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Karnal News: दो सप्ताह से बैंकों में फंसे उपभोक्ताओं के चेक

Sat, 25 Oct 2025 01:47 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, करनाल
संवाद न्यूज एजेंसी, करनाल Updated Sat, 25 Oct 2025 01:47 AM IST
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Consumers' cheques stuck in banks for two weeks
जितेंद्र नरवाल
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करनाल। भारतीय रिजर्व बैंक की ओर से लागू किया गया चेक ट्रंकेशन सिस्टम (सीटीएस) जिले के बैंकों में 20 दिन बीत जाने के बाद भी पूरी तरह लागू नहीं हो पाया है। इसके चलते बैंक उपभोक्ताओं को चेक क्लियरेंस में भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। पहले करीब तीन दिनों में क्लियर होने वाले चेक सीटीएस से एक दिन में क्लियर होने थे। अब वे दो सप्ताह से अधिक समय से लंबित पड़े हैं। बैंक प्रबंधन उपभोक्ताओं को केवल यही भरोसा दे रहे हैं कि सॉफ्टवेयर अपडेट जारी है।

सीटीएस के लागू न हो पाने से व्यापारिक वर्ग सबसे ज्यादा प्रभावित है। रोजमर्रा के भुगतान और बिल सेटलमेंट में देरी हो रही है। कई व्यापारियों के चेक दो सप्ताह से ज्यादा समय से अटके पड़े हैं, जिससे उनके कारोबार पर सीधा असर पड़ा है। दूसरी ओर बैंकों के अधिकारियों का कहना है कि सीटीएस सिस्टम को लागू करने के लिए तकनीकी रूप से सॉफ्टवेयर का समायोजन चल रहा है। सभी शाखाओं में अपडेट पूरा होते ही सिस्टम चालू कर दिया जाएगा। अभी कुछ तकनीकी अड़चनें हैं, जिन्हें तकनीकी टीम दूर कर रही है।
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36 बैंकों की 390 शाखाओं में होना था सीटीएस लागू, रोजाना 550 से अधिक चेक फंसे



जिले में 36 बैंकों की करीब 390 शाखाओं में यह सिस्टम 4 अक्टूबर से लागू होना था। इससे 7.5 लाख से अधिक बैंक उपभोक्ताओं को लाभ मिलना था। सीटीएस का उद्देश्य था कि एक ही दिन में सभी बैंकों के चेक क्लियर हो जाएं और भुगतान प्रक्रिया तेज हो। लेकिन तकनीकी खामियों और बैंकों के बीच तालमेल की कमी के कारण यह सिस्टम अब तक पूरी तरह सक्रिय नहीं हो पाया है। जिले के बैंकों में रोजाना औसतन 500 से 550 चेक जमा होते हैं, जिनकी क्लियरिंग नहीं हो पा रही। बैंककर्मी इन चेकों को क्लियरिंग अपडेट में बता कर ग्राहकों को प्रतीक्षा में रखे हुए हैं। कुछ बैंकों ने सीटीएस लागू होने की तैयारी में अपने पुराने चेक बॉक्स भी बंद कर दिए हैं, जिससे उपभोक्ताओं की परेशानी और बढ़ गई है।
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चेक ट्रंकेशन सिस्टम
सीटीएस यानी चेक ट्रंकेशन सिस्टम एक ऐसा डिजिटल सिस्टम है, जिसमें चेक की स्कैन की गई इमेज को ही क्लियरिंग के लिए भेजा जाता है। इससे चेक के भौतिक आदान-प्रदान की जरूरत खत्म हो जाती है। यह प्रणाली धोखाधड़ी पर अंकुश लगाने, क्लियरिंग में तेजी लाने और बैंकों के कार्यभार को कम करने के लिए शुरू की गई थी। सीटीएस में हर बैंक को तीन-तीन घंटे के दो स्लॉट में काम करना था। इसमें पहले तीन घंटे में चेक की क्लियरिंग प्रक्रिया और अगले तीन घंटे में भुगतान की प्रक्रिया पूरी करनी थी। इस सिस्टम के तहत चेक को फिजिकली के बजाए डिजिटल इमेज से क्लियरिंग समय घटाकर एक दिन करने का लक्ष्य रखा गया था।

आरबीआई की गाइडलान के अनुसार बैंकों को सीटीएस लागू करने के निर्देश दिए गए हैं। काफी बैंकों ने इसकी शुरुआत भी कर दी है। जो नहीं कर पाए उनको फिर से निर्देश जारी किए जाएंगे। इससे बैंक उपभोक्ताओं को एक ही दिन में चेक क्लियर होने और भुगतान मिलने की सुविधा मिलेगी।
- सुशील हंदुजा, एलडीएम, करनाल
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