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Karnal News: गोबर और गोमूत्र बनेगा आजीविका का साधन, बनेंगी पूजन सामग्री

Amar Ujala Bureau अमर उजाला ब्यूरो
Updated Mon, 24 Mar 2025 02:15 AM IST
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Cow dung and cow urine will become a means of livelihood and will become worship material
- बनेंगे गमले, दीवार सजाने के लिए मूर्तियां, हवन के लिए समिधा और नहाने के लिए साबुन
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- सेवा भारती ने करनाल से शुरू किया गो उत्पाद स्वावलंबी प्रकल्प के तहत गो उत्पाद निर्माण


माई सिटी रिपोर्टर

करनाल। अब लोगों के लिए गाय का दूध, दही और घी ही काम में नहीं आएगा बल्कि गोबर और गोमूत्र भी आजीविका का साधन बनेगा। कर्ण नगरी से गोवंश को बचाने और गोपालकों को आत्मनिर्भर बनाने की शुरुआत की जा रही है। गाय के गोबर से अब भगवान की मूर्तियां, वंदनवार, पूजा की माला, धूप बत्तियां, शिव स्वरूप के साथ-साथ अन्य कलाकृतियां बनाई जाएंगी।
सेवा भारती परिसर में गोमयी स्वावलंबी यात्रा की प्रेरणा लेकर गो उत्पाद स्वावलंबी प्रकल्प के तहत गो उत्पाद निर्माण अभियान की शुरुआत की जा रही है। इसके पीछे मुख्य उद्देश्य गोवंश को बचाना है। नौ मार्च से महिलाओं के लिए पंद्रह दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम चल रहा है। यहां पर प्रदेश की चुनिंदा महिलाओं को प्रशिक्षण देने के लिए महाराष्ट्र के नागपुर से प्रशिक्षक आए हैं। इस प्रशिक्षण की अगुवाई जगाधरी से आए तरुण जैन कर रहे हैं।
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गाय के गोबर और मूत्र से दैनिक उपयोग में आने वाली सामग्री बनाई जा रही है। ये महिलाएं प्रदेश भर में जाकर महिलाओं को प्रशिक्षित करेंगी। यह प्रशिक्षण कार्यक्रम सेवा भारती के सुरेंद्र गोयल की देख रेख में चल रहा है। महाराष्ट्र से आए सचिन और आशीष ने बताया कि उन्होंने नागपुर और विदर्भ के आदिवासियों के इलाके में इस अभियान को शुरू किया है। इसके माध्यम से आदिवासियों को आर्थिक रूप से मजबूत बनाना था। वहीं पर उन्हें गो संवर्धन के साथ जोड़ कर सनातन संस्कृति के नजदीक लाना था। अब तक दिल्ली, पंजाब, मध्य प्रदेश, उत्तर प्रदेश, महाराष्ट्र राजस्थान पंजाब सहित देश के विविध भागों में प्रशिक्षण दिया गया है। इसके लिए उन गायों के गोबर का प्रयोग किया जाता है जिन्हें बांधा नहीं जाता है और न ही उन्हें केमिकल दिया जाता है। इस अभियान के माध्यम से ग्रामीण महिलाओं को आर्थिक रूप से स्वावलंबी बनाया जाएगा।
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एंटी रेडिएशन मोबाइल बैक कवर तक बनेंगे
महाराष्ट्र से आए सचिन और आशीष ने बताया कि प्रशिक्षण के दौरान गोमूत्र अर्क 12 प्रकार के (भिन्न-भिन्न रोगों के लिए), घनवटी नौ प्रकार की (भिन्न-भिन्न रोगों के लिए), पित्तशामक चूर्ण, काला दंत मंजन, सादा दंत मंजन, गोमूत्र से फिनाइल गोबर से डिजाइनर कंडे कपूर वाले बनाए जाएंगे। इसके अलावा गोबर से सजावट का सामान बनेगा। इनमें मोमेंटो माला, एंटी रेडिएशन मोबाइल बैक कवर तक बनाया जाएगा। गोबर से राखियां, नेमप्लेट, एंटी रेडिएशन मोबाइल स्टैंड, तोरण, संब्रानी कप, धूपबत्ती छह प्रकार की, मूर्तियां, समिधा/लकड़ी, गमले, सुगंधित ऊर्जा दीपक, अग्निहोत्र व बलिवैश्व यज्ञ की किट, मोबाइल चार्जिंग स्टैंड, घड़ी, सिंहासन, चौकी, फोटो स्टैंड, सीड बॉल, बड़े आकार के कंडे, कीचेन, घी बनाने की शास्त्रोक्त विधि, नेत्र औषधि, पंचगव्य घृत, कर्णोषधि, मरहम, लेप, अंगराग (नहाने का पाउडर) भी बनाया जाएगा।
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