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साधु की निंदा करना सबसे बड़ा पाप : क्षुल्लिका
Sat, 14 Sep 2024 06:22 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, करनाल
संवाद न्यूज एजेंसी, करनाल
Updated Sat, 14 Sep 2024 06:22 AM IST
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संवाद न्यूज एजेंसी
करनाल। दिगंबर जैन धर्म के दसलक्षण महापर्व के पांचवें दिन शुक्रवार को जैन मंदिरों में सुगंध दशमी का पर्व मनाया गया। जैन मंदिरों में सुबह से ही श्रद्धालु आते रहे। मिठ्ठन मोहल्ला स्थित दिंगंबर जैन मंदिर में संगीतमय पूजन और शाम का महाआरती का आयोजन किया गया। जैन साध्वी क्षुल्लिका ज्ञानमोती महाराज ने कहा कि साधु की निंदा सबसे बड़ा पाप होता हैं।
जैन साध्वी ज्ञानमोती माता का चतुर्मास चल रहा हें। उनके निर्देशन में प्रति दिन धर्म की प्रभावना हो रही हैं। धर्मालुओं को धूप दशमी की कथा सुनाते हुए जैन साध्वी क्षुल्लिका ज्ञानमोती महाराज ने कहा कि साधुओं को कष्ट पहुचाने की सजा जन्म जन्मातंर तक मिलती हैं। उन्होंने कहा कि आज साधु और महात्माओं के कारण धर्म का अस्तित्व बचा हुआ हैं। एक तरह से साधु समाज की धरोहर होते हैं।
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करनाल। दिगंबर जैन धर्म के दसलक्षण महापर्व के पांचवें दिन शुक्रवार को जैन मंदिरों में सुगंध दशमी का पर्व मनाया गया। जैन मंदिरों में सुबह से ही श्रद्धालु आते रहे। मिठ्ठन मोहल्ला स्थित दिंगंबर जैन मंदिर में संगीतमय पूजन और शाम का महाआरती का आयोजन किया गया। जैन साध्वी क्षुल्लिका ज्ञानमोती महाराज ने कहा कि साधु की निंदा सबसे बड़ा पाप होता हैं।
जैन साध्वी ज्ञानमोती माता का चतुर्मास चल रहा हें। उनके निर्देशन में प्रति दिन धर्म की प्रभावना हो रही हैं। धर्मालुओं को धूप दशमी की कथा सुनाते हुए जैन साध्वी क्षुल्लिका ज्ञानमोती महाराज ने कहा कि साधुओं को कष्ट पहुचाने की सजा जन्म जन्मातंर तक मिलती हैं। उन्होंने कहा कि आज साधु और महात्माओं के कारण धर्म का अस्तित्व बचा हुआ हैं। एक तरह से साधु समाज की धरोहर होते हैं।
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