{"_id":"61d363e25180c938706c6cb7","slug":"concern-expressed-over-falling-groundwater-level-karnal-news-knl949063115","type":"story","status":"publish","title_hn":"गिरते भूजल स्तर पर जताई चिंता","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
गिरते भूजल स्तर पर जताई चिंता
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
करनाल। अटल भूजल योजना के तहत सोमवार को भूजल कोष विभाग के तकनीकी अधिकारी डॉ. महावीर सिंह की अध्यक्षता में हुई बैठक में गिरते भूजल स्तर पर चिंता जताई गई। डॉ. सिंह ने बताया कि वर्ष 1974 में करनाल में भूजल स्तर 5.3 मीटर था और जून 2000 में 8.5 मीटर पर पहुंच गया। इस अवधि में भूजल स्तर 3.20 मीटर नीचे खिसक गया। वर्ष 2000 में करनाल जिले में सबमर्सिबल ट्यूबवेल का चलन जोरों पर हो गया। इससे भूजल में भारी गिरावट आई। वर्ष 2000 से 2021 तक करनाल का भूजल 12.86 मीटर नीचे चला गया है।
उन्होंने कहा कि पिछले 25 वर्षों में भूजल में चार गुना गिरावट आई, जो चिंता का विषय है। उनका विभाग करनाल और पानीपत दोनों जिले देखता है। करनाल जिले का करनाल खंड, पानीपत जिले का समालखा और बापौली खंड राज्य सरकार की ओर से डार्क जोन घोषित किए गए हैं। इन क्षेत्रों में भूजल स्तर गिरता जा रहा है। इन खंडों में भूजल स्तर को उठाने के लिए जल सुरक्षा योजना तैयार की जा रही है। किसानों को जागरूक किया जा रहा है। किसानों को सूक्ष्म सिंचाई विधि एवं फसल विविधीकरण अपनाने के लिए प्रेरित किया जा रहा है। यदि इसी रफ्तार से भूजल का दोहन होता रहा तो वह दिन दूर नहीं है जब आने वाली पीढ़ी जल से वंचित हो जाएगी। मौके पर सिंचाई एवं जल संसाधन विभाग के भूजल विशेषज्ञ शुभम, अमित कौशिक, भूजल विशेषज्ञ दीपक उपाध्याय, बलराम शर्मा, नीरज कुमार, सूचना संचार शिक्षा विशेषज्ञ सूबा सिंह, सुनील सिरोही, शोभित अग्रवाल, राकेश, मनजीत, समर्पित व अतुल उपस्थित रहे।
विज्ञापन
उन्होंने कहा कि पिछले 25 वर्षों में भूजल में चार गुना गिरावट आई, जो चिंता का विषय है। उनका विभाग करनाल और पानीपत दोनों जिले देखता है। करनाल जिले का करनाल खंड, पानीपत जिले का समालखा और बापौली खंड राज्य सरकार की ओर से डार्क जोन घोषित किए गए हैं। इन क्षेत्रों में भूजल स्तर गिरता जा रहा है। इन खंडों में भूजल स्तर को उठाने के लिए जल सुरक्षा योजना तैयार की जा रही है। किसानों को जागरूक किया जा रहा है। किसानों को सूक्ष्म सिंचाई विधि एवं फसल विविधीकरण अपनाने के लिए प्रेरित किया जा रहा है। यदि इसी रफ्तार से भूजल का दोहन होता रहा तो वह दिन दूर नहीं है जब आने वाली पीढ़ी जल से वंचित हो जाएगी। मौके पर सिंचाई एवं जल संसाधन विभाग के भूजल विशेषज्ञ शुभम, अमित कौशिक, भूजल विशेषज्ञ दीपक उपाध्याय, बलराम शर्मा, नीरज कुमार, सूचना संचार शिक्षा विशेषज्ञ सूबा सिंह, सुनील सिरोही, शोभित अग्रवाल, राकेश, मनजीत, समर्पित व अतुल उपस्थित रहे।
विज्ञापन