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चुनौती : भूमि अधिग्रहण ने लगाया एयरपोर्ट परियोजना को ग्रहण

Amar Ujala Bureau अमर उजाला ब्यूरो
Updated Wed, 05 Jan 2022 02:27 AM IST
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Challenge: Land acquisition imposed on airport project
माई सिटी रिपोर्टर
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करनाल। हवाई पट्टी का विस्तार करके करनाल में एयरपोर्ट बनाने की परियोजना 13 साल कागजों में दफन रही। सीएम के प्रयासों के बाद मुश्किल से इस पर काम शुरू हुआ, लेकिन अब जमीन अधिग्रहण ने इस परियोजना पर ग्रहण लगा दिया है। 27 एकड़ जमीन की कमी के कारण परियोजना आगे बढ़ने से रुकी है। पिछले करीब 10 माह से प्रशासन किसानों से अधिग्रहण होने वाली इस जमीन को लेने का प्रयास कर रहा है। लेकिन अभी तक कोई रास्ता नहीं निकल पाया है।
हालांकि प्रशासन का दावा है कि एक-दो माह में जमीन मिल जाएगी। प्रशासन की योजना के अनुसार मार्च 2021 में इस परियोजना पर काम शुरू होना था। तब कलवेहड़ी के किसानों की 38 एकड़ जमीन मिली थी, जिसकी रजिस्ट्री भी हो चुकी है। लेकिन इसके अतिरिक्त 27 एकड़ जमीन की और जरूरत पड़ी, जिसको लेकर अभी तक सहमति नहीं बन पाई। जमीन मिलने के बाद परियोजना की डीपीआर तैयार होगी। ऐसे में साल के अंत तक योजना को मूर्त रूप देने के लिए जमीनी स्तर पर काम शुरू होने की उम्मीद है।
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करनाल में 2008 से घरेलू हवाई अड्डा बनाने को लेकर कवायद चल रही है। अक्तूबर 2012 को एयरपोर्ट अथॉरिटी ऑफ इंडिया ने यहां हवाई अड्डा बनाने की संभावना तलाशी। जून 2014 तक अधिकारियों के दौरे और चर्चाएं ही चलती रहीं। फिर नई सरकार बनने के बाद सीएम मनोहर लाल ने 8 नवंबर 2014 को नेवल हवाई पट्टी का विस्तार कर हवाई अड्डा बनाने की घोषणा की। लेकिन अधिकारियों की सुस्ती के कारण काम ही शुरू नहीं हो पाया।
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दो हजार फीट बढ़ेगा रन-वे, छोटे-मध्यम विमान उतरेंगे
परियोजना में हवाई अड्डे पर रन वे का विस्तार 3000 फीट से बढ़ाकर 5000 फीट किया जाना है। इसके बाद हवाई अड्डे पर छोटे और मध्यम विमान उतर सकेंगे। जिसका उपयोग पार्किंग, बेसिंग और लाइट एमआरओ के लिए होगा। परियोजना में कुल 172 एकड़ 3 कनाल 16 मरला जमीन चाहिए। इसमें से 106 एकड़ 6 कनाल 14 मरला हरियाणा सरकार की जमीन है। करीब 38 एकड़ जमीन ई-भूमि पोर्टल पर सहमति जताते हुए किसानों द्वारा दे दी गई व 27 एकड़ भूमि की और जरूरत है।
अभी सिर्फ लाइसेंस और प्रशिक्षण संबंधित होते हैं कार्य
हरियाणा इंस्टीट्यूट ऑफ सिविल एविएशन करनाल की नेवल हवाई पट्टी में विज्ञान संकाय से 12वीं उत्तीर्ण विद्यार्थी को कामर्शियल पायलट लाइसेंस के लिए 200 घंटे की फ्लाइंग करवाई जाती है। यह लाइसेंस डायरेक्टर जनरल ऑफ सिविल एविएशन दिल्ली से बनता है। प्रशिक्षण के लिए टू सीटर सेशना-152 व फोर सीटर सेशना-172 क्राफ्ट हैं। इसके अलावा एनसीसी एयर विंग के बच्चे भी अभ्यास करते हैं।

वर्जन- फोटो--111 नंबर है।
27 एकड़ जमीन जल्द प्रशासन को मिल जाएगी। किसानों के साथ बातचीत जारी है। उन्हें जमीन के बदले दूसरी जगह जमीन दी जाएगी। इसके बाद नागरिक उड्डयन विभाग द्वारा एक विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (डीपीआर) तैयार की जाएगी।
- निशांत कुमार यादव, डीसी करनाल
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