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Karnal News: साझा बाजार बना महिलाओं की आजीविका का सहारा
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- हस्तनिर्मित उत्पादों की बिक्री कर रहीं धनोपार्जन
- हर पांच दिन में जोड़ रहे नई महिला सदस्य, समूह को स्टार्टअप के लिए मिल रहा 10 लाख तक का लोन
- गीता जयंती में भी स्टॉल लगाने का मिला मौका
संवाद न्यूज एजेंसी
करनाल। महिलाओं की आर्थिक स्थिति सुधारने की मंशा को लेकर हरियाणा राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन की ओर से शुरू किए गए साझा बाजार को एक साल पूरा हो चुका है। ये महिलाओं की आजीविका के लिए बेहतर मौका साबित हो रहा है। यहां ग्रामीण महिलाओं को रोजगार व उनके हाथों से बने उत्पादों की बिक्री हो रही है।
साझा बाजार के 10 बूथों पर महिलाएं अपने हाथों से बने उत्पाद जैसे मिट्टी के बर्तन, सिलाई के कपड़े, बैग, डेयरी उत्पाद, हस्तनिर्मित ऊनी कपड़े, स्वयं उत्पादित सब्जियां व अन्य घरेलू सामान बेच रही हैं, जो सारा हस्तनिर्मित बन रहा है। इस समूह के अंतर्गत फिलहाल 10 में से सात बूथों पर महिलाएं काम कर रही हैं। इसमें नीलोखेड़ी, करनाल, घरौंडा, कतलहड़ी, चिड़ाव, मूनक ब्लॉक से कई महिलाओं को समूह में आजीविका चलाने का लाभ मिल रहा है। समूह का लक्ष्य 40 ब्लॉकों की महिलाओं को लाभान्वित करना है।
- बूथों पर हस्तनिर्मित सामान बेच चला रही आजीविका
स्टिचिंग बूथ से सुदेश ने बताया कि हमारे ग्रुप के सदस्य अनेक तरह के सामान बनाकर बेच रही हैं जिसमें नीलोखेड़ी से आशा मिट्टी का सामान व सुषमा ऊनी कपड़े बनाकर बेचने का काम अपने बूथ पर कर रही हैं। मूनक से बाला खाना बनाकर टिफिन सर्विस चला रही हैं। खाने की स्टॉल लगाकर अपनी आजीविका चला रही है। करनाल से राजकुमारी ब्यूटी पार्लर का काम कर रही है। चिड़ाव से बबली स्वयं निर्मित हाउस क्लीनिंग उत्पाद बनाकर बेचने का काम कर रही है। घरौंडा से सविता डेयरी का काम कर रही हैं। उन्होंने बताया कि इस साल हमें गीता जयंती में भी स्टॉल लगाकर अपना हस्तनिर्मित सामान बेचने का मौका मिला, जिससे हमें काफी लाभ हुआ। सुदेश ने बताया कि हमारे ग्रुप के प्रत्येक सदस्य के अलग-अलग बूथ लगाए गए हैं जिसमें काम करने के लिए जरूरी सामान उपलब्ध हैं, जिनसे हम अपना काम करते हैं।
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महिलाओं को मिल रहा काम
मिट्टी से सामान बनाने वाली आशा ने बताया कि इस समूह से महिलाओं को इसका लाभ मिले, इसके लिए पांच-पांच दिन के अंतराल में नई महिलाओं को सदस्य के रूप में बूथों पर काम दिया जा रहा है जिससे ब्लॉक व गांव की ज्यादा से ज्यादा महिलाओं की आजीविका चले। उन्होंने बताया कि समूह के स्टार्टअप के लिए 10 लाख रुपये तक का लोन दिया जा रहा है। साथ ही उन्होंने बताया कि हाल ही में हमें लखपति दीदी भी घोषित किया गया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने हमारे लिए सखी बीमा योजना भी घोषित की, जो हमारे भविष्य के लिए लाभकारी होगा। आशा ने बताया कि अब तक उनका काम अच्छा चल रहा है। काफी महिलाओं को रोजगार के रूप में काम मिल रहा है।
