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Karnal News: उपभोक्ता आयोग ने बीमा कंपनी को दिया आठ करोड़ अदा करने का आदेश
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देव शर्मा
करनाल। जिला उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग करनाल ने एक बीमा कंपनी को करनाल के याची के पक्ष में 7 करोड़ 95 लाख 61 हजार 760 रुपये के क्लेम व नौ प्रतिशत ब्याज सहित करीब आठ करोड़ रुपये से अधिक का भुगतान का आदेश दिया है। बीमा कंपनी की ओर से क्लेम देने से इनकार करने के बाद मृतक बीमा धारक की पत्नी ने आयोग का दरवाजा खटखटाया था।
करनाल के मेरठ रोड निवासी वीरेंद्र ताया ने टाटा एआईए महाराष्ट्र बीमा कंपनी से बीमा कराया था। उसकी किश्त 15670 रुपये प्रतिमाह थी। वह यूएसए में रहने लगा था। नौ सितंबर 2022 को भारत लौटा था। तब तक उन्होंने 32 किस्तों में 5,01,440 रुपये का बीमा कंपनी को भुगतान कर दिया था। 11 सितंबर, 2022 को घर पहुंचे। 12 सितंबर को उसे दौरा पड़ गया। करनाल के कल्पना चावला राजकीय मेडिकल कॉलेज में भर्ती कराया गया लेकिन 13 सितंबर, 2022 को उसकी मृत्यु हो गई। उसे हाईपोक्सिक ब्रेन इंजरी का होना बताया गया था। जब बीमा क्लेम मांगा गया तो बीमा कंपनी ने उसकी प्रीमियम के पैसे वापस करके ये कहकर क्लेम देने से इनकार कर किया कि बीमाधारक को नशा करता था।
इसके बाद मृतक बीमाधारक की पत्नी ईशा चौधरी ने मामले को करनाल के जिला उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग में याचिका दायर करके बीमा कंपनी से पति के नाम बीमा क्लेम दिलाने की गुहार लगाई। मामले की सुनवाई आयोग के अध्यक्ष जसवंत सिंह, सदस्य नीरू अग्रवाल व सर्वजीत कौर ने की। दोनों पक्षों को सुनने के बाद उपभोक्ता आयोग ने बीमा कंपनी को सात करोड़ 95 लाख 61 हजार 760 रुपये क्लेम, नौ प्रतिशत ब्याज देने का आदेश दिया। इसके साथ ही उपभोक्ता अदालत ने बीमा कंपनी को 75 हजार रुपये का हर्जाना और 44 हजार रुपये का वाद व्यय भी याचिकाकर्ता के पक्ष में का आदेश दिया है।
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करनाल। जिला उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग करनाल ने एक बीमा कंपनी को करनाल के याची के पक्ष में 7 करोड़ 95 लाख 61 हजार 760 रुपये के क्लेम व नौ प्रतिशत ब्याज सहित करीब आठ करोड़ रुपये से अधिक का भुगतान का आदेश दिया है। बीमा कंपनी की ओर से क्लेम देने से इनकार करने के बाद मृतक बीमा धारक की पत्नी ने आयोग का दरवाजा खटखटाया था।
करनाल के मेरठ रोड निवासी वीरेंद्र ताया ने टाटा एआईए महाराष्ट्र बीमा कंपनी से बीमा कराया था। उसकी किश्त 15670 रुपये प्रतिमाह थी। वह यूएसए में रहने लगा था। नौ सितंबर 2022 को भारत लौटा था। तब तक उन्होंने 32 किस्तों में 5,01,440 रुपये का बीमा कंपनी को भुगतान कर दिया था। 11 सितंबर, 2022 को घर पहुंचे। 12 सितंबर को उसे दौरा पड़ गया। करनाल के कल्पना चावला राजकीय मेडिकल कॉलेज में भर्ती कराया गया लेकिन 13 सितंबर, 2022 को उसकी मृत्यु हो गई। उसे हाईपोक्सिक ब्रेन इंजरी का होना बताया गया था। जब बीमा क्लेम मांगा गया तो बीमा कंपनी ने उसकी प्रीमियम के पैसे वापस करके ये कहकर क्लेम देने से इनकार कर किया कि बीमाधारक को नशा करता था।
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इसके बाद मृतक बीमाधारक की पत्नी ईशा चौधरी ने मामले को करनाल के जिला उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग में याचिका दायर करके बीमा कंपनी से पति के नाम बीमा क्लेम दिलाने की गुहार लगाई। मामले की सुनवाई आयोग के अध्यक्ष जसवंत सिंह, सदस्य नीरू अग्रवाल व सर्वजीत कौर ने की। दोनों पक्षों को सुनने के बाद उपभोक्ता आयोग ने बीमा कंपनी को सात करोड़ 95 लाख 61 हजार 760 रुपये क्लेम, नौ प्रतिशत ब्याज देने का आदेश दिया। इसके साथ ही उपभोक्ता अदालत ने बीमा कंपनी को 75 हजार रुपये का हर्जाना और 44 हजार रुपये का वाद व्यय भी याचिकाकर्ता के पक्ष में का आदेश दिया है।
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