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Karnal News: फसल नुकसान का सबूत और रिकॉर्ड न होने पर शिकायत खारिज
Tue, 17 Feb 2026 01:00 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, करनाल
संवाद न्यूज एजेंसी, करनाल
Updated Tue, 17 Feb 2026 01:00 AM IST
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संवाद न्यूज एजेंसी
करनाल। जिला उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग ने दिवंगत किसान भाग सिंह के कानूनी वारिसों की ओर से फसल बीमा क्लेम के लिए दायर शिकायत को सबूतों के अभाव में खारिज कर दिया है। मामला वर्ष 2019-20 की खरीफ फसल (धान) के नुकसान की भरपाई से जुड़ा था।
गांव सावंत निवासी भाग सिंह ने प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना के तहत अपनी आठ एकड़ से अधिक भूमि की धान की फसल का बीमा कराया था। इसके लिए एक जुलाई, 2019 को उनके बैंक खाते से 5,088.12 रुपये का प्रीमियम काटा गया था। शिकायतकर्ताओं का आरोप था कि बैंक अधिकारियों ने पोर्टल पर जानकारी अपलोड करते समय उनके गांव का नाम सावंत के बजाए गलती से बुटाना दर्ज कर दिया था। किसान के परिजन ने दावा किया कि मौसम बदलने के कारण उनकी फसल खराब हो गई थी, लेकिन बीमा कंपनी ने डाटा में विसंगति का हवाला देते हुए क्लेम देने से मना कर दिया।
भारतीय स्टेट बैंक ने दलील दी कि उन्होंने समय पर प्रीमियम काटकर बीमा कंपनी को भेज दिया था, इसलिए क्लेम की जिम्मेदारी उनकी नहीं है। बीमा कंपनी ने स्पष्ट किया कि पोर्टल पर गलत गांव दर्ज होने के कारण दावा खारिज किया गया। साथ ही बुटाना गांव में वास्तविक उपज निर्धारित सीमा से अधिक थी, इसलिए वहां कोई दावा नहीं बनता था।
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सर्वे रिपोर्ट न खसरा गिरदावरी पेश की
आयोग के अध्यक्ष जसवंत सिंह और सदस्यों ने मामले की जांच के बाद पाया कि शिकायतकर्ता यह साबित करने में पूरी तरह विफल रहे कि उनकी फसल का वास्तव में कोई नुकसान हुआ था। रिकॉर्ड पर न तो कोई सर्वे रिपोर्ट थी और न ही कोई खसरा गिरदावरी पेश की गई जिससे फसल खराब होने की पुष्टि हो सके। हालांकि शिकायतकर्ताओं ने कहा कि गांव के अन्य किसानों को दावा मिला है, लेकिन उन्होंने इस दावे के समर्थन में किसी अन्य किसान का शपथपत्र पेश नहीं किया। आयोग ने निष्कर्ष निकाला कि शिकायत में योग्यता की कमी है। पर्याप्त साक्ष्य और ठोस सबूत न होने के कारण उपभोक्ता अदालत ने इस शिकायत को खारिज कर दिया और पार्टियों के लिए किसी भी मुआवजे या खर्च का आदेश नहीं दिया।
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करनाल। जिला उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग ने दिवंगत किसान भाग सिंह के कानूनी वारिसों की ओर से फसल बीमा क्लेम के लिए दायर शिकायत को सबूतों के अभाव में खारिज कर दिया है। मामला वर्ष 2019-20 की खरीफ फसल (धान) के नुकसान की भरपाई से जुड़ा था।
गांव सावंत निवासी भाग सिंह ने प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना के तहत अपनी आठ एकड़ से अधिक भूमि की धान की फसल का बीमा कराया था। इसके लिए एक जुलाई, 2019 को उनके बैंक खाते से 5,088.12 रुपये का प्रीमियम काटा गया था। शिकायतकर्ताओं का आरोप था कि बैंक अधिकारियों ने पोर्टल पर जानकारी अपलोड करते समय उनके गांव का नाम सावंत के बजाए गलती से बुटाना दर्ज कर दिया था। किसान के परिजन ने दावा किया कि मौसम बदलने के कारण उनकी फसल खराब हो गई थी, लेकिन बीमा कंपनी ने डाटा में विसंगति का हवाला देते हुए क्लेम देने से मना कर दिया।
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भारतीय स्टेट बैंक ने दलील दी कि उन्होंने समय पर प्रीमियम काटकर बीमा कंपनी को भेज दिया था, इसलिए क्लेम की जिम्मेदारी उनकी नहीं है। बीमा कंपनी ने स्पष्ट किया कि पोर्टल पर गलत गांव दर्ज होने के कारण दावा खारिज किया गया। साथ ही बुटाना गांव में वास्तविक उपज निर्धारित सीमा से अधिक थी, इसलिए वहां कोई दावा नहीं बनता था।
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सर्वे रिपोर्ट न खसरा गिरदावरी पेश की
आयोग के अध्यक्ष जसवंत सिंह और सदस्यों ने मामले की जांच के बाद पाया कि शिकायतकर्ता यह साबित करने में पूरी तरह विफल रहे कि उनकी फसल का वास्तव में कोई नुकसान हुआ था। रिकॉर्ड पर न तो कोई सर्वे रिपोर्ट थी और न ही कोई खसरा गिरदावरी पेश की गई जिससे फसल खराब होने की पुष्टि हो सके। हालांकि शिकायतकर्ताओं ने कहा कि गांव के अन्य किसानों को दावा मिला है, लेकिन उन्होंने इस दावे के समर्थन में किसी अन्य किसान का शपथपत्र पेश नहीं किया। आयोग ने निष्कर्ष निकाला कि शिकायत में योग्यता की कमी है। पर्याप्त साक्ष्य और ठोस सबूत न होने के कारण उपभोक्ता अदालत ने इस शिकायत को खारिज कर दिया और पार्टियों के लिए किसी भी मुआवजे या खर्च का आदेश नहीं दिया।