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कान की कोशिका से तैयार की क्लोन कटड़ी

Thu, 27 Aug 2015 12:57 AM IST
ब्यूरो/अमरउजाला, करनाल
ब्यूरो/अमरउजाला, करनाल Updated Thu, 27 Aug 2015 12:57 AM IST
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clone buffalo

एनडीआरआई में गरिमा-2 के बाद अब सामान्य प्रसव द्वारा ‘स्वरूपा’ नामक क्लोन कटड़ी पैदा की है। जन्म के समय इसका भार 32 किलो आंका गया, फिलहाल वह बिलकुल स्वस्थ है। इसे एनडीआरआई के पशुधन फार्म की 'करण-कीर्ति' नाम की भैंस के कान की कोशिका को लेकर "हैंड गाइडेड क्लोनिंग" तकनीक द्वारा पैदा किया गया है।

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करण-क्रीति ज्यादा दूध देने वाली एक सामान्य भैंस है। इसने अपने प्रथम ब्यांत के 427 दिन में 4425 किलो दूध दिया और दूसरे ब्यांत के 305 दिन में 3812 किलो दूध दिया था। इसके अलावा इसने एक दिन में 25.1 किलो दूध दिया है, जोकि संस्थान के इतिहास सबसे अधिक दूध देने का रिकार्ड रहा है।
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इस क्लोन को पैदा करने में डॉ. एस.के. सिंगला, डॉ. एम.एस. चौहान, डॉ. आर.एस. मानिक, डॉ. पी.पल्टा, डॉ. एस.एस. लठवाल और अनुज के. राजा का योगदान है। वैज्ञानिकों ने बताया कि इस तकनीक से उच्च नस्ल की दुधारू गायों एवं भैंसों की संख्या बढ़ाई जा सकती है। कटड़ी एक अगस्त को पैदा हुई।
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वह बिलकुल स्वस्थ है। उन्होंने बताया कि इससे पहले करण-कीर्ति का क्लोन पूर्णिमा भी पैदा हो चुका है, जोकि मात्र 19 दिन ही जीवित रहा था, लेकिन स्वरूपा तंदुरुस्त है, उसे विशेषज्ञों की निगरानी में रखा गया है। बता दें कि एनडीआरआई में इससे पहले क्लोन द्वारा गरिमा व गरिमा टू को जन्म दिया जा चुका है।
दूरगामी होंगे परिणाम : डा. श्रीवास्तव
एनडीआरआई के निदेशक डॉ. एके श्रीवास्तव ने बताया कि इस तकनीक के दूरगामी परिणाम मिलेंगे और इससे भारत में अधिक उच्च नस्ल की दुधारू भैंसों की संख्या बढ़ाने में सहायता मिलेगी। दुनिया में सबसे अधिक भैंस भारत में है और वे देश के कुल दूध उत्पादन का 55 प्रतिशत उपलब्ध कराती है, लेकिन उच्च गुणवत्ता वाली भैंस की संख्या अभी भी कम है और इनकी संख्या को बढ़ाने में यह तकनीक लाभकारी सिद्घ होगी।


उधर, भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद् के महानिदेशक डॉ. एस. अय्यप्पन नई दिल्ली ने वैज्ञानिकों की टीम को बधाई दी और कहा कि हैंड गाइडेड क्लोनिंग तकनीक हमें अभिजात वर्ग के जर्मप्लाज्म में तेजी से वृद्धि की सुविधा प्रदान करेगी। इस तकनीक से बढ़ती जनसंख्या के लिए दूध की मांग को पूरा करने में हमें सहायता मिलेगी।

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