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गाजर घास, स्वास्थ्य के लिए खतरनाक खरपतवार:डॉ.राजेंद्र यादव
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1005 सीएसएसआरआई में गाजर घास के अभियान मौजूद वैज्ञानिक। संवाद
सीएसएसआरआई में गाजर घास के खिलाफ चलाया गया अभियान
माई सिटी रिपोर्टर
करनाल। केंद्रीय मृदा लवणता अनुसंधान संस्थान (सीएसएसआरआई) के निदेशक डॉ.राजेंद्र कुमार यादव ने कहा कि पार्थेनियम, जिसे गाजर या कांग्रेस घास भी कहा जाता है, ये काफी खतरनाक खरपतवार है, जो फसलों की पैदावार तो कम करता ही है, साथ ही इसके परागण मनुष्यों और पशुओं में अस्थमा, एलर्जी, चर्म रोग जैसी समस्याएं पैदा करते हैं।
निदेशक ने कहा कि आईसीएआर के निर्देश पर सभी संस्थान में 16 से 22 अगस्त तक तक पार्थेनियम जागरूकता सप्ताह मनाया गया। जिसमें संस्थान के सभी वर्गो के अधिकारियों व कर्मचारियों ने इस घास को उखाड़कर उसे नष्ट किया। जागरूकता अभियान के दौरान सुरक्षित तरीके से पार्थेनियम प्रबंधन, जैविक नियंत्रण पद्धतियों तथा वैकल्पिक उपयोगों के बारे में जानकारी दी। उन्होंने कहा कि सामुदायिक भागीदारी से ही इस खरपतवार की समस्या पर काबू पाया जा सकता है। उन्होंने अपील की कि सभी अपने घरों, खेतो व सार्वजनिक स्थलों से पार्थेनियम को हटाकर स्वच्छ एवं स्वस्थ पर्यावरण के निर्माण में योगदान दें।
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माई सिटी रिपोर्टर
करनाल। केंद्रीय मृदा लवणता अनुसंधान संस्थान (सीएसएसआरआई) के निदेशक डॉ.राजेंद्र कुमार यादव ने कहा कि पार्थेनियम, जिसे गाजर या कांग्रेस घास भी कहा जाता है, ये काफी खतरनाक खरपतवार है, जो फसलों की पैदावार तो कम करता ही है, साथ ही इसके परागण मनुष्यों और पशुओं में अस्थमा, एलर्जी, चर्म रोग जैसी समस्याएं पैदा करते हैं।
निदेशक ने कहा कि आईसीएआर के निर्देश पर सभी संस्थान में 16 से 22 अगस्त तक तक पार्थेनियम जागरूकता सप्ताह मनाया गया। जिसमें संस्थान के सभी वर्गो के अधिकारियों व कर्मचारियों ने इस घास को उखाड़कर उसे नष्ट किया। जागरूकता अभियान के दौरान सुरक्षित तरीके से पार्थेनियम प्रबंधन, जैविक नियंत्रण पद्धतियों तथा वैकल्पिक उपयोगों के बारे में जानकारी दी। उन्होंने कहा कि सामुदायिक भागीदारी से ही इस खरपतवार की समस्या पर काबू पाया जा सकता है। उन्होंने अपील की कि सभी अपने घरों, खेतो व सार्वजनिक स्थलों से पार्थेनियम को हटाकर स्वच्छ एवं स्वस्थ पर्यावरण के निर्माण में योगदान दें।
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