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दादी बोली हे भगवान इस दिन को देखने से पहले मेरी मौत क्यों नहीं आई,

Mon, 27 Aug 2018 11:40 PM IST
Updated Mon, 27 Aug 2018 11:40 PM IST
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दादी बोली हे भगवान इस दिन को देखने से पहले मेरी मौत क्यों नहीं आई,

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दादी बोली हे भगवान इस दिन को देखने से पहले मेरी मौत क्यों नहीं आई, अपनी पोती को मैने लाल में जोड़े में भेजा था, लेकिन आज भगवान ने उसकी मां के साथ उसे भी कफन पहना दिया।
अमर उजाला ब्यूरो
करनाल।
सदर बाजार में फ्रिजर में रखे मां के शव को देखकर रो रही बेटी की करंट लगने से मौत पर रोते हुए दादी बोली हे भगवान इस दिन को देखने से पहले मेरी मौत क्यों नहीं आई, अपनी पोती को मैने लाल में जोड़े में भेजा था, लेकिन आज भगवान ने उसकी मां के साथ उसे भी कफन पहना दिया। इतना कहते ही मृतक मोना की दादी बेसुध हो गई। इस हादसे से सदर बाजार व मृतक मोना के ससुराल में भी मातम छा गया। सूचना मिलते ही ससुराल पक्ष के लोग मौके पर पहुंचे। इस बड़ी घटना के बाद प्रशासन को कड़ा एक्शन लेना चाहिए। क्योंकि श्मशान घाट में रखे फ्रिजर की जांच करानी बहुत आश्वयक है। क्योंकि इस तरह का हादसा भविष्य में भी हो सकता है। बता दें सदर बाजार निवासी बिमला की उल्टी व दस्त लगने से करीब 15 दिनों से तबीयत खराब चल रही थी, अस्पताल में इलाज कराने के बाद भी उसकी तबीयत में कोई सुधार नहीं आया। 26 अगस्त की रात को बिमला ने दमतोड़ दिया। शव को रखने के लिए उनके परिजन श्मशान घाट से फ्रिजर लेकर आए। लेकिन श्मशानघाट के कर्मचारी ने ठीक कहकर खराब फ्रिजर दे दिया और जब बिमला की बेटी मोना अपनी मां के पास बैठकर विलाप कर रही थी तो सुबह छह बजे लाइट आने पर उसे भी करंट लग गया और उसकी मौत हो गई। बता दें इस परिवार में मोना की दादी प्रेमवती, पिता रमेश, मां बिमला, भाई तन्नू उसकी पत्नी आशु व बेटी तान्या, भाई मन्नू व रमेश का भाई दलिप उसकी पत्नी व तीन बच्चे रहते थे। मोना की छह महीने पहले शादी की थी।
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मां की मौत के बाद छह घंटे ही जी पाई बेटी
रमेश ने अपनी बेटी मोना की शादी छह महीने पहले 6 मार्च को बबैन निवासी संजय के साथ की थी। वह अपनी बीमार मां की देखरेख के लिए पिछले दस दिनों से घर ही थी। लेकिन उसे क्या पता था कि उसे भी अपने मां के साथ ही जाना है। मां की मौत के बाद छह घंटे ही उसकी बेटी जी पाई। बिमला की मौत रात करीब 12 बजे हुई और उसकी बेटी मोना की मौत करीब छह बजे लाइट आते ही करंट लगने से हो गई।
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इतनी बड़ी लापरवाही के बाद भी जिम्मेदारी लेने को नहीं हो रहा कोई तैयार
हांसी रोड स्थित श्मशान सुधार सभा का कोई भी सदस्य इस हादसे में एक शब्द भी बोलने के तैयार नहीं है। जानकारी अनुसार इस सभा की नई कार्यकारिणी का गठन किया जाना है। इसके लिए पांच सदस्य भी चुने गए हैं। लेकिन जब इन सभी के पास फोन किया गया तो कुछ सदस्य ने तो फोन ही नहीं उठाया और जिन्होंने उठाया, वे इस हादसे के बारे में एक शब्द भी नहीं बोले। बता दें इस सभा में सतीश रहेजा, सुदेश गुलाटी, अमरजीत चौधरी, रामलाल व अनिल कुमार भाटिया है।


सभा को पहले से पता था इस फ्रिजर में आता है करंट।
श्मशान सुधार सभा के सदस्यों को पहले से ही पता था कि यह फ्रिजर खराब है ओर इसमें करंट आता है। क्योंकि कुछ दिनों में सदर बाजार के क्षेत्र में ही तीन व्यक्तियों की मौत हुई थी और वहां भी इस फ्रिजर से करंट आ रहा था। उन लोगों करंट की बात सभा को बताई थी। लेकिन फिर भी सभा के सदस्यों बड़ी लापरवाही बरती, हालांकि फ्रिजर लेने गए व्यक्तियों को बताया गया था कि यह फ्रिजर ठीक करा दिया है। यदि वे यह बात नहीं बताते तो घर के सदस्य उस फ्रिजर से दूर रहते और मोना की जान बच जाती। पुलिस ने श्मशान सुधार सभा के खिलाफ मामला दर्ज कर लिया है।
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