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आईटीआई लाठीचार्ज प्रकरण : एएसआई बोला-मैंने नहीं मारे डंडे, प्रिंसिपल ने वीडियो दिखाई तो छूटे पसीने
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अमर उजाला ब्यूरो
करनाल। आईटीआई विद्यार्थियों, इंस्ट्रक्टरों और प्रिंसिपल पर लाठीचार्ज के मामले में बुधवार को मजिस्ट्रेटी जांच कमेटी के सामने बुधवार को एक और एएसआई सुखदेव सिंह पेश हुआ। पूछताछ के दौरान पहले तो पुलिस कर्मचारी ने प्रिंसिपल और शिक्षकों पर लाठीचार्ज करने से साफ इंकार कर दिया। हालांकि, उसी समय प्रिंसिपल ने कमेटी के साथ लाठीचार्ज करते वीडियो दिखा दी। इस पर पुलिस कर्मचारी के पसीने छूट गए। जब पुलिस कर्मचारी से पूछा कि वह प्रिंसिपल रूम में क्यों घुसे? इस पर सुखदेव सिंह ने जवाब दिया कि मुझे इसकी जानकारी नहीं थी कि ये प्रिंसिपल रूम है।
गौरतलब है कि 14 जून को भी एसडीएम नरेंद्र पाल मलिक की अध्यक्षता में कमेटी के सामने केवल एएसआई सतीश कुमार पेश हुआ था। एएसआई सुखदेव सिंह व राजपाल पेश नहीं हुए थे। इस पर एसडीएम ने इन दोनों को पेश होने के लिए 19 जून की तिथि तय की थी। इसके साथ ही सीडी में लाठीचार्ज करते दिख रहे सिटी थाना प्रभारी हरजिंद्र सिंह को भी दोबारा से पेश होने के लिए कहा गया था, लेकिन बुधवार को ऐसा नहीं हुआ। इससे पहले, एसडीएम नरेंद्र सिंह, आईटीआई के डिप्टी डायरेक्टर व आईटीआई करनाल के संधु शामिल रहे। कमेटी के सामने हर बार की तरह
जांच पूरी, सभी पुलिस कर्मचारियों के बयान एक जैसे
बुधवार को पूरी हो गई। जांच की अहम बात ये है कि अब तक सभी पुलिस कर्मचारियों ने एक जैसे ही जवाब दिए हैं। तीन सदस्यीय जांच कमेटी के सामने सभी ने एक बात कही है कि, उन्हें नहीं पता था कि ये आईटीआई के प्रिंसिपल का रूम है और सीट पर बैठे व्यक्ति प्रिंसिपल हैं। हालांकि, कमरे के बाहर मोटे अक्षरों में प्रिंसिपल रूम लिखा हुआ है। हालांकि, बुधवार को दो में से एक पुलिस कर्मचारी सुखदेव सिंह कमेटी के सामने पेश हुए, राजपाल नहीं पहुंचे।
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छात्र की मौत के बाद गुस्साए थे
11 अप्रैल को रोडवेज बस की चपेट में आने से एक छात्र निकित की मौत हो गई थी। इसके बाद 12 अप्रैल की सुबह आईटीआई के विद्यार्थियों ने चौक पर जाम लगाने की कोशिश थी। इस दौरान, आईटीआई के विद्यार्थियों ने पुलिस पर पथराव किया था। हालात इतने खराब हो गए थे कि पुलिस को हवाई फायर तक करने पड़े। बाद में पुलिस ने भी छात्रों पर पथराव किया था और छात्रों को दौड़ा दिया था। बाद में पुलिस ने विद्यार्थियों पर जमकर लाठीचार्ज किया था, इतना ही नहीं आईटीआई के अंदर घुसकर छात्राओं और शिक्षकों पर भी लाठीचार्ज किया था। आईटीआई के प्रिंसिपल बलदेव सिंह पर भी लाठीचार्ज किया था। इस मामले में 103 विद्यार्थियों को गिरफ्तार किया गया था। बाद में सीएम ने मामले की जांच के आदेश दिए थे। एएसपी मुकेश कुमार को पुलिस विभाग की जांच के आदेश दिए थे, जबकि एसडीएम करनाल नरेंद्र पाल मलिक की अध्यक्षता में तीन सदस्यीय कमेटी को न्यायिक जांच के आदेश दिए थे।
संतोषजनक जवाब नहीं दे पाए पुलिस कर्मचारी : प्रिंसिपल
इस बारे में आईटीआई के प्रिंसिपल बलदेव सिंह का कहना है कि बुधवार को एक पुलिस कर्मचारी ही पेश हुआ, वो हमारे सवालों का संतोषजनक जवाब नहीं दे पाया। एसडीएम नरेंद्र पाल मलिक ने आश्वासन दिया है कि ये सुनवाई की अंतिम तारीख थी। अब इसकी जांच रिपोर्ट आएगी। जांच रिपोर्ट के बाद ही आगामी फैसला लिया जाएगा।
