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हरियाणा ग्रामीण विकास संस्थान के निदेशक पर गबन और भ्रष्टाचार के आरोप
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नीलोखेड़ी स्थित हरियाणा ग्रामीण विकास संस्थान के निदेशक अतर सिंह पर गबन व भ्रष्टाचार के आरोपों के मामले में राज्य चौकसी ब्यूरो ने भी कार्रवाई की भी सिफारिश की है। ब्यूरो ने हरियाणा सिविल सेवाएं नियमावली 1987 नियमावली 2016 के नियम-7 के तहत कार्यवाही की सिफारिश की है। यह सिफारिश विभाग की ओर से विकास एवं पंचायत विभाग के प्रधान सचिव से की गई है।
गांव बीर बड़ालवा निवासी लव कुमार ने शिकायत में बताया कि आरटीआई से प्राप्त सूचना में पता चला कि 27 अप्रैल, 2017 से 20 जून 2018 तक सहायक प्रोफेसर अतर सिंह ने सरकारी गाड़ी का प्रयोग किया। 290 वर्किंग दिनों में से 260 से ज्यादा यात्राएं की हैं। आरोप है कि इनमें अधिकतर फर्जी हैं। गाड़ी का मासिक तेल 60 हजार रुपये और प्रतिदिन लगभग 300 किलोमीटर की दूरी तय की है। इतना ही नहीं रविवार और शनिवार को भी यात्रा की हुई हैं, जोकि सरेआम सरकारी पैसा का दुरुपयोग है। आरोप है कि निजी पूर्ति के लिए डेढ़ साल से वाहन का दुरुपयोग किया जा रहा है। दूसरा ट्रेनिंग सहायक सामान बैग, पैन व पैड में भी भ्रष्टाचार किया हुआ है। 20 हजार बैग, पैन व पैड का निजी जानकार को टेंडर दिया है। विज्ञापन में करीब 60 हजार के लगभग सामान था। जो करीब एक करोड़ में खरीदा था। क्वालिटी घटिया, संख्या कम और महंगे दाम पर ली गई है। इस मामले की शिकायत पर जांच राज्य चौकसी ब्यूरो को सौंपी गई थी। विजिलेंस ने इस मामले में कार्यवाही की अनुशंसा की है। उधर, अत्तर सिंह का कहना है कि ये आरोप निराधार हैं।
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गांव बीर बड़ालवा निवासी लव कुमार ने शिकायत में बताया कि आरटीआई से प्राप्त सूचना में पता चला कि 27 अप्रैल, 2017 से 20 जून 2018 तक सहायक प्रोफेसर अतर सिंह ने सरकारी गाड़ी का प्रयोग किया। 290 वर्किंग दिनों में से 260 से ज्यादा यात्राएं की हैं। आरोप है कि इनमें अधिकतर फर्जी हैं। गाड़ी का मासिक तेल 60 हजार रुपये और प्रतिदिन लगभग 300 किलोमीटर की दूरी तय की है। इतना ही नहीं रविवार और शनिवार को भी यात्रा की हुई हैं, जोकि सरेआम सरकारी पैसा का दुरुपयोग है। आरोप है कि निजी पूर्ति के लिए डेढ़ साल से वाहन का दुरुपयोग किया जा रहा है। दूसरा ट्रेनिंग सहायक सामान बैग, पैन व पैड में भी भ्रष्टाचार किया हुआ है। 20 हजार बैग, पैन व पैड का निजी जानकार को टेंडर दिया है। विज्ञापन में करीब 60 हजार के लगभग सामान था। जो करीब एक करोड़ में खरीदा था। क्वालिटी घटिया, संख्या कम और महंगे दाम पर ली गई है। इस मामले की शिकायत पर जांच राज्य चौकसी ब्यूरो को सौंपी गई थी। विजिलेंस ने इस मामले में कार्यवाही की अनुशंसा की है। उधर, अत्तर सिंह का कहना है कि ये आरोप निराधार हैं।
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