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- हर पांच दिन में जोड़ रहे नई महिला सदस्य, समूह को स्टार्टअप के लिए मिल रहा 10 लाख तक का लोन
- गीता जयंती में भी स्टॉल लगाने का मिला मौका
संवाद न्यूज एजेंसी
करनाल। महिलाओं की आर्थिक स्थिति सुधारने की मंशा को लेकर हरियाणा राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन की ओर से शुरू किए गए साझा बाजार को एक साल पूरा हो चुका है। ये महिलाओं की आजीविका के लिए बेहतर मौका साबित हो रहा है। यहां ग्रामीण महिलाओं को रोजगार व उनके हाथों से बने उत्पादों की बिक्री हो रही है।
साझा बाजार के 10 बूथों पर महिलाएं अपने हाथों से बने उत्पाद जैसे मिट्टी के बर्तन, सिलाई के कपड़े, बैग, डेयरी उत्पाद, हस्तनिर्मित ऊनी कपड़े, स्वयं उत्पादित सब्जियां व अन्य घरेलू सामान बेच रही हैं, जो सारा हस्तनिर्मित बन रहा है। इस समूह के अंतर्गत फिलहाल 10 में से सात बूथों पर महिलाएं काम कर रही हैं। इसमें नीलोखेड़ी, करनाल, घरौंडा, कतलहड़ी, चिड़ाव, मूनक ब्लॉक से कई महिलाओं को समूह में आजीविका चलाने का लाभ मिल रहा है। समूह का लक्ष्य 40 ब्लॉकों की महिलाओं को लाभान्वित करना है।
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- बूथों पर हस्तनिर्मित सामान बेच चला रही आजीविका
स्टिचिंग बूथ से सुदेश ने बताया कि हमारे ग्रुप के सदस्य अनेक तरह के सामान बनाकर बेच रही हैं जिसमें नीलोखेड़ी से आशा मिट्टी का सामान व सुषमा ऊनी कपड़े बनाकर बेचने का काम अपने बूथ पर कर रही हैं। मूनक से बाला खाना बनाकर टिफिन सर्विस चला रही हैं। खाने की स्टॉल लगाकर अपनी आजीविका चला रही है। करनाल से राजकुमारी ब्यूटी पार्लर का काम कर रही है। चिड़ाव से बबली स्वयं निर्मित हाउस क्लीनिंग उत्पाद बनाकर बेचने का काम कर रही है। घरौंडा से सविता डेयरी का काम कर रही हैं। उन्होंने बताया कि इस साल हमें गीता जयंती में भी स्टॉल लगाकर अपना हस्तनिर्मित सामान बेचने का मौका मिला, जिससे हमें काफी लाभ हुआ। सुदेश ने बताया कि हमारे ग्रुप के प्रत्येक सदस्य के अलग-अलग बूथ लगाए गए हैं जिसमें काम करने के लिए जरूरी सामान उपलब्ध हैं, जिनसे हम अपना काम करते हैं।
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महिलाओं को मिल रहा काम
मिट्टी से सामान बनाने वाली आशा ने बताया कि इस समूह से महिलाओं को इसका लाभ मिले, इसके लिए पांच-पांच दिन के अंतराल में नई महिलाओं को सदस्य के रूप में बूथों पर काम दिया जा रहा है जिससे ब्लॉक व गांव की ज्यादा से ज्यादा महिलाओं की आजीविका चले। उन्होंने बताया कि समूह के स्टार्टअप के लिए 10 लाख रुपये तक का लोन दिया जा रहा है। साथ ही उन्होंने बताया कि हाल ही में हमें लखपति दीदी भी घोषित किया गया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने हमारे लिए सखी बीमा योजना भी घोषित की, जो हमारे भविष्य के लिए लाभकारी होगा। आशा ने बताया कि अब तक उनका काम अच्छा चल रहा है। काफी महिलाओं को रोजगार के रूप में काम मिल रहा है।