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करनाल। आईटीआई विद्यार्थियों, इंस्ट्रक्टरों और प्रिंसिपल पर लाठीचार्ज के मामले में बुधवार को मजिस्ट्रेटी जांच कमेटी के सामने बुधवार को एक और एएसआई सुखदेव सिंह पेश हुआ। पूछताछ के दौरान पहले तो पुलिस कर्मचारी ने प्रिंसिपल और शिक्षकों पर लाठीचार्ज करने से साफ इंकार कर दिया। हालांकि, उसी समय प्रिंसिपल ने कमेटी के साथ लाठीचार्ज करते वीडियो दिखा दी। इस पर पुलिस कर्मचारी के पसीने छूट गए। जब पुलिस कर्मचारी से पूछा कि वह प्रिंसिपल रूम में क्यों घुसे? इस पर सुखदेव सिंह ने जवाब दिया कि मुझे इसकी जानकारी नहीं थी कि ये प्रिंसिपल रूम है।
गौरतलब है कि 14 जून को भी एसडीएम नरेंद्र पाल मलिक की अध्यक्षता में कमेटी के सामने केवल एएसआई सतीश कुमार पेश हुआ था। एएसआई सुखदेव सिंह व राजपाल पेश नहीं हुए थे। इस पर एसडीएम ने इन दोनों को पेश होने के लिए 19 जून की तिथि तय की थी। इसके साथ ही सीडी में लाठीचार्ज करते दिख रहे सिटी थाना प्रभारी हरजिंद्र सिंह को भी दोबारा से पेश होने के लिए कहा गया था, लेकिन बुधवार को ऐसा नहीं हुआ। इससे पहले, एसडीएम नरेंद्र सिंह, आईटीआई के डिप्टी डायरेक्टर व आईटीआई करनाल के संधु शामिल रहे। कमेटी के सामने हर बार की तरह
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जांच पूरी, सभी पुलिस कर्मचारियों के बयान एक जैसे
बुधवार को पूरी हो गई। जांच की अहम बात ये है कि अब तक सभी पुलिस कर्मचारियों ने एक जैसे ही जवाब दिए हैं। तीन सदस्यीय जांच कमेटी के सामने सभी ने एक बात कही है कि, उन्हें नहीं पता था कि ये आईटीआई के प्रिंसिपल का रूम है और सीट पर बैठे व्यक्ति प्रिंसिपल हैं। हालांकि, कमरे के बाहर मोटे अक्षरों में प्रिंसिपल रूम लिखा हुआ है। हालांकि, बुधवार को दो में से एक पुलिस कर्मचारी सुखदेव सिंह कमेटी के सामने पेश हुए, राजपाल नहीं पहुंचे।
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छात्र की मौत के बाद गुस्साए थे
11 अप्रैल को रोडवेज बस की चपेट में आने से एक छात्र निकित की मौत हो गई थी। इसके बाद 12 अप्रैल की सुबह आईटीआई के विद्यार्थियों ने चौक पर जाम लगाने की कोशिश थी। इस दौरान, आईटीआई के विद्यार्थियों ने पुलिस पर पथराव किया था। हालात इतने खराब हो गए थे कि पुलिस को हवाई फायर तक करने पड़े। बाद में पुलिस ने भी छात्रों पर पथराव किया था और छात्रों को दौड़ा दिया था। बाद में पुलिस ने विद्यार्थियों पर जमकर लाठीचार्ज किया था, इतना ही नहीं आईटीआई के अंदर घुसकर छात्राओं और शिक्षकों पर भी लाठीचार्ज किया था। आईटीआई के प्रिंसिपल बलदेव सिंह पर भी लाठीचार्ज किया था। इस मामले में 103 विद्यार्थियों को गिरफ्तार किया गया था। बाद में सीएम ने मामले की जांच के आदेश दिए थे। एएसपी मुकेश कुमार को पुलिस विभाग की जांच के आदेश दिए थे, जबकि एसडीएम करनाल नरेंद्र पाल मलिक की अध्यक्षता में तीन सदस्यीय कमेटी को न्यायिक जांच के आदेश दिए थे।
संतोषजनक जवाब नहीं दे पाए पुलिस कर्मचारी : प्रिंसिपल
इस बारे में आईटीआई के प्रिंसिपल बलदेव सिंह का कहना है कि बुधवार को एक पुलिस कर्मचारी ही पेश हुआ, वो हमारे सवालों का संतोषजनक जवाब नहीं दे पाया। एसडीएम नरेंद्र पाल मलिक ने आश्वासन दिया है कि ये सुनवाई की अंतिम तारीख थी। अब इसकी जांच रिपोर्ट आएगी। जांच रिपोर्ट के बाद ही आगामी फैसला लिया जाएगा।