंगे। सीपीएस बख्शीश विर्क के निर्देशों पर कितना अमल हुआ उसे जानने के लिए अमर उजाला की टीम ने मंगलवार को निरीक्षण किया।
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कस्बों के सामान्य अस्पतालों में बेडों पर रंग-बिरंगी चादरें बिछाई जा रही हैं। जबकि सीएम सिटी में स्थित कल्पना चावला मेडिकल कॉलेज में मरीजों के लिए न तो बेड हैं और न ही चादर। पहले तो मरीजों को बेड ही नहीं मिलता, अगर मिलता है तो उस पर न चादर होती है और न ही कंबल। सर्दी के मौसम में लोगों को घर से कंबल और चादर लेकर आना पड़ता है। कुछ मरीजों ने बताया कि साहब हम तो घर से फोल्डिंग साथ लेकर आए हैं। अव्यवस्था का आलम यह है कि जच्चा-बच्चा तक को जमीन पर सोने के मजबूर होना पड़ रहा है।
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ऐसे में अंदाजा लगाया जा सकता है कि आखिर मरीज का इलाज कैसे हो सकता है। प्रदेश सरकार बेहतर स्वास्थ्य सेवाओं के लाख दावे कर रही है, परंतु इसकी जमीनी हकीकत कुछ और है। तापमान में आ रही गिरावट के कारण सर्दी में अस्पतालों में मरीजों की संख्या भी बढ़ गई है। सामान्य तौर पर 1200 तक रहने वाली मेडिकल कॉलेज की ओपीडी 2200 तक पहुंच गई है।
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अस्पताल में आए लोगों को इलाज के लिए पहले तो घंटों लाइनों में लगना पड़ता है। इसके बाद भी किसी-किसी को बेड़ नहीं मिल पाता। इसके बाद गंभीर बीमारी होने पर मरीज को दाखिल किया जाता है। औसतन रोजाना 40 से 50 मरीज दाखिल होते हैं। बता दें कि मेडिकल कॉलेज में करीब 300 बेड हैं, लेकिन इससे ज्यादा मरीज दाखिल हैं।

जमीन पर लेटने को मजबूर
अमर उजाला की टीम ने मंगलवार को मेडिकल कॉलेज का दौरा किया तो सरकार के दावों की हकीकत सामने आई। तस्वीरों में साफ है कि किस प्रकार से यहां पर मरीजों को परेशानी उठानी पड़ती है। टीम ने जब अस्पताल में दाखिल मरीजों से बातचीत तो पता लगा कि अस्पताल में चादरों का तो भारी टोटा है, उसी के साथ बेड़ भी मरीजों को नहीं मिलते।

गांव तखाना से आई हुई जच्चा रेखा ने बताया कि वह पिछले मंगलवार से अस्पताल में दाखिल है। अस्पताल में उसे बेड़ न मिलने के कारण दो दिन जमीन पर ही लेटकर गुजारने पड़े। जब जमीन पर ज्यादा ठंड महसूस होने लगी और लेटने में परेशानी होने लगी तो उसने अपने घर से फोल्डिंग मंगवाया।

बुजुर्ग रामकिशन ने बताया कि जिन मरीजों को मेडिकल कॉलेज में बेड़ मिला हुआ है, उनकी हालात भी ठीक नहीं है। अस्पताल के अधिकतर बेड़ों पर लेटने वाले मरीजों की शिकायत है कि अस्पताल में बेड़ पर बिछाने के लिए उन्हें चादर नहीं मिल रही है। अस्पताल में बेड़ों की संख्या 300 है, जिनमें से अधिकतर के कवर भी फटे हुए हैं। मरीजों को ऐसे में चादर न मिलने से ठंडे बेड़ों पर लेटने पर मजबूर होना पड़ रहा है।

रीना देवी ने बताया कि वह अस्पताल में दाखिल है, लेकिन सुबह से उसे अस्पताल प्रबंधन ने चार नहीं दी। उसने बताया कि अस्पताल के कर्मचारियों ने एक चादर दी थी। वह काफी गंदी है इसीलिए उसने वह चादर नहीं ली। वहीं सुमन वासी दरड़ ने बताया कि उसके बेटे को तेज बुखार है। उसके बेटे को डॉक्टरों ने एडमिट तो कर लिया, लेकिन बेड़ पर चादर न मिलने से बच्चा ठंड में ठिठुर रहा है। अस्पताल के बेड के कवर भी काफी फटे पड़े हैं। मरीजों का आरोप है कि प्रबंधन द्वारा कंबल नहीं दिये जाते, इससे कई बार सर्दी लगती है।


मेडिकल कॉलेज में चादरों की कमी है। इसके लिए वेयर हाउस में भी पता किया गया है, वहां भी मेडिकल कॉलेज के लिए चादरे नहीं हैं। उच्चाधिकारियों को पत्र लिखा गया है। जल्द ही मेडिकल कॉलेज में चादर आ जाएगी। कॉलेज शिफ्टिंग के बाद सभी समस्याओं का समाधान होगा। कंबल को लेकर स्टाफ से बात की जाएगी और मरीजों को उपलब्ध कराए जाएंगे।
- डॉ. योगेश शर्मा उप चिकित्सा अधिकारी, कल्पना चावला राजकीय मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल, करनाल
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