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मोतियाबिंद के ऑपरेशन में नहीं लगता अधिक समय : डॉ. नीतिका
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. नेत्रदान पखवाड़े में डॉक्टरों ने मरीजों को मोतियाबिंद के बारे में दी जानकारी
संवाद न्यूज एजेंसी
करनाल। जिला नागरिक अस्पताल के नेत्र विभाग में सोमवार को 39वें नेत्रदान पखवाड़े के नौवें दिन मरीजों को नेत्रदान के प्रति जागरूक किया गया। वहीं उम्र के साथ बढ़ते मोतियाबिंद के लक्षणों व उपचार की जानकारी दी गई। नेत्र रोग विशेषज्ञ डॉ. आशुतोष मित्तल ने बताया कि आंख के लैंस में धुंधलापन या सफेदी आने पर उसको सफेद मोतिया या मोतिबिंद कहते हैं, यह हमारे देश में दृष्टिहीनता का प्रमुख कारण है।
नेत्र रोग विशेषज्ञ डॉ. नीतिका ने बताया कि मोतियाबिंद अधिकतर 40 वर्ष से अधिक उम्र के लोगों में होता है। इसके कारण दृष्टि कमजोर हो जाती है व इलाज नहीं कराने से अंधापन हो सकता है। शुगर की बीमारी व आंख की चोट से भी मोतियाबिंद हो सकता है। कुछ बच्चों में जन्म से मोतियाबिंद होता है। मोतियाबिंद प्राय: अलग-अलग समय में दोनों आंखों को प्रभावित करता है। उन्होंने बताया कि मोतियाबिंद का एकमात्र इलाज ऑपरेशन है, दवा डालने से मोतियाबिंद का इलाज नहीं हो सकता है। ऑपरेशन में आंख से सफेद या धुंधला लैंस को निकाल कर उसके स्थान पर एक कृत्रिम लैंस लगाया जाता है।
मोतियाबिंद का ऑपरेशन सरल है व इसमें अधिक समय नहीं लगता। ऑपरेशन के बाद खोई हुई रोशनी वापस आ जाती है एवं व्यक्ति अपना कार्य सुचारू रूप से कर सकता है। मोतियाबिंद के ऑपरेशन के लिए मोतिया के पकने का इंतजार करने की आवश्यकता नहीं है। जैसे ही मोतियाबिंद जीवन शैली को प्रभावित करने लगता है वैसे ही इसका इलाज करवा लेना चाहिए। मौके पर नेत्रदान काउंसलर सुमन, उर्मिला बिरला, किरण, अशोक राणा व विकास मौजूद रहे।
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ऑपरेशन के बाद सावधानियां
आंखों की दवा व मलहम डॉक्टर की सलाह के अनुसार डालें। धूल, धुएं व धूप से आंख को बचाएं। ऑपरेशन वाली आंख को रगड़ें नहीं। आंख में पानी नहीं जाने दें। धूम्रपान न करें। आंख में अधिक लाली, दर्द होने या नजर में अचानक कमी आने पर अपने नेत्र चिकित्सक से शीघ्र संपर्क करें। ऑपरेशन के 4-6 सप्ताह के बाद नेत्र विशेषज्ञ को दिखाएं व चश्मे का नंबर लें।
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संवाद न्यूज एजेंसी
करनाल। जिला नागरिक अस्पताल के नेत्र विभाग में सोमवार को 39वें नेत्रदान पखवाड़े के नौवें दिन मरीजों को नेत्रदान के प्रति जागरूक किया गया। वहीं उम्र के साथ बढ़ते मोतियाबिंद के लक्षणों व उपचार की जानकारी दी गई। नेत्र रोग विशेषज्ञ डॉ. आशुतोष मित्तल ने बताया कि आंख के लैंस में धुंधलापन या सफेदी आने पर उसको सफेद मोतिया या मोतिबिंद कहते हैं, यह हमारे देश में दृष्टिहीनता का प्रमुख कारण है।
नेत्र रोग विशेषज्ञ डॉ. नीतिका ने बताया कि मोतियाबिंद अधिकतर 40 वर्ष से अधिक उम्र के लोगों में होता है। इसके कारण दृष्टि कमजोर हो जाती है व इलाज नहीं कराने से अंधापन हो सकता है। शुगर की बीमारी व आंख की चोट से भी मोतियाबिंद हो सकता है। कुछ बच्चों में जन्म से मोतियाबिंद होता है। मोतियाबिंद प्राय: अलग-अलग समय में दोनों आंखों को प्रभावित करता है। उन्होंने बताया कि मोतियाबिंद का एकमात्र इलाज ऑपरेशन है, दवा डालने से मोतियाबिंद का इलाज नहीं हो सकता है। ऑपरेशन में आंख से सफेद या धुंधला लैंस को निकाल कर उसके स्थान पर एक कृत्रिम लैंस लगाया जाता है।
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मोतियाबिंद का ऑपरेशन सरल है व इसमें अधिक समय नहीं लगता। ऑपरेशन के बाद खोई हुई रोशनी वापस आ जाती है एवं व्यक्ति अपना कार्य सुचारू रूप से कर सकता है। मोतियाबिंद के ऑपरेशन के लिए मोतिया के पकने का इंतजार करने की आवश्यकता नहीं है। जैसे ही मोतियाबिंद जीवन शैली को प्रभावित करने लगता है वैसे ही इसका इलाज करवा लेना चाहिए। मौके पर नेत्रदान काउंसलर सुमन, उर्मिला बिरला, किरण, अशोक राणा व विकास मौजूद रहे।
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ऑपरेशन के बाद सावधानियां
आंखों की दवा व मलहम डॉक्टर की सलाह के अनुसार डालें। धूल, धुएं व धूप से आंख को बचाएं। ऑपरेशन वाली आंख को रगड़ें नहीं। आंख में पानी नहीं जाने दें। धूम्रपान न करें। आंख में अधिक लाली, दर्द होने या नजर में अचानक कमी आने पर अपने नेत्र चिकित्सक से शीघ्र संपर्क करें। ऑपरेशन के 4-6 सप्ताह के बाद नेत्र विशेषज्ञ को दिखाएं व चश्मे का नंबर लें।