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सप्ताहभर में 100 नंबर पर 3000 फर्जी कॉल्स
अमर उजाला ब्यूरो/करनाल
Updated Tue, 07 Feb 2017 11:42 PM IST
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हाय डार्लिंग कैसी हो..., तुम बहुत खूबसूरत हो..., अपना पर्सनल नंबर दे दो बात करनी है...। कुछ इस तरह की अश्लील बातें इमरजेंसी पुलिस कंट्रोल रूम में तैनात सीएम सिटी की महिला पुलिसकर्मियों को प्रतिदिन सुननी पड़ रही हैं।
लघु सचिवालय में बने पुलिस कंट्रोल रूम के डायल 100 पर एक सप्ताह के अंदर 3600 कॉल्स आईं। इनमें से 3000 कॉल क्रैंक, प्रैंक, मिस्ड या ब्लैंक कॉल रहीं। इन फर्जी कॉल के कारण जहां कंट्रोल रूम में तैनात पुलिसकर्मी बुरी तरह प्रभावित हो रहे हैं, वहीं जरूरतमंदों तक मदद पहुंचाने में भी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। देश में पुलिस कंट्रोल रूम का गठन इमरजेंसी में लोगों तक मदद पहुंचाने के लिए किया गया है। कोई भी व्यक्ति आपात स्थिति में 100 नंबर पर फोन कर पुलिस से मदद मांग सकता है, लेकिन सीएम सिटी में कई मनचले और शराबी इस आपात फोन नंबर का दुरुपयोग कर रहे हैं। दिन हो या रात कंट्रोल रूम में मनचलों के फोन हर समय आते रहते हैं। हालांकि, रात को स्थिति अधिक गंभीर हो जाती है। रात को मनचलों के साथ शराबी भी कंट्रोलरूम में फोन कर अश्लील बातें करने के साथ गाली-गलौज करते हैं। पुलिसकर्मियों की मानें तो कंट्रोल रूम में फोन कर परेशान करने वाले एक नहीं बल्कि कई सिरफिरे हैं। वो कई कई बार फोन कर तरह-तरह से परेशान करते हैं। यदि कोई पुरुष पुलिसकर्मी फोन उठाता है तो उसे गालियां सुनने को मिलती हैं, तो कभी किसी झूठी वारदात का इत्तला देकर पुलिस का कीमती वक्त जाया करते हैं। वहीं, अगर महिला पुलिसकर्मी फोन उठाती है, तो उससे मनचले अश्लील बातें करने लगते हैं।
फर्जी कॉल से टेंशन में पुलिसकर्मी
मनचलों और शराबियों की फर्जी कॉल्स से पुलिस का कार्य प्रभावित हो रहा है। पुलिसकर्मियों का कहना है कि इन फर्जी कॉल्स की वजह से फोन लाइन बिजी रहती है। इससे कई बार हम जरूरतमंद हम तक नहीं पहुंच पाते और वे मदद से महरूम हो जाते हैं। साथ ही प्रतिदिन इस तरह की सैकड़ों कॉल सुनने से कंट्रोल रूम में तैनात पुलिसकर्मी मानसिक तनाव भी महसूस कर रहे हैं। एक महिला पुलिसकर्मी ने कहा कि, इन फर्जी फोन कॉल की वजह से काम करना मुश्किल हो जाता है। कॉलर गंदी-गंदी गालियां देते हैं, जिससे सिर में दर्द होने लगता है। मनोबल टूटता है, फोन उठाने से पहले दो बार सोचना पड़ता है। इससे हमें अपना कार्य करने में दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है।
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कार्रवाई न होने से बढ़ रहा दुस्साहस
आम जनता को 24 घंटे सुरक्षा देने का दावा करने वाली हरियाणा पुलिस अपने कर्मचारियों की सुरक्षा नहीं कर पा रही हैै। इसी तरह की कॉल से कभी दिल्ली पुलिस भी काफी परेशान थी, लेकिन अब वहां पर अगर कोई इमरजेंसी नंबर पर फोन कर अश्लील बातें करता है तो उस पर आईपीसी की धारा 353 सरकारी काम में बाधा डालना, 354डी मोबाइल फोन से अश्लील बातें करना जैसी धाराएं लगाकर कार्रवाई की जाती है। वहीं, यूपी पुलिस कॉलर की मोबाइल जब्त करने के साथ गिरफ्तार भी करती है। इस बारे में वरिष्ठ अधिवक्ता वीरेंद्र सिंह बहल का कहना है कि यह अपराध है और ऐसे मामलों में तुरंत प्रभाव से ऐसे लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज करके उनको काबू करना चाहिए।
वायस रिकॉर्डर है, पर मेमोरी हो जाती है फुल
कंट्रोल रूम में आने वाले सभी फोनों को रिकार्ड करने के लिए टेलीफोन पर वायस रिकॉर्डर लगा रखा है, लेकिन दिनभर आने वाली 300 से 400 के बीच काल के कारण उसकी मेमोरी भी फुल हो जाती है। वहीं, टेलीफोन ड्यूटी देने वाले कर्मचारी अपनी शिकायत अधिकारियों को अवगत करा चुके हैं, लेकिन काफी समय से इसका समाधान नहीं हो रहा है। अमर उजाला ने जब इस बारे में पुलिस कर्मचारियों से बात की तो उनका दर्द छलक गया। कर्मचारी कहते हैं कि वे लोगों की सेवा के लिए है, न कि किसी की गाली सुनने के लिए।
