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दो दिन और रहेगा मौसम खराब
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मौसम का मिजाज सोमवार को एकबार फिर बिगड़ गया। पूरा दिन घने बादल छाए रहने के साथ रूक-रूक कर बूंदाबांदी होती रही। यही स्थिति आगे भी एक दो दिन बनी रहने की संभावना जतायी जा रही है, यानी दो दिन लगातार मौसम खराब रहने के आसार हैं। भारतीय मौसम विज्ञान विभाग के अनुसार सोमवार को अधिकतम तापमान 19.0 डिग्री और न्यूनतम 6.6 डिग्री सेल्सियस रहा। 30 जनवरी को न्यूनतम तापमान और नीचे जाने की संभावना है। अधिकतम तापमान में भी हल्की गिरावट आ सकती है।
जनवरी में हुई 54.02 एमएम बारिश
इस महीने करनाल में बारिश की स्थिति सामान्य ही रही है। पिछले सालों में जो औसतन बारिश हुई, लगभग वही स्थिति इस साल रही। 2020 में अब तक 54.02 एमएम वर्षा दर्ज की गई है। 2019 में 28.8 एमएम, 2018 में 34.2 एमएम, 2017 में 85.8 एमएम वर्षा हुई। 2015 में 15 एमएम, 2014 में 65.8 एमएम, 2013 में 64.4 एमएम व 2012 में 21.6 एमएम बारिश हुई। पिछले 48 सालों में केवल 1995 में ही सबसे अधिक 139 एमएम बारिश हुई। इसके अलावा किसी भी साल जनवरी में बारिश का आंकड़ा 100 एमएम तक नहीं पहुंचा।
किसानों को घबराने की नहीं जरूरत
लगातार बादल छाए रहने और हल्की बूंदाबांदी से गेहूं की फसल में किसानों को निगरानी रखने की जरूरत है। हरियाणा के अंबाला जिले के नारायणगढ़ के समीप एक गांव में गेहूं के खेत में पीला रतुआ के लक्षण पाए गए थे। उसके बाद से किसान अलर्ट हैं। भारतीय गेहूं एवं जौ अनुसंधान संस्थान के वैज्ञानिक डा. सुधीर का कहना है कि किसानों को घबराने की जरूरत नहीं है। किसानों को चाहिए कि वह गेहूं के खेतों में निगरानी करते रहें। यदि खेत में कहीं पर पीला रतुआ के लक्षण दिखाई दें या हाथों पर पीला पाउडर लगे तो कृषि विशेषज्ञ की सलाह के अनुसार स्प्रे करवाएं।
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जनवरी में हुई 54.02 एमएम बारिश
इस महीने करनाल में बारिश की स्थिति सामान्य ही रही है। पिछले सालों में जो औसतन बारिश हुई, लगभग वही स्थिति इस साल रही। 2020 में अब तक 54.02 एमएम वर्षा दर्ज की गई है। 2019 में 28.8 एमएम, 2018 में 34.2 एमएम, 2017 में 85.8 एमएम वर्षा हुई। 2015 में 15 एमएम, 2014 में 65.8 एमएम, 2013 में 64.4 एमएम व 2012 में 21.6 एमएम बारिश हुई। पिछले 48 सालों में केवल 1995 में ही सबसे अधिक 139 एमएम बारिश हुई। इसके अलावा किसी भी साल जनवरी में बारिश का आंकड़ा 100 एमएम तक नहीं पहुंचा।
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किसानों को घबराने की नहीं जरूरत
लगातार बादल छाए रहने और हल्की बूंदाबांदी से गेहूं की फसल में किसानों को निगरानी रखने की जरूरत है। हरियाणा के अंबाला जिले के नारायणगढ़ के समीप एक गांव में गेहूं के खेत में पीला रतुआ के लक्षण पाए गए थे। उसके बाद से किसान अलर्ट हैं। भारतीय गेहूं एवं जौ अनुसंधान संस्थान के वैज्ञानिक डा. सुधीर का कहना है कि किसानों को घबराने की जरूरत नहीं है। किसानों को चाहिए कि वह गेहूं के खेतों में निगरानी करते रहें। यदि खेत में कहीं पर पीला रतुआ के लक्षण दिखाई दें या हाथों पर पीला पाउडर लगे तो कृषि विशेषज्ञ की सलाह के अनुसार स्प्रे करवाएं।
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