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लघु सचिवालय में बने पुलिस कंट्रोल रूम के डायल 100 पर एक सप्ताह के अंदर 3600 कॉल्स आईं। इनमें से 3000 कॉल क्रैंक, प्रैंक, मिस्ड या ब्लैंक कॉल रहीं। इन फर्जी कॉल के कारण जहां कंट्रोल रूम में तैनात पुलिसकर्मी बुरी तरह प्रभावित हो रहे हैं, वहीं जरूरतमंदों तक मदद पहुंचाने में भी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। देश में पुलिस कंट्रोल रूम का गठन इमरजेंसी में लोगों तक मदद पहुंचाने के लिए किया गया है। कोई भी व्यक्ति आपात स्थिति में 100 नंबर पर फोन कर पुलिस से मदद मांग सकता है, लेकिन सीएम सिटी में कई मनचले और शराबी इस आपात फोन नंबर का दुरुपयोग कर रहे हैं। दिन हो या रात कंट्रोल रूम में मनचलों के फोन हर समय आते रहते हैं। हालांकि, रात को स्थिति अधिक गंभीर हो जाती है। रात को मनचलों के साथ शराबी भी कंट्रोलरूम में फोन कर अश्लील बातें करने के साथ गाली-गलौज करते हैं। पुलिसकर्मियों की मानें तो कंट्रोल रूम में फोन कर परेशान करने वाले एक नहीं बल्कि कई सिरफिरे हैं। वो कई कई बार फोन कर तरह-तरह से परेशान करते हैं। यदि कोई पुरुष पुलिसकर्मी फोन उठाता है तो उसे गालियां सुनने को मिलती हैं, तो कभी किसी झूठी वारदात का इत्तला देकर पुलिस का कीमती वक्त जाया करते हैं। वहीं, अगर महिला पुलिसकर्मी फोन उठाती है, तो उससे मनचले अश्लील बातें करने लगते हैं।
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फर्जी कॉल से टेंशन में पुलिसकर्मी
मनचलों और शराबियों की फर्जी कॉल्स से पुलिस का कार्य प्रभावित हो रहा है। पुलिसकर्मियों का कहना है कि इन फर्जी कॉल्स की वजह से फोन लाइन बिजी रहती है। इससे कई बार हम जरूरतमंद हम तक नहीं पहुंच पाते और वे मदद से महरूम हो जाते हैं। साथ ही प्रतिदिन इस तरह की सैकड़ों कॉल सुनने से कंट्रोल रूम में तैनात पुलिसकर्मी मानसिक तनाव भी महसूस कर रहे हैं। एक महिला पुलिसकर्मी ने कहा कि, इन फर्जी फोन कॉल की वजह से काम करना मुश्किल हो जाता है। कॉलर गंदी-गंदी गालियां देते हैं, जिससे सिर में दर्द होने लगता है। मनोबल टूटता है, फोन उठाने से पहले दो बार सोचना पड़ता है। इससे हमें अपना कार्य करने में दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है।
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कार्रवाई न होने से बढ़ रहा दुस्साहस
आम जनता को 24 घंटे सुरक्षा देने का दावा करने वाली हरियाणा पुलिस अपने कर्मचारियों की सुरक्षा नहीं कर पा रही हैै। इसी तरह की कॉल से कभी दिल्ली पुलिस भी काफी परेशान थी, लेकिन अब वहां पर अगर कोई इमरजेंसी नंबर पर फोन कर अश्लील बातें करता है तो उस पर आईपीसी की धारा 353 सरकारी काम में बाधा डालना, 354डी मोबाइल फोन से अश्लील बातें करना जैसी धाराएं लगाकर कार्रवाई की जाती है। वहीं, यूपी पुलिस कॉलर की मोबाइल जब्त करने के साथ गिरफ्तार भी करती है। इस बारे में वरिष्ठ अधिवक्ता वीरेंद्र सिंह बहल का कहना है कि यह अपराध है और ऐसे मामलों में तुरंत प्रभाव से ऐसे लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज करके उनको काबू करना चाहिए।
वायस रिकॉर्डर है, पर मेमोरी हो जाती है फुल
कंट्रोल रूम में आने वाले सभी फोनों को रिकार्ड करने के लिए टेलीफोन पर वायस रिकॉर्डर लगा रखा है, लेकिन दिनभर आने वाली 300 से 400 के बीच काल के कारण उसकी मेमोरी भी फुल हो जाती है। वहीं, टेलीफोन ड्यूटी देने वाले कर्मचारी अपनी शिकायत अधिकारियों को अवगत करा चुके हैं, लेकिन काफी समय से इसका समाधान नहीं हो रहा है। अमर उजाला ने जब इस बारे में पुलिस कर्मचारियों से बात की तो उनका दर्द छलक गया। कर्मचारी कहते हैं कि वे लोगों की सेवा के लिए है, न कि किसी की गाली सुनने के लिए।